लखनऊ

तो माँ के चुनावी प्रचार में साथ नहीं देंगे वरुण… . भाजपा ने घोषित किया नहीं उम्मीदवार फिर भी लग रहे ऐसे कयास…

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आत्माराम त्रिपाठी की रिपोर्ट

लोकसभा चुनाव 2024 में वरुण गांधी बतौर प्रत्याशी दिखाई नहीं देंगे, यह अब लगभग तय है। बीजेपी ने इस बार पीलीभीत से योगी सरकार में मंत्री जितिन प्रसाद को चुनाव मैदान में उतारा है। वरुण गांधी की मां और बीजेपी की सीनियर नेता मेनका गांधी इस बार फिर से सुलतानपुर लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं।

अब क्योंकि वरुण गांधी खुद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं तो ऐसे में माना जा रहा था कि वो अपनी मां के प्रचार की कमान संभालेंगे लेकिन अब इस पर भी संशय के बादल नजर आ रहे हैं। 

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सोमवार को सुलतानपुर पहुंची मेनका गांधी से जब इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वरुण गांधी और उनकी पत्नी बीमार हैं।

दरअसल मेनका गांधी से सवाल किया गया था कि क्या वरुण गांधी उनके चुनाव का संचालन करेंगे। इसके जवाब में मेनका गांधी ने कहा, “इस समय वरुण गांधी और उनकी पत्नी बीमार हैं, इसलिये वह आराम कर रहे हैं।”

क्या रायबरेली से चुनाव लड़ सकते हैं वरुण गांधी?

बीजेपी ने अभी तक रायबरेली लोकसभा सीट से अपने प्रत्याशी के नाम का ऐलान नहीं किया। ऐसे में कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस के इस गढ़ को जीतने के लिए बीजेपी वरुण गांधी को उम्मीदवार घोषित कर सकती है। इस बारे में जब मेनका गांधी से सवाल किया गया तो उन्होंने कुछ भी स्पष्ट करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “मैं बीजेपी में हूं, दूसरी पार्टी की नेता नहीं जो उसके बारे में आपको जानकारी दूं।”

मेनका गांधी के टिकट में क्यों हुई देरी ?

बीजेपी द्वारा दूसरी बार सुलतानपुर से प्रत्याशी बनाई गई मेनका गांधी से जब टिकट घोषित किए जाने में हुई देरी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने का कि उनका चुनाव लड़ना तो तय था लेकिन निर्वाचन क्षेत्र तय करने के कारण घोषणा में देरी हुई। मेनका गांधी ने कहा, “मेरा चुनाव लड़ना तय था, लेकिन किस क्षेत्र से लड़ना है इसी को लेकर देरी हुई।”

सुलतानपुर लोकसभा सीट से एक मौके को छोड़कर कोई भी प्रत्याशी लगातार दूसरी बार चुनाव नहीं जीता है। अपवाद के तौर पर बीजेपी के डीबी राय साल 1996 और साल 1998 में लगातार दो बार यहां से चुनाव जीतने में सफल रहे है। साल 2014 में सुलतानपुर लोकसभा सीट पर वरुण गांधी ने जीत दर्ज की थी।

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"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."

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