राजनीति

बगावती तेवर से बीजेपी को नुकसान… हम कह नही रहे हैं, आप खुद पढिए पूरा समीकरण

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दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट

लोकसभा चुनाव 2024 का चुनावी बिगुल बज चुका है। चुनाव लड़ने की मंशा बनाए नेताओं ने अपनी तैयारियों को धार देना भी शुरू कर दिया है। वहीं यूपी की कैसरगंज और पीलीभीत से उम्मीदवार घोषित ना होने के कारण सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। 

दावा किया जा रहा है कि बीजेपी दोनों ही सीटों पर अपने उम्मीदवार बदल सकती है। चेहरा बड़ा होने के चलते दोनों ही बीजेपी सांसद निर्दलीय भी चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। 

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वहीं वरुण गांधी अगर बीजेपी से बगावत करेंगे तो बीजेपी को ना सिर्फ पीलीभीत, सुल्तानपुर में नुकसान होगा बल्कि अमेठी और रायबरेली समेत प्रदेश भर की सीटों पर भी असर पड़ेगा।

बीजेपी की दूसरी लिस्ट पर सबकी नजर

दरअसल यूपी की 80 लोकसभा सीट में से बीजेपी ने 51 सीट पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। 5 सीट बीजेपी अपने सहयोगी दलों को दे सकती है। इस तरह बीजेपी बाकी बची 24 सीट पर बीजेपी को कैंडिडेट घोषित करना है। 

इस लिस्ट में पीलीभीत और कैसरगंज लोकसभा सीट पर भी शामिल है। उधर दिल्ली में बाकी बची सीटों पर उम्मीदवारों के चयन पर दिल्ली बीजेपी मुख्यालय पर लगातार बैठकों का दौर जारी है। 

बैठकों से जो जानकारी निकल कर आ रही है उसके आधार पर सूत्रों का दावा है कि बीजेपी पीलीभीत सीट से उम्मीदवार बदल सकती है। फायरब्रांड नेता वरुण गांधी पीलीभीत सीट से बीजेपी सांसद है। ऐसे में वरुण गांधी का टिकट कटना तय माना जा रहा है। वहीं दावों के अनुसार वरुण गांधी के करीबी लोगों ने पीलीभीत से नामांकन का पर्चा भी खरीद लिया है।

वरुण के बयान ही बन सकते हैं टिकट कटने के कारण

वहीं बीजेपी सांसद वरुण गांधी का टिकट कटने के पीछे वरुण के बयान माने जा रहे हैं। वरुण गांधी ने बीजेपी में रहते हुए किसान, युवाओं के पक्ष में खुलकर अपना पक्ष रखा है। इसके कारण बीजेपी की काफी भद्द भी पिट चुकी है। 

किसान आंदोलन के दौरान वरुण गांधी के ट्वीट लगातार सुर्खिया बंटोर रहे थे। तब से माना जा रहा है कि वरुण गांधी का बीजेपी इस बार टिकट काट सकती है।

वरुण के साथ साथ सुल्तानपुर से सांसद मेनका गांधी के टिकट पर भी तलवार लटक गई है। इसी बीच कयास बाजी का दौर भी शुरू हो गया है। 

दावों की माने तो अगर वरुण गांधी को बीजेपी से टिकट नहीं मिलता है तो वरुण सपा या कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर बीजेपी उम्मीदवार के सामने इंडिया गठबंधन के संयुक्त प्रत्याशी के रूप में ताल ठोक सकते हैं।

अगर वरुण गांधी बीजेपी से बगावत करते हैं तो बीजेपी के 400 और 80 सीट जीतने के लक्ष्य पर साफ असर पड़ेगा। 

बीजेपी 80 जीतने के बजाए 62 सीटें जीतना मुश्किल हो जाएगा। वहीं वरुण गांधी को सपा से टिकट मिलने के ज्यादा चांसेज दिखाई पड़ रहे हैं। इसके पीछे सपा मुखिया अखिलेश यादव का बयान और डिम्पल यादव से मुलाकात मानी जा रही है।

वरुण के सपा के टिकट से चुनाव लड़ने के सवाल पर अखिलेश ने कहा कि इस पर हमारा संगठन निर्णय लेगा। बीते दिनों वरुण और डिम्पल यादव की लोकसभा के भीतर मुलाकात की तस्वीर भी सामने आ चुकी हैं। जानकारी के मुताबिक, सपा नेता राम गोपाल यादव ने भी वरुण गांधी का बीजेपी से टिकट कटने पर विचार करने की बात कही है।

प्रियंका गांधी से हैं वरुण के अच्छे रिश्ते

वहीं वरुण गांधी अगर सपा या कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ते हैं तब इंडिया गठबंधन को गांधी परिवार के गढ़ अमेठी और रायबरेली सीट पर कांग्रेस को मजबूती मिलेगी। 

कांग्रेस अमेठी बचा ले जाए, ऐसा भी संभव हो सकता है। वरुण के साथ आने से सोनिया और मेनका गांधी की नाराजगी की दूरियां भी कम हो सकती है।

दावों के अनुसार वरुण गांधी की राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से बातचीत होती है। प्रियंका से वरुण के अच्छे संबंध हैं। 

सियासत में कुछ भी असंभव नहीं है। राहुल और वरुण के बीच बात बनी तो यूपी में कांग्रेस को एक हिन्दू छवि वाला बड़ा फायरब्रांड नेता वरुण गांधी के रूप में मिल जाएगा। 

वरुण गांधी 2027 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मुख्यमंत्री कैंडिडेट भी हो सकते हैं। वहीं कांग्रेस वरुण या मेनका गांधी को अमेठी या रायबरेली से भी उम्मीदवार बनाया सकती है।

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"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."

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