अजब-गजबइतिहास

“बीयर” की आई “बाढ़” में 8 की डूबकर मौत ; 15 फीट ऊंची लहरें थीं इस “बीयर बाढ़” की

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टिक्कू आपचे की रिपोर्ट 

17 अक्टूबर 1814 की शाम 6 बजे लंदन के ‘टोटेनहम कोर्ट रोड’ के पास अपने घर के बाहर ‘हन्ना बामफील्ड’ अपनी मां के साथ बैठी हुई थी। तभी वहां तेज आवाज के साथ बीयर की 15 फीट ऊंची लहर के साथ बाढ़ आ जाती है। ये लहर ‘हन्ना बामफील्ड’ और उसकी मां को अपने साथ बहाकर ले जाती है। इस बाढ़ में हन्ना और उसकी मां की तरह ही 6 और लोगों की मौत होती है।

दुनिया में कई किस्म की बीयर हैं, इनमें एक पोर्टर बीयर है। इस बीयर की शुरुआत 1700 में लंदन में हुई थी। इस बीयर को बनाने वाली कंपनी का नाम ‘हॉर्स शो ब्रियूअरी’ था। यह कंपनी सिर्फ बीयर ही नहीं बनाती थी बल्कि इसने बीयर स्टॉक रखने के लिए बड़ी सी भट्टी भी बनाई थी।

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‘ए हिस्ट्री ऑफ बीयर एंड ब्रिविंग’ में लेखक इयान एस. हॉर्नसे लिखते हैं कि 1763 में 1500 बैरल क्षमता का टैंक पहली बार इस कंपनी की भट्टी में लगाया गया था, लेकिन जल्द ही इसकी क्षमता को बढ़ाया गया।

लंदन में इस वक्त लोग चाव से बीयर पी रहे थे और यह कंपनी तेजी से विकास कर रही थी। ‘हॉर्स शो ब्रियूअरी’ कंपनी शुरू होने के करीब 111 साल बाद 1811 में एक लाख बैरल से ज्यादा सालाना बीयर प्रोडक्शन करने लगी। इस तरह अब ‘हॉर्स शो ब्रियूअरी’ लंदन की छठी सबसे बड़ी ब्रियूअरी बन गई थी।

पूरे ब्रिटेन में फेमस थी ‘हॉर्स शो ब्रियूअरी’ बीयर भट्टी

लंदन में सेंट गिल्स नाम का एक जिला है। यहीं टोटेनहैम कोर्ट रोड के किनारे ‘ग्रेट रसल स्ट्रीट’ नाम की जगह पर ‘हॉर्स शो ब्रियूअरी’ कंपनी ने शराब की भट्टी बनाई थी। सिर्फ आसपास के इलाके ही नहीं बल्कि पूरे ब्रिटेन में बीयर की यह भट्टी काफी फेमस थी।

यहां शराब रखने के लिए 22 फीट ऊंचे लकड़ी के कई टैंक बनाए गए थे। घटना के समय करीब 3500 बैरल बीयर इन टैकों में स्टॉक होती थीं। इन टैकों को विशालकाय लोहे के ढक्कन से ढंका गया था। इस ढक्कन को बनाने में 81 मीट्रिक टन लोहे का इस्तेमाल किया गया था।

17 अक्टूबर 1814 की दोपहर को हर दिन के तरह ही ब्रियूअरी में क्लर्क अपने काम में लगा था। तभी उसकी नजर उस टैंक पर गई जिसमें 32 टन फरमेंटिंग पोर्टर बीयर रखी हुई थी। उसने देखा कि इस टैंक को जिस 320 किलोग्राम लोहे के ढक्कन से बंद किया गया है, वह अपनी जगह से खिसक गया है।

क्लर्क ने इस बात की जानकारी तुरंत सुपरवाइजर को दी। सुपरवाइजर ने क्लर्क की बात को गंभीरता से नहीं लिया और कहा कि इसे जल्द रिपेयर कर लिया जाएगा। लेकिन, अभी एक घंटा भी नहीं हुआ था कि 22 फीट ऊंचा ढक्कन हट गया। इसके बाद बीयर की तेज धार ने दूसरे टैंक को भी तबाह कर दिया। नतीजा ये हुआ कि सड़क पर बीयर की सुनामी आ गई।

भट्टी के दीवार से लगी ‘सेंट जाइल्स’ झुग्गी बस्ती में आई तबाही

न्यू स्ट्रीट पर बनी इस बीयर की भट्टी के पीछे एक जाइल्स झुग्गी बस्ती थी। यह बस्ती लंदन के गरीब लोगों का ठिकाना था। यह बस्ती पूरे लंदन में क्राइम के लिए बदनाम थी। जब बीयर की भट्टी की पिछली दीवार ढही तो ‘सेंट जाइल्स’ झुग्गी बस्ती में बीयर की बाढ़ आ गई।

इस दौरान दीवार ढहने की वजह से मलबे में दबकर 14 साल की एलेनोर कूपर की मौत हो गई। वहीं, सारा बेट्स नाम के एक बच्चे का शव भी मलबे के ढेर में मिला था। इस तरह इस घटना में कुल 8 लोगों की मौत हो गई थी।

उस रोज सड़क पर बही थी 6 लाख लीटर से ज्यादा बीयर

उस रोज जब झुग्गी बस्ती में बीयर की बाढ़ आई तो इसके थमने पर पता चला कि 6 लाख लीटर से ज्यादा बीयर सड़क पर बही थी। रिपोर्ट सामने आने के बाद पता चला कि ये बाढ़ अगर 1 या 2 घंटे बाद आती तो शाम को काम से घर लौटने वाले और भी लोग इसकी चपेट में आते। इस घटना के अगले दिन मलबा साफ करने का काम शुरू हुआ तो कई लोगों को कचरे से जिंदा बाहर निकाला गया था।

इस घटना को कोर्ट ने बताया था ‘ऐक्ट ऑफ गॉड’

कुछ दिनों बाद ‘हॉर्स शो ब्रियूअरी’ बीयर बाढ़ का ये मामला कोर्ट पहुंचा। इसके बाद कोर्ट ने इस मामले में किसी को दोषी मानने से इनकार कर दिया। इस घटना को ज्यूडिशियल ऑफिसर ने दुर्भाग्यपूर्ण घटना बता दिया। इसके साथ ही उन्होंने इसे ‘ऐक्ट ऑफ गॉड’ भी बता दिया। घटना के बाद कोर्ट ने कंपनी मालिक को मुआवजा देने के लिए मजबूर नहीं किया बल्कि नुकसान की भरपाई के लिए ‘हॉर्स शो ब्रियूअरी’ पर लगाए गए टैक्स को भी हटा लिया। इसके अलावा उस वक्त कंपनी को 7,250 पाउंड मुआवजा भी दिया गया था।

घटना के 100 साल बाद बंद हो गई ये बीयर भट्टी

‘हॉर्स शो ब्रियूअरी’ ने इस घटना के बाद एक बार फिर से बीयर बनाना और स्टॉक करना शुरू कर दिया था। हालांकि, घटना के बाद अब टैंक को बंद करने के लिए लकड़ी या लोहे के ढक्कन की जगह कंक्रीट की मजबूत ढक्कन ने ले ली थी। करीब 100 साल तक प्रोडक्शन करने के बाद 1921 में ये भट्टी बंद हो गई। इसकी जगह पर डोमिनियन थिएटर खोला गया। जिंदगी आगे बढ़ी और धीरे-धीरे लोग उस दर्दनाक घटना को भूल गए। इस घटना की याद में भले ही दुनियाभर में कहीं कोई मेमोरियल नहीं बनाया गया हो लेकिन एक पब हर साल इसकी याद में एक एनिवर्सरी कार्यक्रम आयोजित करता है। इस पब का नाम- ‘द होलबोर्न विपेट’ है।

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"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."

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