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देवीपाटन मंडल की चार सीटों में तीन पर प्रत्याशी का ऐलान लेकिन बृजभूषण पर संशय बरकरार

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दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट

कैसरगंज लोकसभा सीट हमेशा दिग्गजों के कब्जे में रही है। इस सीट से बृजभूषण सिंह एक बार सपा और लगातार दूसरी बार बीजेपी से सांसद हैं।

मंडल की चार सीटों में तीन सीटों पर बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। कैसरगंज लोकसभा सीट को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। यहां पर भाजपा के साथ सपा और बसपा ने भी अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा नहीं की है।

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बीजेपी सांसद बृजभूषण सिंह का टिकट भले ही फाइनल ना हो लेकिन वह धुआंधार चुनाव प्रचार के अभियान में लगे हैं। सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि बीजेपी इस सीट पर नया प्रयोग कर सकती है।

कैसरगंज लोकसभा सीट से हमेशा दिग्गजों के नाम रही है। इस सीट से समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य बेनी प्रसाद वर्मा चार बार अपनी जीत दर्ज करा चुके हैं। यह पहला मौका है। जब बीजेपी सांसद बृजभूषण सिंह को अपने टिकट के लिए इतना लंबा इंतजार करना पड़ा है।

बृजभूषण के टिकट को लेकर गोंडा ही नहीं आसपास के जिलों के लोगों की निगाहें टिकी हुई है। इस सीट पर अब तक भाजपा विधायक प्रेम नारायण पांडे, कर्नलगंज विधानसभा सीट से विधायक अजय सिंह, कटरा से भाजपा विधायक बावन सिंह और मोटिवेशनल स्पीकर अवध प्रताप ओझा का नाम भी चर्चा में आ चुका है। हमेशा दिग्गजों के कब्जे में रहने वाली इस सीट का गणित क्या होगा यह सवाल सबके मन में चल रहा है।

फिलहाल बीजेपी सांसद बृजभूषण सिंह बिना अपने टिकट की कोई परवाह किए अपने चुनावी अभियान में जुट गए हैं। सूत्रों के हवाले से यह खबर निकलकर आ रही है कि भाजपा यहां पर नया प्रयोग कर सकती है।

खबर तो यहां तक मिल रही है कि जिन नाम की चर्चा मीडिया के सुर्खियों में है। इन सभी नामो को छोड़कर बीजेपी इस बार इस सीट पर बिल्कुल नया चेहरा उतार कर सबको चौंका सकती है। ऐसा दावा लोग कर रहे हैं।

यूपी की सियासत में कैसरगंज लोकसभा सबसे चर्चित सीट

कैसरगंज लोकसभा सीट इस समय यूपी की सबसे चर्चित लोकसभा सीटों में से है। वर्ष 2019 के चुनाव में यहां से बीजेपी सांसद बृजभूषण सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी चंद्रदेव राम को भारी मतों के अंतर से हराया था।

बृजभूषण सिंह पर महिला पहलवानों ने पिछले वर्ष यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। जिसके कारण बृजभूषण सिंह के साथ ही यह लोकसभा सीट पूरे देश में चर्चित हो गई। लोकसभा चुनाव आते ही यह सीट इस समय फिर एक बार सुर्खियों में आ गई।

राजनीति के जानकारों का मानना है कि इस सीट को लेकर बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती है। यदि वह बृजभूषण सिंह को टिकट दे देती है। तो कहीं विपक्ष इसे मुद्दा ना बना ले। इसका असर सिर्फ कैसरगंज लोकसभा सीट पर ही नहीं बल्कि प्रदेश की कई सीटों पर पड़ सकता है। दूसरी तरफ बृजभूषण सिंह का पूरे देवीपाटन मंडल सहित पूर्वांचल की कई सीटों पर अच्छा खासा प्रभाव है। ऐसे में टिकट काटने के बाद पार्टी को कहीं बड़ा नुकसान ना उठाना पड़ जाए। इस बात पर भी मंथन चल रहा है। सपा और बसपा को भी बीजेपी के टिकट का इंतजार है। बीजेपी का टिकट फाइनल होने के बाद सपा और बसपा जातीय समीकरण को साधते हुए अपने प्रत्याशी की घोषणा कर सकती है। हालांकि 2019 के चुनाव पर नजर डालें तो सपा और बसपा के बीच गठबंधन था। इस सीट पर बृजभूषण सिंह ने बसपा उम्मीदवार चंद देवराम को 2.61 लाख के मतों से पराजित किया था। इस सीट पर बृजभूषण सिंह ने दो बार बीजेपी से तथा एक बार सपा के टिकट पर अपना परचम लहराया था।

कैसरगंज लोकसभा सीट पर एक नजर

वर्ष 1952 के चुनाव में हिंदू महासभा से शकुंतला नायर, वर्ष 1957 के चुनाव में कांग्रेस से भगवान दीन मिश्र, 1962 के चुनाव में स्वतंत्र पार्टी से बसंत कुमार, 1967 के चुनाव में भारतीय जनसंघ से शकुंतला नायर, 1971 के चुनाव में भारतीय जन संघ से शकुंतला नायर दोबारा चुनी गई। 1977 में जनता पार्टी से रुद्रसेन चौधरी, 1980 में कांग्रेस से राणा वीर सिंह, 1984 में कांग्रेस के टिकट पर राणा वीर सिंह ने दोबारा विजय हासिल की 1989 में बीजेपी से रुद्रसेन चौधरी, 1991 में बीजेपी से लक्ष्मी नारायण मणि त्रिपाठी 1996, 1998 1999 2004 में सपा के टिकट से बेनी प्रसाद वर्मा ने लगातार चार बार जीत हासिल किया।

वर्ष 2009 में समाजवादी पार्टी से बृजभूषण सिंह वर्ष 2014 में बृजभूषण सिंह भाजपा से तथा वर्ष 2019 में बृजभूषण सिंह बीजेपी से रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज किया।

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"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."

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