देवरिया

बाबा गोरखपुर विश्वविद्यालय के संस्थापक, पिता आर्मी से रिटायरमेंट के बाद रहे सांसद, अब शशांक मणि पर भाजपा ने खेला दाव

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इरफान अली लारी की रिपोर्ट

देवरिया जिले की सदर सीट पर लंबे समय से चली आ रही माथापच्ची के बाद आखिरकार भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने देवरिया सदर लोकसभा सीट से उम्मीदवार घोषित कर दिया। यूपी भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और निवर्तमान सांसद डॉ रमापति राम त्रिपाठी का टिकट काटकर पार्टी ने इस बार शशांक मणि त्रिपाठी पर भरोसा जताया है।

शशांक मणि लंबे समय से जनसेवा के कार्यालयों में हैं। स्वावलंबी भारत अभियान सेंट्रल टोली के नीति प्रमुख हैं। तीन पुस्तकें मिडिल ऑफ डॉयमंड इंडिया, भारत एक स्वर्णिम यात्रा और भारत काफी प्रतिष्ठित हैं।

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मान्यता बी सेटेक और आईएमडी लुसान से एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद शशांक मणि त्रियाल अपने पिता श्रीप्रकाश मणि त्रियाल और दादा पंडित सुरति नारायण मणि त्रिमूर्ति के आदर्शों पर चल पड़े। पिता लेफ्टिनेंट जनरल श्री प्रकाश मणि त्रिपोली सीट मसाला सदर से 1996 और 1998 में 11वीं और 13वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में दो बार नामधारी हो गए।

देवरिया लोकसभा सीट (Deoria Loksabha Seat) पर भाजपा ने लंबे इंतजार के बाद प्रत्याशी घोषित कर दिया है। पार्टी ने यहां से पूर्व सांसद जनरल श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी के बेटे शशांक मणि त्रिपाठी (Shashank Mani Tripathi) को उम्मीदवार बनाया है। स्वभाव से मिलनसार शशांक मणि त्रिपाठी समाजसेवी है। वर्तमान में वह जागृति यात्रा और जागृति एंटरप्राइज सेंटर-पूर्वांचल (JECP) के संस्थापक हैं। शशांक मणि त्रिपाठी के पिता श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने ही 1996 में देवरिया लोकसभा सीट पर पहली बार कमल खिलाया था। कांग्रेस सपा गठबंधन ने यहां से कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अखिलेश सिंह (Akhilesh Singh) को टिकट दिया। जबकि बसपा ने अभी तक अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है।

बाबा थे IAS, पिता भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल और सांसद

देवरिया जिले के बरपार गांव के मूल निवासी शशांक मणि त्रिपाठी का पारिवारिक बैकग्राउंड काफी मजबूत है। इनके बाबा पंडित सूरत नारायण मणि त्रिपाठी उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस रहे हैं। वह कई जिलों के डीएम, काशी विद्यापीठ वाराणसी के वाइस चांसलर और गोरखपुर विश्वविद्यालय के संस्थापक रहे हैं। वह विधान परिषद के सदस्य भी रहे हैं। शशांक के पिता श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी भारतीय थल सेना में लेफ्टिनेंट जनरल रहे हैं। सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली और 1996 में देवरिया लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर सांसद बने। देवरिया सीट की राजनीति में पहली बार उन्होंने ही भाजपा को जीत दिलाकर कमल खिलाया था।

एक चाचा रहे विधायक, दूसरे चाचा UP पुलिस के DGP

शशांक मणि के परिवार की गिनती प्रदेश के सम्मानित परिवारों में होती है। शशांक मणि त्रिपाठी के चाचा श्रीनिवास मणि त्रिपाठी देवरिया जिले की गौरी बाजार सीट से विधायक रहे हैं। उनकी पहचान तेजतर्रार हिन्दूवादी नेता के रूप में रही है। मणि के तीसरे चाचा श्रीविलास मणि त्रिपाठी आईपीएस अधिकारी रहे हैं। वह उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजीपी भी रह चुके हैं। इनके कई रिश्तेदार भी प्रदेश और केंद्र में अच्छे पदों पर नियुक्त है।

IIT दिल्ली से बीटेक, विदेश से MBA की पढ़ाई किए हैं शशांक

शशांक मणि त्रिपाठी ने अपनी स्कूली शिक्षा लखनऊ के कॉल्विन तालुकदार कॉलेज से पूरी की। बाद में उन्होंने आईआईटी दिल्ली से बी.टेक. की डिग्री हासिल की और आईएमडी लुसेन से एमबीए किया है। वर्तमान में वह जागृति यात्रा और जागृति इंटरप्राइजेज के चेयरमैन है। शशांक मणि की पहचान इलाके में समाजसेवी और मिलनसार नेता की है। इनको टिकट मिलने पर देवरिया जिले के भाजपा समर्थकों में खुशी की लहर है।

कांग्रेस-सपा गठबंधन से अखिलेश सिंह है मैदान में

देवरिया लोकसभा सीट से 2019 में भाजपा ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी को टिकट दिया था। रमापति राम त्रिपाठी चुनाव जीत कर सांसद भी बने। मगर पार्टी ने इस बार उनका टिकट काटकर शशांक मणि त्रिपाठी को मैदान में उतारा है।

कांग्रेस सपा गठबंधन के तहत देवरिया लोकसभा सीट कांग्रेस को मिली है कांग्रेस नेहा से राष्ट्रीय प्रवक्ता अखिलेश सिंह को टिकट दिया है, जबकि बहुजन समाज पार्टी ने अभी तक उम्मीदवार घोषित नहीं किया है।

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"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."

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