लखनऊ

6 साल से कम उम्र के बच्चों का दाखिला…चौंकिए मत… बीएसए के आदेश ने मचा रखा है तहलका

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चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट

लखनऊ: कक्षा एक में छह साल से कम उम्र के बच्चों का दाखिला नहीं किया जाना है। इस बाबत केंद्र सरकार और राज्य सरकार की ओर से लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद प्रदेश के कुछ जिलों में बीएसए ने 6 साल से कम उम्र के बच्चों का दाखिला लेने के आदेश जारी कर दिए हैं। स्कूलों में दाखिले ले भी लिए गए हैं। 

अब शिक्षक और छात्र परेशान हैं कि जिनके दाखिले हो गए, उनका क्या होगा। पहले राइट टु एजुकेशन (आरटीई) में यही नियम था कि छह साल से कम उम्र के बच्चों का दाखिला नहीं किया जाएगा। अब नई शिक्षा नीति में एक बार फिर से इसे सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

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स्कूलों में दाखिले को लेकर लगातार जारी हो रहे आदेशों ने अभिभावकों को कंफ्यूज कर दिया है। पिछले साल भी केंद्र सरकार ने इस तरह के आदेश जारी किए थे। तब यह कहते हुए प्रदेश में छूट दे दी गई थी कि बच्चों का दाखिला हो चुका है। ऐसे में अगले साल से इसे सख्ती से लागू किया जाए। 

इस साल तो केंद्र सरकार ने फरवरी में ही इस बाबत आदेश जारी करके सभी राज्यों को सचेत कर दिया था कि छह साल से कम के बच्चों के दाखिले कक्षा एक में न किए जाएं। उसके बाद डीजी स्कूल शिक्षा ने भी इस बारे में आदेश जारी किए थे।

एक अप्रैल से शुरू हुए एडमिशन

प्रदेश में 1 अप्रैल से स्कूल खुले और स्कूल चलो अभियान शुरू हुआ। इसके बाद अलग-अलग जिलों में बीएसए ने अलग-अलग आदेश जारी कर दिए। बाराबंकी के बीएसए ने स्कूलों को आदेश दिए कि 1 अप्रैल से 31 जुलाई के बीच जिन बच्चों की उम्र 6 साल हो रही है, उनका दाखिला ले लिया जाए। वहीं अयोध्या के बीएसए ने आदेश दिया है कि 5 वर्ष से अधिक उम्र के सभी बच्चों का अनिवार्य तौर पर स्कूल में दाखिला करवाया जाए। कोई भी बच्चा छूटने न पाए। 

अब एक बार फिर बेसिक शिक्षा निदेशक ने स्पष्ट किया है कि उन बच्चों का दाखिला ही कक्षा एक में किया जाए, जिनकी उम्र 1 अप्रैल को छह साल पूरी हो चुकी है।

बढ़ेगी छात्रों और शिक्षकों की परेशानी

बीएसए के इन आदेशों के चलते ज्यादातर जिलों में स्कूल ऐसे बच्चों का दाखिला ले चुके हैं जिनकी उम्र 1 अप्रैल को 6 साल पूरी नहीं हुई है। इस बारे में बाराबंकी के शिक्षक निर्भय सिंह कहते हैं कि सत्र की शुरुआत से पहले ही यह बात स्पष्ट हो जानी चाहिए थी। अब जिनका दाखिला लो चुका है, उनको लेकर असमंजस है। इससे बच्चे, अभिभावकों और शिक्षकों की परेशानी बढ़ेगी। 

प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह भी कहते हैं कि जिनका दाखिला ले लिया है, उनको निकालते हैं तो विवाद होगा। अफसर कुछ तय नहीं कर पाते और बाद में दोष शिक्षकों पर मढ़ दिया जाता है। कई स्कूलों में आगनबाड़ी केंद्र भी हैं। उनके बच्चों की उम्र कक्षा 6 में दाखिले के लिए पूरी नहीं हुई है तो उसका क्या करेंगे, इस बारे में भी स्पष्ट होना चाहिए।

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"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."

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