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‘शिक्षा के पथ पर’ और ‘शब्द कसौटी पर’ सहित दस पुस्तकों का हुआ विमोचन

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दुर्गेश्वर राय की रिपोर्ट

वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षक प्रमोद दीक्षित मलय द्वारा लिखित पुस्तकों शिक्षा के पथ पर और शब्द कसौटी पर सहित पांच साझा संकलनों और तीन अन्य पुस्तकों का विमोचन शैक्षिक संवाद मंच द्वारा गत दिवस चित्रकूट में आयोजित तीन दिवसीय भव्य समारोह में किया गया।

इन पुस्तकों का विमोचन तीन अलग अलग सत्रों में पद्मश्री उमाशंकर पांडेय, वरिष्ठ समाजसेवी गोपाल भाई जी, सुप्रसिद्ध भाषा विज्ञानी कमलेश कमल, संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य बाबूलाल दीक्षित, राज्य हिंदी संस्थान के प्रवक्ता डॉ प्रदीप जायसवाल, डायट आगरा के वरिष्ठ प्रवक्ता मनोज वार्ष्णेय, टीएससीटी के संस्थापक विवेकानंद आर्य, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित आशिया फारूकी(फतेहपुर), ईश्वरी सिन्हा( छत्तीसगढ़) आदि गणमान्य अतिथियों सहित सौ से अधिक लेखकों और शिक्षको के उपस्थिति में किया गया।

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पद्मश्री उमाशंकर पाण्डेय ने प्रमोद दीक्षित की पुस्तक शिक्षा के पथ पर के अनुभव आधारित और शैक्षिक लेखों को शिक्षकों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।

गोपाल भाईजी ने समीक्षाओं पर आधारित प्रमोद दीक्षित की शब्द कसौटी पर पुस्तक को संदर्भित करते हुए कहा कि इसे उभरते लेखकों को अवश्य पढ़ना चाहिए।

डॉ० प्रदीप जायसवाल ने 113 शिक्षको के एक दिन के विद्यालयी अनुभव पर आधारित संकलन विद्यालय में एक दिन को अद्भुत ग्रन्थ बताया। इस पुस्तक के रचनाकारों को शब्द साधक सम्मान से सम्मानित किया गया।

यात्रा वृत्तान्त आधारित पुस्तक ‘यात्री हुए हम’ के 40 लेखकों को पर्यटक परिमल सम्मान से तथा 33 भूले बिसरे क्रांतिकारियों और घटनाओं से सुसज्जित पुस्तक क्रांतिपथ के राही के रचनाकारों को राष्ट्रगौरव सम्मान से सम्मानित किया गया।

कोरोनाकाल के खट्टे मीठे अनुभवों से सुसज्जित काव्य संग्रह कोरोना काल में कविता के द्वितीय संस्करण के कवियों को काव्य कल्पतरु सम्मान से विभूषित किया गया।

कार्यक्रम में कवितापाठ आधारित सत्र के रचनाओं के संग्रह धरा सुने शुभ गीत का भी विमोचन किया गया। रुद्रादित्य प्रकाशन प्रयागराज द्वारा मुद्रित इन सभी संकलनो का संपादन प्रमोद दीक्षित मलय ने किया है।

शैक्षिक संवाद मंच द्वारा 3 और 4 जनवरी 2023 को आयोजित शैक्षिक संगोष्ठी एवं शिक्षक सम्मान कार्यक्रम की दुर्गेश्वर राय द्वारा लिखित रिपोर्ट मंदाकिनी के तट पर के साथ ही रिम्पू सिंह की कलम के आइने में और कुहू बैनर्जी की अपराजिता का भी विमोचन किया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों और प्रतिभागियों ने साहित्य के इस संगम की भूरि- भूरि प्रशंसा की। प्रमोद दीक्षित मलय द्वारा सभी के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

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"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."

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