मऊ जिले में स्टांप चोरी का एक बड़ा मामला सामने आया है। जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र के स्थलीय निरीक्षण के दौरान 40 लाख 70 हजार 700 रुपये की स्टांप ड्यूटी की कमी पकड़ी गई। इस पर दो लोगों के खिलाफ स्टांप वाद दर्ज करने और रिकवरी की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
निरीक्षण में उजागर हुआ स्टांप घोटाला
जिलाधिकारी ने मार्च 2025 में पंजीकृत सबसे बड़ी मालियत के पांच विलेखों में से दो का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पहला मामला मौजा रणबीरपुर, तहसील सदर, जिला मऊ का सामने आया।
विक्रय अभिलेख संख्या 1917 के अनुसार:
विक्रेता: लेढा पुत्र बिहारी, निवासी रणबीरपुर, तहसील सदर, मऊ।
क्रेता: राजीव चौहान पुत्र चंद्रिका, निवासी भेलौर चंगेरी, तहसील घोसी, मऊ।
संपत्ति का रकबा: 1842.75 वर्ग मीटर
स्थलीय जांच में यह संपत्ति मुख्य सड़क (सेगमेंट रोड, मुसर्दाह मोड़ से तहसील सदर सीमा तक) पर स्थित पाई गई। साथ ही, इसके आसपास व्यावसायिक गतिविधियां भी संचालित हो रही थीं। इस आधार पर ₹38,640 की स्टांप ड्यूटी की कमी पाई गई।
दूसरे अभिलेख में 2 लाख से अधिक की स्टांप चोरी
निरीक्षण के दौरान दूसरे विक्रय अभिलेख की जांच में भी 2 लाख रुपये से अधिक की स्टांप ड्यूटी की कमी सामने आई। दोनों मामलों को मिलाकर कुल ₹40,70,700 की स्टांप चोरी पकड़ी गई।
जिलाधिकारी ने दिए कड़ी कार्रवाई के निर्देश
इस बड़े राजस्व नुकसान को देखते हुए जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र ने संबंधित लोगों के खिलाफ स्टांप वाद दायर करने और नियमानुसार वसूली की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने सहायक आयुक्त स्टांप, मऊ को इस मामले में त्वरित कार्रवाई करने का आदेश दिया।
इसके अलावा, जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि:
हर महीने पंजीकृत सबसे बड़ी मालियत के पांच विलेखों का स्थलीय सत्यापन किया जाए।
अपर जिलाधिकारी, सहायक आयुक्त स्टांप और सभी उप जिलाधिकारी बिक्री संपत्तियों का भौतिक सत्यापन करें।
स्टांप चोरी के मामलों में भारी जुर्माना लगाकर कड़ी कार्रवाई की जाए।
स्टांप ड्यूटी चोरी से सरकारी राजस्व को भारी नुकसान होता है। मऊ जिलाधिकारी के इस कड़े निरीक्षण से स्टांप घोटाले का बड़ा मामला उजागर हुआ है। प्रशासन अब दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोका जा सके।
➡️जगदम्बा उपाध्याय की रिपोर्ट

Author: samachardarpan24
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