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3 April 2025 10:33 am

कथा व्यास पं.श्री श्रीकृष्ण मिश्र जी से श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह कथा सुन कर श्रोता हुए भावविभोर

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दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट 

अतर्रा (बाँदा)। शिक्षक साहित्यकार प्रमोद दीक्षित मलय के लाई मंडी आवास में उनकी माता जी स्वर्गीया श्रीमती रामबाई दीक्षित की वार्षिकी के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथामृत ज्ञान यज्ञ के छठे दिन भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मिणी के विवाह का प्रसंग सुनकर भक्तजन धन्य हुए। कथा व्यास पं.श्री श्रीकृष्ण मिश्र शास्त्री जी की अमृतवाणी सुनकर श्रोता भावविभोर हो मधुर भक्तिरस का पान करते रहे।

उल्लेखनीय है कि श्रीमन्नूलाल संस्कृत महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राचार्य पं.श्री बाबूलाल दीक्षित की धर्मपत्नी एवं शिक्षक साहित्यकार प्रमोद दीक्षित मलय की माताजी श्रीमती रामबाई दीक्षित का गतवर्ष स्वर्गवास हो गया था। उनकी वार्षिकी के अवसर पर नवरात्र प्रतिपदा 22 मार्च से श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन लाई मंडी स्थित आवास में किया जा रहा है जिसमें परिवार, परिजन एवं पड़ोसी सहित शताधिक श्रद्धालु उपस्थित होकर कथा श्रवण कर पुण्यलाभ अर्जित कर रहे हैं।‌‌

 कथा व्यास पं.श्री श्रीकृष्ण मिश्र शास्त्री जी श्रीमद्भागवत कथा के भक्तिमय प्रसंगों के साथ ही आत्मा एवं परमात्मा के सम्बन्ध के गूढ़ तत्वों का सूक्ष्म विवेचन कर रहे हैं। गत दिवस श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के प्रसंग में कहा कि श्रीकृष्ण परमात्मा भगवान विष्णु नारायण हैं और रुक्मिणी माता जगज्जननी हैं। रुक्मी, शिशुपाल, जरासंध आदि आसुरी प्रवृत्तियां हैं। श्रीकृष्ण एवं बलराम के सम्मुख आसुरी प्रवृत्तियों का नाश एवं दैवीय सम्पत्ति का उद्भव संवर्धन होता है। श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह के अवसर पर कथा परीक्षित सपत्नीक प्रमोद दीक्षित मलय एवं श्रीमती वंदना दीक्षित ने दौरी,धोती, पायल, बिछियां एवं श्रंगार सामग्री भेंट की। चंद्रेश पांडेय एवं प्रतिभा पांडेय रजनी तथा रामनरेश शास्त्री जी एवं दिव्या ने साड़ी समर्पित की। दिनेश गौतम ने थाली सेट उपहार दिया।

विनोद दीक्षित, राजकुमारी दीक्षित, प्रदीप दीक्षित एवं मंजू दीक्षित, लल्लूराम शुक्ल, बीएन पांडेय, बालकृष्ण बाजपेयी, अम्बिका द्विवेदी, लवकुश उपाध्याय, शीतल प्रसाद त्रिवेदी, ज्योति उपाध्याय, चंद्रमौलि मिश्र आदि उपस्थित रहे। प्रसाद में लड्डू, बूंदी, लाई-बतासा, फल आदि वितरित किया गया।

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Author: samachar

"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."