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28 February 2025 11:51 pm

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रोज मां को नींद की गोली खिलाकर करती थी घिनौना काम, सच्चाई जानकर शर्म से झुक जाएंगी आंखें

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चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कृष्णनगर इलाके से एक सन्न कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां 15 वर्षीय एक किशोरी ने अपनी मां को लगातार तीन महीने तक नींद की गोलियां खिलाईं। इसका मकसद मां को बेहोश रखना था, ताकि वह अपने दोस्त से फोन पर बात कर सके और उससे मिलने के लिए घर से बाहर जा सके।

मां के खाने में मिलाती थी नींद की गोलियां

जांच में पता चला कि किशोरी रोजाना अपनी मां के खाने में 3-4 नींद की गोलियां मिला देती थी। हालांकि, इस साजिश की शुरुआत इससे भी खतरनाक थी।

पुलिस को मिली जानकारी के अनुसार, लड़की के पास जहर की एक शीशी भी थी, जो उसे उसके दोस्त ने दी थी। पहले उसने मां को जहर देने की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में उसने अपना इरादा बदल लिया और सिर्फ नींद की गोलियां देने लगी।

नींद की गोलियों की अधिक मात्रा से बिगड़ी मां की तबीयत

तीन महीने तक लगातार दवाओं के असर से महिला की तबीयत खराब होने लगी। जब परिवार वालों को शक हुआ, तो उन्होंने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि महिला को लंबे समय से नींद की गोलियों की भारी खुराक दी जा रही थी।

इसके बाद जब परिवार ने किशोरी से सख्ती से पूछताछ की, तो उसने पूरी सच्चाई कबूल कर ली।

फोन की पाबंदी बनी इस साजिश की वजह

यह मामला तब शुरू हुआ जब किशोरी की फोन पर बात करने की आदत पर उसकी मां ने रोक लगा दी और उसका फोन छीन लिया। इससे नाराज होकर लड़की ने मां से झगड़ा किया और मारपीट तक कर डाली। इसी गुस्से में उसने मां को बेहोश करने की साजिश रची, ताकि वह अपनी मर्जी से बाहर जा सके और अपने दोस्त से मिल सके।

परिवार ने रखने से किया इनकार, शेल्टर होम भेजी गई किशोरी

घटना सामने आने के बाद परिवार ने किशोरी को अपने साथ रखने से इनकार कर दिया। परामर्शदाताओं ने परिवार को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। आखिरकार, लड़की को शेल्टर होम भेज दिया गया।

समाज के लिए बड़ा सवाल: क्या किशोरों पर डिजिटल युग का गलत प्रभाव पड़ रहा है?

यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यह स्पष्ट करता है कि माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद की कमी और डिजिटल युग में बढ़ते प्रभाव के कारण किशोर मानसिक और भावनात्मक रूप से किस तरह प्रभावित हो रहे हैं।

ऐसे मामलों को रोकने के लिए जरूरी है कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाए और परिवार में खुली बातचीत को बढ़ावा दिया जाए।

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