अपराध

कितनी और कितने की बंदूक? मुख्तार के बेटे अब्बास अंसारी की ये बातें जानते हैं आप? 

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दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट

यूपी की कासगंज जेल में बंद अब्बास अंसारी को सुप्रीम कोर्ट से अपने पिता मुख्तार अंसारी के ‘फातिहा’ में शामिल होने की इजाजत मिल गई है। मुख्तार अंसारी के लिए ‘फातिहा’ पढ़ा गया। 

बीते 28 मार्च को बांदा जेल में कार्डियक अरेस्ट की वजह से मुख्तार अंसारी की मौत हुई थी। उस वक्त अब्बास अंसारी अपने पिता के जनाजे में शामिल नहीं हो पाए थे। हालांकि, यूपी सरकार ने कोर्ट में कहा कि अब्बास अंसारी एक हिस्ट्रीशीटर हैं और उनके खिलाफ संगीन मामलों में 11 से ज्यादा केस चल रहे हैं। सरकारी वकील ने ये भी दलील दी, कि अब्बास के बाहर आने से गवाहों को धमकी देने या कानून-व्यवस्था की दूसरी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। 

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अब्बास अंसारी फिलहाल आर्म्स एक्ट के मामले में कासगंज जेल में बंद हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि अब्बास अंसारी के नाम पर कितने गन लाइसेंस हैं।

अब्बास अंसारी 2022 के विधानसभा चुनाव में यूपी की मऊ सीट से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बने थे। 

चुनाव आयोग को दिए हलफनामे के मुताबिक, अब्बास के पास बंदूकों के दो लाइसेंस है। इनमें से एक है – डबल बैरल ब्रीच लोडेड यानी दोनाली बंदूक। ये वो बंदूक है, जिसमें पीछे से कारतूस डाले जाते हैं। अब्बास के पास दूसरा लाइसेंस है- रिवॉल्वर का। इन दोनों बंदूकों की कीमत अब्बास ने 43 लाख रुपए से ज्यादा बताई थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, अब्बास अंसारी को 9 अप्रैल की शाम को ही कासगंज जेल से गाजीपुर जेल में अस्थाई तौर पर शिफ्ट कर दिया गया। इसके बाद 10 अप्रैल को कड़ी सुरक्षा के बीच अब्बास को गाजीपुर में अपने पिता की कब्र पर फातिहा पढ़ने के लिए ले जाया जाएगा। 

सुरक्षा इंतजामों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के डीजीपी को भी निर्देश जारी कर दिए हैं। गाजीपुर जेल और घर के बीच की दूरी को ध्यान में रखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है। अपने पिता मुख्तार के लिए फातिहा पढ़ने के बाद 11 और 12 अप्रैल को भी अब्बास अंसारी गाजीपुर जेल में ही रहेंगे, जहां परिवार के लोग उनसे मिल सकते हैं। 13 अप्रैल को अब्बास को वापस कासगंज जेल में शिफ्ट कर दिया जाएगा।

आपको बता दें कि अब्बास अंसारी के दिल्ली स्थित घर से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए थे। इसी मामले में अब्बास कासगंज जेल में बंद हैं। उन्होंने पिछले साल नवंबर के महीने में इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत याचिका दी थी। लेकिन, कोर्ट ने जमानत देने से इंकार कर दिया था। 

हाईकोर्ट ने कहा था कि जमानत मिलने से गवाहों को खतरा और सबूतों से छेड़छाड़ किए जाने की आशंका है। इसके अलावा भी अब्बास के ऊपर धोखाधड़ी, जालसाजी सहित कई मामलों में मुकदमे दर्ज हैं।

सुप्रीम कोर्ट से जहां अब्बास अंसारी को अपने पिता के लिए फातिहा पढ़ने की इजाजत मिली है, वहीं मुख्तार अंसारी की पत्नी अफशां अंसारी अभी तक फरार है। यूपी पुलिस ने अफशां के ऊपर 75 हजार रुपए का इनाम रखा हुआ है। 

अफशां मुख्तार अंसारी को आखिरी बार देखने भी नहीं आई थी। पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी है, लेकिन अभी तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है। हाल ही में मुख्तार अंसारी के बड़े भाई अफजाल ने अपील करते हुए कहा कि अफशां को सरेंडर कर कानूनी तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए।

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"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."

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