बस्तर

गए थे “बहू” मांगने पार्टी ने “दुल्हन” थमा दिया… . और अब जीत गए बाजी, चित्त कर दिया दुश्मन को कवासी लखमा ने

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हरीश चन्द्र गुप्ता की रिपोर्ट

बस्तर में अपने चुनावी भाषण में कांग्रेस बस्तर प्रत्याशी कवासी लखमा ने लोकसभा चुनाव के टिकट की तुलना एक दुल्हन के साथ तुलना की।

उन्होंने कहा कि मैं पार्टी से अपने बेटे के लिए ‘बहू’ मांगने गया था, लेकिन उन्होंने मुझे ही ‘दुल्हन’ पकड़ा दिया। लखमा ने कहा कि मैं चुनाव नहीं लड़ रहा हूं, कांग्रेस पार्टी चुनाव लड़ रही है। मुझे टिकट क्यों मिला? मैंने तो टिकट नहीं मांगा था। मैंने अपने बेटे को ही टिकट देने की जिद की थी।

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कांग्रेस उम्मीदवार कवासी लखमा अपने अंदाज के कारण हमेशा सुर्खियों में रहते हैं। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में कवासी लखमा एक युवक के साथ मुर्गा लड़वाते नजर आ रहे हैं। बड़ी बात ये है कि कवासी लखमा का मुर्गा इस लड़ाई में जीत गया।

लखमा इन दिनों बस्तर में चुनाव प्रचार में जुटे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान ही उन्होंने एक युवक के कहने पर मुर्गा लड़ाई में हिस्सा लिया और विरोधी को चारों खाने चित कर दिया।

कवासी लखमा रविवार को चुनाव प्रचार के लिए पुसपाल गांव पहुंचे थे। इस दौरान यहां उन्होंने मुर्गा लड़ाई में हिस्सा लिया और इस लड़ाई में जीत भी हासिल की। बस्तर लोकसभा सीट में पहले फेज में 19 अप्रैल को वोटिंग होनी है। सभी उम्मीदवारों का तूफानी चुनाव प्रचार चल रहा है। इसी बीच कवासी लखमा मुर्गा की लड़ाई खेल में हिस्सा लिया।

लखमा के मुर्गे ने जीती लड़ाई

बस्तर आदिवासी बाहुल्य इलाका है। यहां मनोरंजन के कई साधन हैं। उनमें से एक है मुर्गा लड़ाई का खेल। बस्तर अंचल में मुर्गा लड़ाई आदिवासियों के मनोरंजन का प्रमुख साधन है। पूर्व मंत्री कवासी लखमा चुनावी प्रचार के बीच खुद मुर्गा लड़ाई कराते दिखाई दिए। बड़ी बात ये है कि उन्होंने जिस मुर्गे पर दांव लगाया था वह मुर्गा जीत गया।

6वीं बार विधायक बने हैं कवासी लखमा

कवासी लखमा कांग्रेस के सीनियर नेता हैं। वह सुकमा जिले की कोंटा विधानसभा सीट से लगातार छठवीं बार विधानसभा का चुनाव जीते हैं। भूपेश बघेल कैबिनेट में कवासी लखमा आबकारी विभाग के मंत्री भी थे। कवासी लखमा अक्सर अपने बयानों और अंदाजों के कारण सुर्खियों में रहते हैं। कवासी लखमा बस्तर के कई इलाकों में पैदल घूम-घूमकर अपना चुनाव प्रचार कर रहे हैं।

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"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."

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