अपराध

इस गाँव के हर घर के आगे पसरा मौत का सन्नाटा…चीख चीख कर बयां कर रहा मौत की वजह… कांप उठेंगे आप भी

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चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से करीब 90 किलोमीटर की दूरी पर जिला सीतापुर… और इस जिले का वो पल्हापुर गांव। वही गांव, जहां आज हर घर के बाहर एक मातम पसरा है। पूरे गांव की आंखों से उन तीन मासूम बच्चों के चेहरे नहीं हट रहे, जो अक्सर खेलते हुए उनके आंगन में आ आया करते थे। ना दिल मानने को तैयार है और ना दिमाग… कि ऐसे नन्हें मासूमों को कोई कैसे इतनी बेदर्दी से कत्ल कर सकता है। लोगों के चेहरे पर अभी तक एक दहशत थी, एक मायूसी थी… लेकिन अब आक्रोश है। नफरत है उस अजीत के लिए, जिसने प्रॉपर्टी के लालच में एक भरा-पूरा परिवार उजाड़ दिया।

पुलिस की अभी तक की तफ्तीश में खुलासा हुआ है कि किसान क्रेडिट कार्ड की बकाया रकम को चुकाने और करोड़ों रुपए की प्रॉपर्टी कब्जाने के लिए परिवार के बेटे अजीत सिंह ने ही अनुराग सिंह का पूरा परिवार मौत के घाट उतार दिया। उसके अंदर दौलत की हवस इस कदर भरी थी कि जन्म देने वाली मां को भी नहीं बख्शा। उसके हाथ उन बच्चों को मारते हुए भी नहीं कांपे, जो उसकी गोद में खेलकर बड़े हुए। अजीत अब पुलिस की गिरफ्त में है और उसकी काली करतूतों की पूरी कुंडली खुलकर सामने आ रही है।

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कर्ज की वो रकम और 6 लोगों का कत्ल

सबसे पहले आपको बताते हैं कि आखिर उसने इस हत्याकांड को अंजाम क्यों दिया? अनुराग और अजीत के पिता विरेंद्र सिंह का कुछ साल पहले ही निधन हो चुका है। बताया जा रहा है कि विरेंद्र सिंह के ऊपर किसान क्रेडिट कार्ड की करीब 35 लाख रुपए की रकम बकाया थी। इस रकम को लेकर अक्सर अजीत कहता था कि पुश्तैनी प्रॉपर्टी का कुछ हिस्सा बेचकर ये कर्ज चुका दिया जाए। 

वहीं, अनुराग और उनकी मां सावित्री इसके पक्ष में नहीं थे। अनुराग का कहना था कि खेती से जो कमाई होती है, उसी के जरिए धीरे-धीरे ये कर्ज उतारा जाएगा। सूत्रों की मानें, तो परिवार की हत्या के पीछे ये कर्ज एक बड़ी वजह बताया जा रहा है।

खेती से हर साल 50 लाख से ज्यादा टर्नओवर

अब बात उस प्रॉपर्टी की, जिसके लिए अजीत अपनों का ही कातिल बन बैठा। पुलिस के मुताबिक, परिवार के पास करीब 100 बीघा खेती की जमीन है। इस जमीन पर खेतीबाड़ी का जिम्मा अनुराग ही संभालता था। उसके पास एग्रीकल्चर से बीएससी की डिग्री थी। खेती में वो मॉर्डन तकनीक का इस्तेमाल करता था। इस बार भी उसने पूरे खेत में तरबूज की फसल उगाई थी। 

बताया जा रहा है कि खेती से हर साल 50 लाख रुपए से ऊपर का टर्नओवर आता था। वहीं, परिवार के पास गांव में घर के पीछे चार बीघे में बना एक निजी तालाब भी था।

गांव में दो मंजिला मकान और कुछ दुकानें

अनुराग और अजीत का परिवार पल्हापुर गांव में ही बने दो मंजिला मकान में रहता था, जिसकी कीमत लाखों में है। रुपए-पैसे की कोई कमी नहीं थी। गांव में बने घर के हर कमरे में एसी लगा हुआ है। इसके अलावा अजीत के पास अपनी गाड़ी थी और अनुराग के पास अपनी। प्रियंका की गाड़ी अलग थी। 

परिवार के पास कुछ दुकानें भी हैं, जिनसे किराया आता था। किसान क्रेडिट कार्ड का कर्ज चुकाने के लिए अक्सर अजीत इन्हीं दुकानों को बेचने की बात करता था। वहीं, अनुराग ने अपने परिवार के लिए लखनऊ के सरगम अपार्टमेंट में एक फ्लैट खरीद रखा था, जिसकी कीमत करीब एक करोड़ रुपए बताई जा रही है।

पुलिस के सामने कैसे टूटा अजीत?

पुलिस के मुताबिक, इस हत्याकांड को अंदाम देने से पहले अजीत सिंह ने अपनी बीवी और बच्चों को अपने ससुराल भेज दिया था। शनिवार को हुए हत्याकांड में घर के अंदर एक अकेला वही जीवित बचा था। उसने अपने बयानों से इस केस को उलझाने की कोशिश भी की। पुलिस ने शुरुआत में उसके बयानों को नजरअंदाज किया, लेकिन जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो उससे पूछताछ की गई। 

थोड़ी सख्ती करने पर अजीत टूट गया और उसने परिवार की हत्या की बात कबूल कर ली। सोमवार को पुलिस ने अजीत के साथ करीब डेढ़ घंटे तक क्राइम सीन को भी दोहराया।

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"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."

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