बांदा/करतल, विश्व हिंदू गौ रक्षा समिति के जिला प्रवक्ता उमेश तिवारी, तहसील अध्यक्ष सोनू करवरिया और अमन ने आज वृहद गौ संरक्षण केंद्र (रगौली भटपुरा) का निरीक्षण किया, जहां गौवंशों की दुर्दशा उजागर हुई। गौशाला में भूसे की जगह सरसों की सरसौनी खिलाई जा रही है, जिसे आमतौर पर पशु आहार के योग्य नहीं माना जाता।
गौवंशों को नहीं मिल रहा पोषण युक्त आहार
निरीक्षण के दौरान देखा गया कि: 370 गौवंशों के लिए केवल 10 किलो गुड़ उपलब्ध था। हरे चारे और पशु आहार का कोई इंतजाम नहीं था। भंडारण में मात्र नाममात्र का भूसा रखा गया था।
छह बोरी मुर्गीदाना पाया गया, जिससे गौवंशों को खिलाने का कोई औचित्य नहीं बनता।
गौशाला में मुर्गीदाना कैसे पहुँचा?
इस विषय में जब सोनू करवरिया ने संबंधित डॉक्टर अभिषेक से फोन पर जानकारी ली, तो उन्होंने इस बारे में अनभिज्ञता जताई। गौरतलब है कि मुर्गीदाना आमतौर पर सरकारी पशु अस्पताल से मुर्गी पालन करने वाली महिलाओं को मुफ्त में दिया जाता है। यह गौशाला में कैसे पहुंचा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
प्रबंधन में घोर लापरवाही
गौशाला का निरीक्षण करने पर यह भी सामने आया कि: अब तक इंडेक्स रजिस्टर तक नहीं बनाया गया है। गौशाला का कार्यभार एक महीने पहले दिया जा चुका है, फिर भी कोई पारदर्शिता नहीं है।
दो गौवंश मरणासन्न अवस्था में पाए गए, जिनमें से एक की आंखें और शरीर का पिछला हिस्सा कौओं द्वारा नोंच लिया गया।
भूख से व्याकुल गौवंश सिर्फ सरसौनी खाकर अपना पेट भरने को मजबूर हैं।
प्रशासन लापरवाह, गौशाला संचालक मौज मे
गौशाला की इस बदहाल स्थिति से स्पष्ट है कि संचालक और प्रशासनिक अधिकारी गौवंशों की देखभाल में घोर लापरवाही बरत रहे हैं। सरकारी मदद के बावजूद चारा और पोषण की सही व्यवस्था न होना गंभीर सवाल खड़े करता है।
जल्द हो कार्रवाई की मांग
गौ रक्षा समिति के पदाधिकारियों ने गौशाला की दुर्दशा सुधारने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। यदि प्रशासन जल्द हस्तक्षेप नहीं करता, तो गौवंशों की हालत और बदतर हो सकती है।
➡️सुशील कुमार मिश्रा की रिपोर्ट
