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सार्वजनिक मंच पर अनुप्रिया पटेल ने जताया क्यों नाराज़ हैं योगी आदित्यनाथ से…

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सर्वेश द्विवेदी की रिपोर्ट 

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अपना दल सोने लाल की राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने 69 हजार शिक्षक भर्ती में हुई गड़बड़ियों के मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को घेरा और कहा कि हम मुद्दे के साथ हैं इस पर सकारात्मक फैसला लेकर रहेंगे।

उन्होंने कहा, “69 हजार शिक्षक भर्ती प्रकरण में आरक्षण संबंधी विसंगतियों को दूर करके पिछड़ों के साथ न्याय होना चाहिए। इसमें कुछ समाधान हुआ था, लेकिन अभी संपूर्ण समाधान होना बाकी है और इस बात को हम निरंतर उत्तर प्रदेश की सरकार के मुखिया के समक्ष भी रख रहे हैं। इसके अलावा, अपने सहयोगी दल की टॉप लीडरशिप के साथ भी बात कर रहे हैं और इस मसले पर हम लगातार आवाज उठाते रहेंगे।”

वह अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में बोल रही थीं, जहां उन्होंने वह दर्द भी साझा किया, जिसे वह लेकर जीने को मजबूर हैं। अनुप्रिया ने अपने ही परिवार पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि उन्होंने डॉक्टर सोने लाल पटेल के रास्ते पर चलने का फैसला लिया, जिसके बाद उन्हें और उनकी बहन को संपत्ति से बेदखल कर दिया गया।

अनुप्रिया पटेल ने कहा कि उनकी पुत्री होने के नाते, पिता के रूप में उन्होंने जो कुछ भी मेरे लिए बनाया, उस संपत्ति से ही मैंने खुद को अलग कर लिया। मेरी छोटी बहन ने भी पिता के रास्ते पर चलने का फैसला लिया और संपत्ति से बेदखल हो गईं।

उन्होंने आगे कहा, “सोने लाल पटेल साहब कहते थे कि जब भी आप समाज में परिवर्तन करने के लिए आगे बढ़ेंगे, तो पहले लोग आपको अपमानित करेंगे। आप नहीं रुकोगे तो आपका उपहास करेंगे, आप फिर भी नहीं रुकोगे और अपने लक्ष्य से नहीं भटकोगे निरंतर आपका कारवां बढ़ता रहेगा तो आपका विरोध शुरू होगा।”

इतना ही नहीं उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को राजनीतिक साजिशों से भी बचने की सलाह दी। अनुप्रिया ने कहा, “जब अपना दल की सफलता सामने आई तो षडयंत्र-साजिशें सबकुछ शुरू हो गया। मेरे लिए सबसे ज्यादा पीड़ा की बात यह रही कि विरोध के स्वर सबसे पहले अपनों के बीच से ही उठने लगे, मेरे मन को बहुत कष्ट हुआ और मैं सालों से इस कष्ट के साथ जी रही हू्ं, लेकिन अपना दल का जो लक्ष्य है और डॉ सोने लाल पटेल जी का जो सपना है, उसको पूरा किए बिना मैं पीछे हटने वाली नहीं। अपने मन में मैंने ये संकल्प लिया कि शेर बाप की बेटी कभी पीछे नहीं हट सकती। अपना दल करोड़ों कार्यकर्ताओं के संघर्ष और तपस्या से बना हुआ है।”

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