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अपने टिकट को लेकर बिल्कुल चिंतित नहीं है बृजभूषण शरण सिंह, आइए जानते हैं “शक्ति भवन” की चहल-पहल

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दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट

गोंडा, भाजपा के सांसद बृज भूषण शरण सिंह की अनुपस्थिति के बावजूद गोंडा स्थित उनके आलिशान मकान ‘शक्ति भवन’ में गतिविधियाँ तेज हैं।आगामी लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अभी तक सिंह को टिकट देने की घोषणा नहीं की है, लेकिन माहौल में कोई अनिश्चितता नहीं है।

छह बार के सांसद के समर्थक आश्वस्त हैं। इससे पहले कि दूसरा समर्थक उसे चुप रहने के लिए कहे, उनमें से एक आत्मविश्वास से कहता है, “चुनाव तो लड़ना ही है।”

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सिंह स्वयं हाल के सप्ताहों में सोशल मीडिया पर अत्यधिक सक्रिय रहे हैं, अपने पोते-पोतियों के साथ तस्वीरें पोस्ट करते रहे हैं और वर्तमान में एक ‘पारिवारिक व्यक्ति’ की अपनी छवि बनाने की कोशिक में हैं।

सिंह के आवास से थोड़ी दूर, एक चाय की दुकान पर लोग अधिक खुलकर बात कर रहे हैं। चाय की दुकान पर काम करने वाले लड़के ग्राहकों के ऑर्डर देखने में लगे हैं। दुकान के मालिक ने फोन पर कहा, “चाहे उन्हें टिकट मिले या नहीं, उनका जीतना तय है। अगर उनके बेटे प्रतीक भूषण चुनाव लड़ते हैं तो भी जीत पक्की है। इसीलिए देरी की चिंता किसी को नहीं है। इसके अलावा, समाजवादी पार्टी बृजभूषण शरण सिंह के स्वागत के लिए बांहें फैलाए इंतजार कर रही है।”

समाजवादी पार्टी ने अभी तक कैसरगंज सीट के लिए उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं किया है और चर्चा है कि अगर भाजपा सिंह की अनदेखी करती है तो राज्य का मुख्य विपक्षी दल सपा उन्हें टिकट देने के लिए तैयार है।

उनका जीतने का गुण उन्हें अन्य पार्टियों के लिए स्वीकार्य विकल्प बनाता है।

सिंह अपने राजनीतिक भविष्य और यौन उत्पीड़न से संबंधित मामले की स्थिति के बारे में मीडिया के सवालों से बच रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में मीडियाकर्मियों के साथ उनकी कई झड़प हो चुकी है।

यह भी उल्लेखनीय है कि जब से सिंह पर महिला पहलवानों ने आरोप लगाये हैं, तब से एक भी वरिष्ठ भाजपा नेता ने सार्वजनिक रूप से उनका विरोध नहीं किया है, जो इस बात की पुष्टि करता है कि पार्टी के भीतर उनका कितना दबदबा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बृजभूषण शरण सिंह को बाहर करने से पूर्वी उत्तर प्रदेश की कम से कम चार-पांच सीटों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि इस क्षेत्र में उनका काफी प्रभाव है।

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"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."

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