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कैसरगंज से बृजभूषण या कोई और… इस राज को कब करेगी पार्टी बेनकाब…सस्पेंस अभी बाकी है

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दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट

लोकसभा चुनाव से पहले देश के सबसे बड़े सूबों में से एक उत्तर प्रदेश की राजनीतिक परिदृश्य एक जटिल शतरंज की बिसात जैसी दिख रही है, जहां पार्टियां अपनी हर चाल फूंक-फूंक कर रख रही हैं।

यूपी में क्लीन स्वीप करने के इरादे से बीजेपी काफी सोच विचार करके उम्मीदवारों का चयन कर रही है। 16 अप्रैल, मंगलवार को भाजपा ने लोकसभा चुनाव के लिए यूपी में दो और प्रत्याशियों के नामों का एलान किया। इसके साथ ही  भाजपा ने यूपी में अभी तक 73 सीटों पर उम्मीदवारों के नामों का एलान कर चुकी है। इसके बाद अब सिर्फ दो सीटें बची हैं जिन पर नामों के ऐलान का इंतजार लंबा हो चला है। 

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कैसरगंज से सस्पेंस 

गौरतलब है कि कैसरगंज के मौजूदा सांसद बृजभूषण शरण सिंह को फिलहाल पार्टी ने टिकट तो नहीं दिया है पर उन्होंने खुद के प्रचार-प्रसार पर कोई कमी नहीं रखी है। 

बृजभूषण शरण सिंह दो बार गोण्डा, एक बार बहराइच और कैसरगंज लोकसभा सीट से लगातार तीन बार के सांसद हैं। वह पहले भी सपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं, जीत चुके हैं। कैसरगंज सीट से अपना पहला चुनाव ही बृजभूषण सपा के टिकट पर जीते थे। सपा और बसपा ने भी कैसरगंज से उम्मीदवार के नाम का ऐलान अभी नहीं किया है। 

राबरेली में भी इंतजार

वहीं रायबरेली सीट की बात करे तो यूपी में कांग्रेस के सबसे मजबूत गढ़ को जीतने के लिए भाजपा फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। रायबरेली में अभी कांग्रेस ने भी अपने प्रत्याशी के नाम का एलान नहीं किया है। ऐसा कहा जा रहा है कि रायबरेली में कांग्रेस उम्मीदवार के एलान के बाद भाजपा प्रत्याशी उतारेगी।

बता दें कि यूपी की कुल 80 लोकसभा सीटों में से 75 सीटें बीजेपी ने अपने पास रखी हैं जबकि पांच सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ रखी हैं। इनमें बिजनौर और बागपत सीट आरएलडी को दी तो मिर्जापुर और रॉबर्टसगंज सीट अपना दल (एस) के लिए छोड़ी है।

वहीं, घोसी सीट पर सुभासपा चुनाव लड़ रही है। बीजेपी अपने कोटे की 75 सीटों में 73 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर चुकी है जबकि दो सीटों पर अभी तक सस्पेंस बना हुआ है। 

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"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."

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