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प्यार, यकीन और “श्रद्धा” पर “आफताब” की काली रौशनी कब तक ?

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मोहन द्विवेदी 

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उसे क्या मालूम था कि जिस प्रेमी के लिए वह अपने मां-बाप को छोडक़र उसके साथ पिछले तीन साल से रह रही है, वही एक दिन उसकी निर्मम हत्या करके उसके परिजनों को उम्र भर आंसू बहाने के लिए छोड़ देगा। मुंबई के मलाड गांव की श्रद्धा (28) नामक मृतक लडक़ी के प्रेमी आफताब के लिए आफत उस समय बन गई जब वह मृतक लडक़ी के शव के 35 टुकड़े करके रोजाना छत्रपुर जंगल में जाकर फैंकने लगा। सच कहें तो इस वारदात से इंसानियत तार-तार होकर रह गई। कातिल आफताब ने अपनी प्रेमिका श्रद्धा की जिस तरह निर्मम हत्या करके उसके शव की बेकद्री की, ऐसा कोई जानवर भी नहीं कर सकता है। राजधानी दिल्ली में घटित हुई इस दुखद घटना की वजह से पूरा देश सदमे में है। आरोपी युवक को तुरंत फांसी पर लटकाए जाने की मांग उठ रही है जिसने समाज की आपसी एकता को तोडऩे की कोशिश की है। श्रद्धा और आफताब की दोस्ती सोशल मीडिया से शुरू होकर लिव इन रिलेशनशिप में बदल गई। वे दोनों मुंबई में एक मल्टी नेशनल कंपनी काल सेंटर में काम करते थे। श्रद्धा आफताब को अपना जीवन साथी बनाने के सपने संजो चुकी थी, मगर आफताब के मतलबीपन को भांप नहीं पाई थी। वह उससे शादी किए जाने की मांग पर अड़ी रही। लडक़ी के परिजनों को उनका यह रिश्ता कतई पसंद नहीं था। नासमझ लडक़ी श्रद्धा ने अपने प्रेमी आफताब की वजह से अपने परिजनों से किनारा कर लिया था।

पहले वे दोनों मुंबई में कार्यरत रहे और फिर दिल्ली में शिफ्ट हो चुके थे। आफताब अपनी प्रेमिका श्रद्धा से पीछा छुड़ाने के लिए हर दिन योजनाएं भी बना रहा था, मगर वह सफल नहीं हो पाया। उक्त प्रेमी जोड़ा हिमाचल प्रदेश की वादियों में भी घूमकर वापस गया। वासना का भूखा भेडिय़ा आफताब मानों अपनी प्रेमिका श्रद्धा से ऊब चुका था और उसने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। आफताब ने श्रद्धा की निर्मम हत्या मई महीने के मध्य में की। मृतक लडक़ी के पिता ने बेटी की गुमशुदगी की पुलिस रिपोर्ट मुंबई में सितंबर महीने में दर्ज करवाई थी। बात अगर हत्या तक सीमित रहती तो बात कोई अलग थी। आफताब ने पुलिस से बचने के लिए श्रद्धा के शव के 35 टुकड़े किए थे। शव के उक्त टुकड़े उसने एक फ्रिज के अंदर रखे ताकि किसी को भनक न लग सके। मीडिया सुर्खियों के अनुसार कातिल आफताब रोजाना देर रात को दिल्ली के महरौली जंगल में श्रद्धा के शव के दो टुकड़ों को फैंक कर आता था। मानवता के दुश्मन आफताब ने सोचा था कि उसके द्वारा ऐसा किए जाने पर किसी को उसके इस जघन्य अपराध की भनक नहीं लगेगी। वह उसी कमरे में अपना जीवनयापन करता रहा जहां फ्रिज में श्रद्धा की लाश के टुकड़े रखे हुए थे। अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के शिकंजे से नहीं बच सकता है। आफताब के साथ भी ठीक वैसे ही हुआ। पुलिस ने छह महीने बाद इस हत्याकांड के आरोपी को दबोचा है। मृतक लडक़ी श्रद्धा आफताब के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहने के बावजूद अपने मां-बाप के संपर्क में नहीं थी। मगर अपने एक दोस्त को सोशल मीडिया के जरिए वह अपनी आपबीती सुना चुकी थी। श्रद्धा का दोस्त भी उसे आफताब से समय रहते शादी किए जाने की सलाह देता था।

श्रद्धा हत्याकांड की गुत्थी उस समय सार्वजनिक हुई जब उसके दोस्त को सोशल मीडिया पर काफी दिनों से कोई जवाब नहीं मिला। श्रद्धा द्वारा सोशल मीडिया में अक्सर अपनी फोटो पोस्ट किए जाने से उसके परिजनों के दिल को एक तसल्ली रहती थी।काफी महीनों से श्रद्धा का सोशल मीडिया से नदारद रहने पर उसके परिजनों को शक हुआ। वहीं इस बीच श्रद्धा के दोस्त ने उसके परिजनों को पूरी कहानी बताई तो मामला पुलिस को सौंपा गया। दिल्ली पुलिस ने जब आफताब से कड़ी पूछताछ की तो उसने अपना गुनाह कबूल किया। अपने परिजनों की खुशियां तार-तार करने वाली लडक़ी ने अपने प्रेमी को अपना जीवन साथी चुनकर भी आखिर धोखा खाया। कातिल आफताब किस तरह का हैवान हो सकता है, गौर करने वाली बात है। अगर वह श्रद्धा से शादी करने का इच्छुक नहीं था तो फिर लिव इन रिलेशनशिप में क्यों रहता रहा? हत्या के बाद शव की बेकद्री किए जाने से उसके संस्कारों का पता चलता है। हमारी कानून व्यवस्था इतनी लचर है कि आरोपियों को कड़ी सजा बहुत कम मिलती है। ऐसे जघन्य अपराधों के केस लंबे ट्रायल पर चलते हैं और पीडि़तों को समय पर न्याय नहीं मिल पाता है। यही वजह है कि आफताब जैसे खूंखार अपराधी कानून के शिकंजे से बच जाते हैं। हमारे समाज में आफताब बनकर घूम रहे अपराधियों की अब जनता को स्वयं तलाश करनी होगी।

श्रद्धा निर्मम हत्याकांड की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए उसके आरोपी को तत्काल फांसी की सजा होनी चाहिए। सोशल मीडिया में लड़कियों द्वारा फोटो वायरल किए जाने से समाज के भेडि़ए किस तरह उन्हें नोचने का जाल बुन सकते हैं, यह हत्याकांड उसका प्रमाण है। सोशल मीडिया दिनोंदिन अपनी साख खराब करता जा रहा है। अक्सर युवा पीढ़ी इसका दुरुपयोग करते हुए अपने पथ से भटक जाती है।

युवाओं ने अनजान लड़कियों की फोटो आईडी में लगाकर मित्रता का निमंत्रण दिए जाने का दौर चला रखा है। फर्जी आईडी के जरिए शातिर लोग कई अन्य नासमझ लोगों को चपत लगा चुके हैं। लडक़ा होकर लडक़ी की आईडी बनाकर घंटों लोगों से चैट किए जाने का मनचलों का शौक बनता जा रहा है।

इंसान अक्सर जो देखता है, उसका अनुसरण भी जरूर करता है। आफताब क्राइम मूवी और वेब सीरीज देखने का शौकीन था। इसी वजह से उसने श्रद्धा की निर्मम हत्या करके उसके शव के टुकड़े जंगल में फैंककर क्राइम फिल्मों के सीन की तरह इस अपराध को अंजाम दिया है। अग्नि के फेरे लिए बिना लिव इन रिलेशनशिप में रहने की इजाजत हमारा समाज कतई नहीं देता है। आजकल इसका ट्रेंड बहुत चल पड़ा है जिस पर अंकुश लगाना जरूरी है। अन्यथा श्रद्धा हत्याकांड जैसी घटनाएं समाज को कलंकित करती ही रहेंगी। युवा लडक़े-लड़कियां अपने पैरों पर खड़े होने के लिए बड़े शहरों की तरफ रुख करते हैं। निजी कंपनियों में वेतनमान नाकाफी होने की वजह से वे लिव इन रिलेशनशिप में रहने को मजबूर हो जाते हैं। लिव इन रिलेशनशिप में रहते हुए वे अपनी सभी मर्यादाएं भी भूल जाते हैं और तदोपरांत ऐसी आपराधिक घटनाएं घटित हो रही हैं। विदेशों में कांट्रेक्ट मैरिज के जरिए इस तरह रहने की इजाजत दी जाती है।

रोजगार पाने के लिए लडक़ा-लडक़ी नाममात्र की शादी करके विदेश को चले जाते हैं। वहां बिना शादी पति-पत्नी की तरह रहना उनकी मजबूरी बन जाती है। कुछेक लिव इन रिलेशनशिप शादी में भी तब्दील हो जाती हैं। इसकी कड़वी सच्चाई सामने आई है, तो इस पर रोक लगे।

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