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देवरिया

देवरिया को आपदा सुरक्षा के क्षेत्र में मॉडल जिला बनाने हेतु “इंडियन इंस्टीट्यूट पब्लिक हेल्थ” है कृतसंकल्प

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इरफान अली की रिपोर्ट 

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देवरिया। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण देवरिया तथा यूनिसेफ और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ गांधीनगर के संयुक्त तत्वावधान में देवरिया सदर तहसील के सभागार में चल रहे आपदा मित्रों के आपदा जोखिम न्यूनीकरण विषय पर संचालित तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन आपदा मित्रों को संबोधित करते हुए अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व ) एन के सिंह ने कहा कि किसी भी प्रशिक्षण की उपलब्धता तभी सही है जब प्राप्त ज्ञान का समुचित उपयोग किया जाए। आपदा मित्र सरकार के साथ मिलकर किसी भी आपदा के समय आपदा से होने वाली क्षति को कम करने में मददगार हो सकते हैं।

उप जिलाधिकारी देवरिया सदर सौरभ सिंह ने अग्निशमन विभाग के लोगों द्वारा मॉक ड्रिल किये जाने पर आपदा मित्रों को बताया कि यह डेमो आपके व्यक्तिगत जीवन में मददगार साबित होगा।

इंडियन इंस्टीट्यूट पब्लिक हेल्थ गांधीनगर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ महावीर गुलइचा ने कहा कि किसी भी आपदा के समय आपदा मित्र फर्स्ट रिस्पांसर के रूप में होते हैं । आपदा मित्रों को जितना बेहतर प्रशिक्षण दिया जायेगा उतनी ही क्षमता के साथ सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि देवरिया को आपदा सुरक्षा के क्षेत्र में मॉडल जिला बनाने हेतु इंडियन इंस्टीट्यूट पब्लिक हेल्थ गांधीनगर अपना पूर्ण योगदान करेगा , जिससे कि इसे आपदा से होने वाली न्यूनतम क्षति वाले जिलों में रखा जा सके ।

अग्निशमन विभाग के मोहम्मद मुस्तकीम खान ने बताया कि आग लगने पर सबसे पहले उसके कारणों को जानना चाहिए। तत्पश्चात उसे बुझाने का प्रयास करना चाहिए। एक रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें कोई भी जलने वाला पदार्थ चाहे वह ठोस द्रव गैस हो इनके मिलने से ही आग लग सकती है और कभी भी आग लगने पर ऑक्सीजन की सप्लाई बंद करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है । उन्होंने गैस सिलेंडर से लगने वाली आग को बुझाने के तरीके तथा खेतों में लगने वाली आग को बुझाने के तरीकों के संदर्भ में प्रतिभागियों को विस्तार से जानकारी प्रदान की।

यूनिसेफ के राज्य सलाहकार घनश्याम मिश्रा जी ने कहा कि सतर्कता और जागरूकता ही आपदा से बचाव का सबसे उत्तम माध्यम है । जीवन जीने का सही तरीका ही आपदा प्रबंधन है । हम सभी के जीवन में नित्य प्रतिदिन छोटी मोटी घटनाएं होती रहती हैं उन्हीं घटनाओं से सीख लेकर हम बेहतर योजना निर्माण की पहल कर सकते हैं। क्षेत्रीय समन्वयक विजय प्रताप सिंह ने आपदा के दौरान हुई क्षति सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता राशि एवं उसके मानकों के विषय मे विस्तार से जानकारी दी। साथ ही कृषि बीमा तथा पशु बीमा के संदर्भ में भी जानकारी प्रदान की।

प्रशिक्षक अजीत तिवारी ने बाढ़ के संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि किसी भी आपदा से निपटने के लिए तीन चरण है आपदा पूर्व आपदा के दौरान तथा आपदा के पश्चात। यदि आपदा पूर्व बेहतर तैयारी की जाए और उन तैयारियों का सही तरीके से आपदा के दौरान पालन किया जाए तो उससे होने वाली क्षति को न्यूनतम किया जा सकता है। उन्होंने बाढ़ के दौरान घरों में रखी जाने वाली वस्तुओं तथा तैयारियों के संदर्भ में विस्तार से जानकारी प्रदान किया।

प्रशिक्षक जावेद आलम ने बाढ़ में डूबते हुए व्यक्ति को बचाने तथा आग में झुलसे व्यक्ति के उपचार के संदर्भ में प्रतिभागियों को जानकारी प्रदान किया। वरिष्ठ प्रशिक्षक डॉ एसके सिंह ने आपदा के दौरान फैलने वाली संक्रामक रोगों से बचाव के तरीकों पर उपस्थित प्रतिभागियों को जानकारी प्रदान किया।

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