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छेडखानी के आरोप में जेल से बाहर निकले और बाबा गिरि में लग गए… कम फिल्मी नहीं है बाबा नारायण साकार हरि की ये 👇 कहानी

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सर्वेश द्विवेदी की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सिकन्द्राराऊ इलाके के पुलराई गाँव में आयोजित एक सत्संग में मची भगदड़ से अब तक 122 लोगों की मौत हो चुकी है। यह हादसा नारायण साकार हरि नामक कथावाचक के सत्संग के दौरान हुआ, जिनके पोस्टर हाथरस की सड़कों पर लगे हुए थे। लोग इस कथावाचक को भोले बाबा और विश्व हरि के नाम से भी जानते हैं।

मानव मंगल मिलन

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यह आयोजन हर साल जुलाई महीने के पहले मंगलवार को होता है और इसे “मानव मंगल मिलन” कहा जाता है। इस बार इस आयोजन के आयोजक मानव मंगल मिलन सद्भावना समागम समिति थे। इस समिति के छह आयोजकों के नाम हैं, लेकिन हादसे के बाद से उनके मोबाइल बंद हैं और स्थानीय पुलिस का उनसे संपर्क नहीं हो पाया है।

मामला दर्ज

घटना के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है और आयोजकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस और प्रशासन द्वारा इस मामले की जांच की जा रही है, और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। इस भगदड़ में मारे गए और घायल लोगों के परिवारों को उचित सहायता प्रदान करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

घटना के विवरण के अनुसार, नारायण साकार हरि के प्रवचन के कार्यक्रम का जिक्र है। यह सत्संग आयोजित करने वाले बाबा की असली कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।

कौन है सूरजपाल जाटव? 

नारायण साकार हरि, जिनका असली नाम सूरजपाल जाटव है, पहले एक पुलिस कॉन्स्टेबल थे। उन्होंने पुलिस की नौकरी छोड़कर अध्यात्म का रास्ता अपनाया और देखते-देखते लाखों भक्त बना लिए। आइए जानते हैं कि भोले बाबा नारायण साकार हरि उर्फ़ सूरजपाल जाटव कौन हैं।

नारायण साकार हरि एटा जिले से अलग हुए कासगंज जिले के पटियाली के बहादुरपुर गाँव के निवासी हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस की नौकरी के शुरुआती दिनों में वे स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) में तैनात रहे। 

लगभग 28 साल पहले एक छेड़खानी के मामले में अभियुक्त होने के कारण उन्हें निलंबन की सजा मिली और बाद में पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इस घटना से पहले सूरजपाल जाटव ने करीब 18 पुलिस थानों और स्थानीय अभिसूचना इकाई में अपनी सेवाएं दी थीं।

काफी दिनों जेल में रहे और रिहाई के बाद बाबागिरी करने लगे

इटावा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार बताते हैं कि छेड़खानी वाले मामले में सूरजपाल एटा जेल में काफी लंबे समय तक कैद रहे। जेल से रिहाई के बाद ही सूरजपाल बाबा की शक्ल में लोगों के सामने आए और अध्यात्म के मार्ग पर चल पड़े। धीरे-धीरे उन्होंने नारायण साकार हरि के नाम से ख्याति प्राप्त की और भक्तों की बड़ी संख्या उनके अनुयायी बन गई।

सूरजपाल जाटव, जिन्हें लोग अब नारायण साकार हरि या भोले बाबा के नाम से जानते हैं, की कहानी बेहद दिलचस्प और परिवर्तनशील है। पुलिस सेवा से बर्खास्त होने के बाद, सूरजपाल अदालत की शरण में गए और उनकी नौकरी बहाल हो गई। हालांकि, 2002 में आगरा जिले से उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले लिया।

ईश्वर से सीधे संवाद का दावा किया

पुलिस सेवा से मुक्ति के बाद, सूरजपाल जाटव अपने गाँव नगला बहादुरपुर पहुँचे। वहां कुछ दिन बिताने के बाद, उन्होंने दावा किया कि उन्हें ईश्वर से संवाद होने लगा है और उन्होंने खुद को भोले बाबा के रूप में स्थापित करना शुरू किया। धीरे-धीरे, उनके भक्तों की संख्या बढ़ने लगी और उनके बड़े-बड़े आयोजन होने लगे, जिनमें हजारों लोग शरीक होते थे।

इटावा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार के अनुसार, 75 साल के सूरजपाल उर्फ़ भोले बाबा तीन भाइयों में सबसे बड़े हैं। उनके दूसरे भाई भगवान दास की मृत्यु हो चुकी है, जबकि तीसरे भाई राकेश कुमार पूर्व में ग्राम प्रधान भी रह चुके हैं।

संपत्ति का लगा दिया अंबार

हालांकि अब बाबा का अपने गाँव में आना-जाना कम हो गया है, लेकिन बहादुरपुर गांव में उनका चैरिटेबल ट्रस्ट अभी भी सक्रिय है। इस ट्रस्ट के माध्यम से वे अपने धार्मिक और सामाजिक कार्य जारी रखते हैं।

अपने सत्संगों में, नारायण साकार हरि ने कई बार यह दावा किया है कि उन्हें यह नहीं पता कि सरकारी सेवा से यहां तक किसने और कैसे खींचकर लाया। उनके अनुयायी उन्हें कई नामों से बुलाते हैं और उनके प्रति उनकी भक्ति अटूट है। इस प्रकार, एक पूर्व पुलिस कॉन्स्टेबल से अध्यात्मिक गुरु बनने तक की उनकी यात्रा अत्यंत रोचक है।

बिना दान दक्षिणा इतने आश्रम बनाए कैसे? 

नारायण साकार हरि, जिन्हें भक्त भोले बाबा के नाम से भी जानते हैं, की खासियत यह है कि वे अपने भक्तों से कोई दान, दक्षिणा या चढ़ावा नहीं लेते हैं। इसके बावजूद उनके कई आश्रम स्थापित हो चुके हैं और उत्तर प्रदेश के कई स्थानों पर उनके स्वामित्व वाली जमीन पर आश्रम होने का दावा भी किया जाता है।

नारायण साकार हरि अपने सत्संगों में भक्तों की सेवा एक सेवादार के रूप में करते नजर आते हैं। यह भी संभव है कि वे ऐसा अपने भक्तों में लोकप्रिय होने के लिए सोच-समझकर करते हों। वे हमेशा सफेद कपड़ों में दिखते हैं, चाहे वह पायजामा-कुर्ता हो, पैंट-शर्ट या सूट।

प्रचार के इनके अपने तरीके

इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता बहुत अधिक नहीं है। उनके फेसबुक पेज आदि पर बहुत ज्यादा लाइक्स नहीं हैं, लेकिन जमीन पर उनके भक्तों की संख्या लाखों में है। उनके हर सत्संग में हजारों भक्तों की भीड़ उमड़ती है।

ऐसे आयोजनों में सैकड़ों स्वयंसेवक और स्वयंसेविकाएं सेवा का काम संभालती हैं। पानी, भोजन से लेकर ट्रैफिक की व्यवस्था तक की जिम्मेदारी भक्तों की समिति द्वारा संभाली जाती है।

यूपी पुलिस सेवा से क्षेत्राधिकारी के रूप में सेवा मुक्त हो चुके रामनाथ सिंह यादव बताते हैं, “भोले बाबा का आज से तीन साल पहले इटावा के नुमाइश मैदान में भी एक माह तक सत्संग समागम का आयोजन हुआ था, जिसमें अफरातफरी का माहौल देखने को मिला था। आयोजन के आसपास वाली कॉलोनी के लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों से भविष्य में बाबा के कार्यक्रम की अनुमति न देने की भी गुहार लगाई थी।”

नेताओं की भी आवाजाही रही है बाबा के आश्रम में

नारायण साकार के भक्तों में समाजवादी पार्टी के नेता अनवर सिंह जाटव भी शामिल हैं। अनवर सिंह जाटव बताते हैं कि बाबा अपने सत्संग में लोगों के बीच मानवता का संदेश देते हैं। वे लोगों को प्रेम और एकजुटता से रहने की अपील करते हैं। अनवर सिंह जाटव के मुताबिक, नारायण साकार हरि अपने सत्संगों में मोबाइल के प्रचलन की आलोचना भी करते हैं।

सत्संग के आयोजन के लिए, जहाँ-जहाँ प्रवचन होता है, वहां एक समिति का गठन किया जाता है। समिति के सभी सदस्यों को जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं। सत्संग को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए समिति के सदस्य आपस में चंदा इकट्ठा करते हैं और कार्यक्रम आयोजित कराते हैं।

इटावा में मानव मंगल मिलन सेवा समिति के बैनर तले सत्संग का आयोजन हुआ था।

समिति अध्यक्ष राजकिशोर यादव बताते हैं, “जब कभी भी बाबा का कोई सत्संग कार्यक्रम होता है तो हमें इसकी सूचना दे दी जाती है, जिसके आधार पर समिति के माध्यम से संपूर्ण व्यवस्था की जाती है।”

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"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."

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