उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘सड़कों पर नमाज’ और वक्फ बोर्ड संबंधी टिप्पणी पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप से राज्य की राजनीति गरमा गई है। पढ़ें पूरी खबर!
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा ‘सड़कों पर नमाज’ और वक्फ बोर्ड से संबंधित दिए गए बयान पर राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। विपक्षी दलों ने उनकी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एजेंडे पर काम कर रही है और मतदाताओं के बीच अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है। वहीं, भाजपा नेताओं ने आदित्यनाथ के विचारों का समर्थन करते हुए विपक्षी दलों पर समाज को ध्रुवीकृत करने का आरोप लगाया।
योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी और उसका बचाव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि सड़कें यातायात के लिए होती हैं, न कि धार्मिक अनुष्ठानों के लिए। उन्होंने हिंदुओं के अनुशासन की मिसाल देते हुए कहा कि महाकुंभ में बिना किसी अप्रिय घटना के करोड़ों लोगों ने भाग लिया। साथ ही, उन्होंने वक्फ बोर्ड को ‘लूट-खसोट का अड्डा’ करार देते हुए कहा कि यह मुसलमानों के कल्याण के लिए बहुत कम काम करता है।
अखिलेश यादव का हमला
समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि इस प्रकार की टिप्पणियां केवल उनकी ‘विफलताओं’ को छिपाने के लिए हैं। उन्होंने कहा, “भाजपा महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की आय को लेकर किए गए वादों पर चर्चा नहीं करना चाहती। इसलिए वह इस प्रकार के मुद्दे उछाल रही है।” यादव ने वक्फ (संशोधन) विधेयक पर भी भाजपा को घेरा और कहा कि भाजपा वक्फ बोर्ड को पूरी तरह अपने नियंत्रण में लेना चाहती है।
ओवैसी और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल उठाया कि जब सड़कों पर कांवड़ यात्रा, आरएसएस परेड और अन्य धार्मिक उत्सव हो सकते हैं, तो मुसलमानों को सड़कों पर नमाज पढ़ने से क्यों रोका जा रहा है? उन्होंने कहा, “क्या आपको केवल इस्लाम से समस्या है?”
वहीं, शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद अरविंद सावंत ने भी योगी के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि नमाज में महज 15 मिनट लगते हैं, यदि मस्जिदों में जगह नहीं है, तो लोग कहां नमाज पढ़ें?
भाजपा का बचाव
केंद्रीय मंत्री एस पी सिंह बघेल और भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने योगी आदित्यनाथ के विचारों का समर्थन किया। नकवी ने कहा, “नमाज के लिए मस्जिद, ईदगाह या घर उचित स्थान हैं। सड़कों पर नमाज पढ़ने से अनावश्यक तनाव पैदा होता है।” बघेल ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उछाल रहे हैं।
कांग्रेस और अन्य दलों की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आदित्यनाथ की टिप्पणी को भेदभावपूर्ण बताया और कहा कि उन्हें अन्य धार्मिक जुलूसों को भी अनुशासित करना चाहिए। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने उत्तर प्रदेश में तमिल भाषा की पढ़ाई को लेकर योगी सरकार से आंकड़े मांगे। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) नेता संदीप देशपांडे ने भी धार्मिक प्रथाओं को निजी स्थानों तक सीमित रखने की सलाह दी।
योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर उबाल ला दिया है। विपक्ष ने इसे भाजपा की चुनावी रणनीति करार दिया, जबकि भाजपा ने इसे अनुशासन का मामला बताया। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना रहेगा।
➡️अंजनी कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट

Author: samachardarpan24
जिद है दुनिया जीतने की