आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में ‘रिमोट सेंसिंग एंड जीआईएस फॉर ज्योग्राफिकल रिसर्च एंड एप्लिकेशन’ विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
सम्मेलन का उद्घाटन और प्रारंभिक सत्र
सबसे पहले, सम्मेलन का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ। इसके पश्चात, अतिथि प्रवक्ता एवं संयोजक सौरभ सिंह ने स्वागत भाषण और बीज वक्तव्य प्रस्तुत किया।
मुख्य अतिथि के रूप में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व कुलपति प्रो. पृथ्वीश नाग तथा मुख्य वक्ता के रूप में बीएचयू के महिला महाविद्यालय की प्रो. सीमा तिवारी उपस्थित रहीं।
अपने उद्घाटन भाषण में कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि यह सम्मेलन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि रिमोट सेंसिंग और जीआईएस वर्तमान समय में कई क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भौगोलिक आँकड़ों के विश्लेषण से समाज और मानव जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं।
मुख्य वक्तव्य और विचार-विमर्श
इसके बाद, मुख्य वक्ता प्रो. सीमा तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि रिमोट सेंसिंग और जीआईएस का उपयोग जनसंख्या वृद्धि, जलवायु परिवर्तन, कृषि, खाद्य और जल सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने इस तकनीक की उपयोगिता को विस्तार से समझाया।
इसी क्रम में, मुख्य अतिथि प्रो. पृथ्वीश नाग ने डेटा तकनीक और भौगोलिक अनुसंधान पर चर्चा करते हुए डेटा संकलन, इमेज एनालिसिस, डेटाबेस प्रबंधन और डिजिटल एलिवेशन मानचित्र (DEM) की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के भी उत्तर दिए।
तकनीकी सत्र और शोधपत्र प्रस्तुतिकरण
इसके बाद, दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें डॉ. राम भूषण तिवारी (बीएचयू), डॉ. सर्वेश सिंह, डॉ. मनीष कुमार सिंह, डॉ. संदीप सिंह, डॉ. अंजू सिंह और प्रो. एस.के. सिंह ने अपने विचार साझा किए।
इसके अतिरिक्त, ऑनलाइन सत्र में 30 शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए, जबकि ऑफलाइन सत्र में 45 विद्यार्थियों ने अपने शोध कार्यों का प्रस्तुतिकरण किया।
समापन सत्र और भविष्य की संभावनाएँ
अंततः, समापन सत्र में प्रो. एस.के. सिंह (दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, गोरखपुर) ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भविष्य में रिमोट सेंसिंग और जीआईएस के क्षेत्र में अध्ययन और शोध के लिए अपार संभावनाएँ हैं।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव विशेश्वर प्रसाद ने आभार ज्ञापन किया, जबकि सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. शशि प्रकाश शुक्ला ने सभी आमंत्रित अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद किया।
इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मेलन में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापकगण, शोधार्थी और लगभग 200 विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. ऋतंभरा और डॉ. दीपिका अग्रवाल ने किया।
➡️जगदम्बा उपाध्याय की रिपोर्ट

Author: samachardarpan24
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