कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में जामा मस्जिद सर्वे को लेकर उपजे विवाद ने गंभीर रूप ले लिया। स्थानीय लोगों की भीड़ में मौजूद कुछ उपद्रवियों ने हिंसा भड़का दी। पथराव और फायरिंग की घटनाओं के साथ पुलिस पर हमला किया गया और कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया।
संभल में तनाव की वजह क्या?
इस हिंसा की पृष्ठभूमि में एक लंबी राजनीतिक और पारिवारिक रंजिश भी जुड़ी हुई है। संभल से सांसद जियाउर्रहमान बर्क और सदर विधायक नवाब इकबाल महमूद के परिवारों के बीच दशकों पुरानी दुश्मनी का इतिहास है। हालांकि, लोकसभा चुनाव के दौरान दोनों ने अपनी पुरानी रंजिश को भुलाकर हाथ मिला लिया था, लेकिन अब पुलिस एफआईआर में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और विधायक नवाब इकबाल महमूद के बेटे सुहेल इकबाल का नाम सामने आया है, जिसने इस विवाद को और अधिक जटिल बना दिया है।
उदयपुर के शाही परिवार में संपत्ति विवाद
राजस्थान के मेवाड़ राजघराने में भी शाही संपत्तियों को लेकर बड़ा विवाद चल रहा है। यह मामला 1983 में तब शुरू हुआ जब बड़े बेटे महेंद्र सिंह मेवाड़ ने अपने पिता अरविंद सिंह मेवाड़ के खिलाफ संपत्ति के विभाजन का दावा किया। उन्होंने संपत्ति को पैतृक बताते हुए हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत अपना हिस्सा मांगा। वहीं, अरविंद सिंह ने वसीयत का हवाला देते हुए संपत्तियों को अविभाज्य बताया।
यह मामला कोर्ट में 37 साल तक चला और 2020 में उदयपुर की जिला अदालत ने संपत्ति के विभाजन का आदेश दिया। हालांकि, राजस्थान हाई कोर्ट ने 2022 में इस आदेश पर रोक लगा दी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा।
संपत्ति विवाद का असर और प्रशासन की भूमिका
बड़े बेटे महेंद्र सिंह अब समोर बाग में रहते हैं जबकि छोटे बेटे अरविंद सिंह सिटी पैलेस के शंभू निवास में बने हुए हैं। महेंद्र सिंह के बेटे विश्वराज सिंह का राजतिलक हो चुका है, लेकिन उन्हें शाही संपत्तियों पर अधिकार नहीं मिला। इस विवाद ने मेवाड़ परिवार के राव-उमराव और ठिकानेदारों के बीच वर्चस्व की जंग छेड़ दी है।
राजस्थान सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक उच्चस्तरीय टीम उदयपुर भेजी है, जिसमें गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस प्रशासन शामिल हैं। इस टीम का उद्देश्य मामले को शांत करना और समाधान निकालना है।
धूनी मंदिर परंपरा और शक्ति प्रदर्शन का विवाद
तनाव कम करने के लिए प्रशासन ने विश्वराज सिंह मेवाड़ को सिटी पैलेस परिसर स्थित धूनी मंदिर में दर्शन करवाने की व्यवस्था की। चाचा अरविंद सिंह ने केवल सीमित संख्या में लोगों के साथ दर्शन की अनुमति दी। प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा के बीच यह प्रक्रिया संपन्न करवाई। इसी के साथ मेवाड़ की परंपरा के अनुसार राजतिलक की प्रक्रिया पूरी हुई।
चाहे संभल की हिंसा हो या मेवाड़ राजघराने का संपत्ति विवाद, दोनों मामलों में प्रशासन के लिए चुनौती बड़ी है। संभल में सामुदायिक तनाव के पीछे राजनीतिक कारण उभरकर सामने आ रहे हैं, जबकि मेवाड़ में पारिवारिक विवाद ने राजस्थान की शान को सवालों के घेरे में डाल दिया है। ऐसे मामलों में संतुलन बनाए रखना प्रशासन और न्यायपालिका दोनों के लिए कठिन कार्य है।