कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने पसमांदा मुस्लिम वोटरों को आकर्षित करने के लिए काम किया है, लेकिन कुछ नगर पालिका अध्यक्ष पदों पर वे सफल नहीं रहे हैं। यह एक राजनीतिक प्रक्रिया है और प्रतिद्वंद्वियों के प्रभाव में भी हो सकता है जहां वे नगर पालिका अध्यक्ष पद को नहीं जीत सकते हैं। नतीजतन, यह एक संकेत हो सकता है कि मुस्लिम वोटर ने अन्य पार्टियों को प्राथमिकता दी हो या फिर विभाजन के कारण वोट स्प्लिट हुए हो सकते हैं। इसके अलावा, पार्टी के प्रत्याशियों की क्षमता, कार्यकर्ताओं का बढ़ावा और अन्य निर्दिष्ट कारकों का भी प्रभाव होता है जो नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश निकाय चुनावों में बीजेपी ने पहली बार 395 मुस्लिम प्रत्याशियों को उम्मीदवार के रूप में प्राथमिकता दी थी और इनमें से 54 प्रत्याशियों को जीत हासिल हुई है। ये जीत पार्षदी, नगर पंचायत अध्यक्ष और नगर पंचायत सदस्य के पदों पर हासिल की गई है। हालांकि, नगर पालिका अध्यक्ष के पद पर बीजेपी द्वारा पांच मुस्लिम उम्मीदवारों की प्रतिस्पर्धा थी, लेकिन उनमें से किसी एक को भी विजय नहीं मिली।
यह चुनाव नतीजे प्रदेश के विभिन्न जिलों में हुए हैं और इससे प्रकट हो रहा है कि बीजेपी ने मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनावों में शामिल करके उन्हें जीत का मौका दिया है।
बीजेपी ने रामपुर की टांडा नगर पालिका में मेहनाज जहां और रामपुर नगर पालिका में डॉ. मुसरेत मुजीब को अध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशी बनाया था, लेकिन दोनों हार गए हैं। इसके अलावा, आजमगढ़ की मुबारकपुर से उतरी तमन्ना बानो और बदायूं की ककराला पालिका से लड़े मरगून अहमद खां भी हार का सामना करना पड़ा। बिजनौर की अफजलगढ़ नगर पालिका परिषद से उतरीं खतीजा भी हार गईं।
बीजेपी ने पिछले कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में पसमांदा मुस्लिमों के लिए सम्मेलन आयोजित किए हैं और उन्हें बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। यह सभी पहल के रूप में देखा जा सकता है, जिसका उद्देश्य हो सकता है मुस्लिम मतदाताओं के साथ संवाद बढ़ाना और उन्हें अपने ओर आकर्षित करना।
इन्होंने हासिल की जीत
बीजेपी के मुस्लिम प्रत्याशियों में सिर्फ लखनऊ के हुसैनाबाद से लुबना अली खान और गोरखपुर से अकीकुल निशा को पार्षद के पद की जीत मिली है। इसके साथ ही, नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए बरेली के धौराटांडा से नदीम उल हसन, मुरादाबाद के भोजपुर धर्मपुर से फरखंदा जबीं, संभल के सिरसी से कौसर अब्बास, सहारनपुर की सुल्तानपुर चिलकाना से फूलबानो और हरदोई के गोपामऊ से वली मोहम्मद ने जीत हासिल की है।
इसके अलावा, बीजेपी के मुस्लिम प्रत्याशियों ने अमेठी, अयोध्या, कानपुर, कासगंज, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, चित्रकूट, फर्रुखाबाद, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, महाराजगंज, रामपुर, सुल्तानपुर, शाहजहांपुर, संभल और सहारनपुर से नगर पंचायत सदस्य के पदों पर जीत हासिल की हैं। यह जीतें प्रदर्शित करती हैं कि बीजेपी ने विभिन्न जिलों में मुस्लिम उम्मीद
अलीगढ़ में सभी 18 प्रत्याशी हारे
अलीगढ़ में 18 मुस्लिम प्रत्याशी उतारे गए थे और सभी हार गए हैं। वैसे ही, बरेली में 9, कानपुर में 10, और वाराणसी में 3 मुस्लिम प्रत्याशियों की हार हुई है। सहारनपुर में 10 मुस्लिम प्रत्याशियों में से 9 प्रत्याशियों की जमानत जब्त कर ली गई है। यह जानकारी बीजेपी द्वारा उत्तर प्रदेश में नगर पालिका चुनावों के दौरान हासिल हुई है।

Author: samachar
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