देहरादून

DGP अशोक कुमार को रिटायरमेंट पर दी गई भव्य रैतिक परेड की सलामी

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प्रेमनाथ पेटवाल की रिपोर्ट

देहरादूनः उत्तराखंड नागरिक पुलिस के महानिदेशक (डीजीपी) अशोक कुमार को सेवानिवृत्त हुए। डीजीपी को प्रात: पुलिस लाइन्स देहरादून में आयोजित भव्य रैतिक परेड में मान प्रणाम (सलामी) प्रदान किया गया। इस अवसर पर उन्होंने दो पुलिस कार्मिकों को सराहनीय सेवा पदक प्रदान किया।

अशोक कुमार ने कहा कि 34 वर्षों से अधिक की समर्पित सेवा के बाद पुलिस सेवा का अंतिम दिन काफी भावुक क्षण हैं। वर्दी ने सेवा के हजारों मौके दिए। टीम के बिना कुछ भी संभव नहीं है। आप मेरे साथ खड़े रहे। जान जोखिम में डालकर खड़े रहे। मैं अपने पुलिस के सभी साथियों का धन्यवाद करता हूं। उन्होंने कहा कि हमने मिलकर कई बड़ी चुनौतियों जैसे कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर, रैंणी आपदा, कोरोना महामारी के बीच महाकुम्भ का आयोजन और कुमाऊं परिक्षेत्र में अतिवृष्टि, आदि का धैर्य और दृढ़ता के साथ डटकर सामना किया और देशभर के लोगों का विश्वास जीता।

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डीजीपी कुमार ने कहा कि हम सभी ने उत्तराखंड पुलिस को पीपल फ्रेंडली, संवेदनशील और पीड़ित केन्द्रित बनाने के लिए काम किया, ताकि हम देश की सर्वोत्तम पुलिस बन सके।

उन्होंने कहा कि इस दौरान उत्तराखंड पुलिस ने ऑपरेशनल, प्रशासनिक, वेलफेयर, आधुनिकीकरण, प्रौद्योगिकी आदि क्षेत्रों में वृहद रूप से ध्यान केन्द्रित कार्य किया। हम सभी ने मिलकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा दी गई स्मार्ट पुलिसिंग की अवधारणा को साकार करने के लिए कार्य किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी नए नेतृत्व के साथ मिलकर लगन, अनुशासन, ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और जोश के साथ राज्य व आम जनता की सेवा एवं सुरक्षा करते रहेंगे तथा उनका विश्वास जीतने में सफल होंगे।

वहीं नवनियुक्त पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार ने अपने सम्बोधन में कहा कि सरकारी सेवा में सेवानिवृत्ति शाश्वत सत्य होता है और सेवानिवृत्ति के बाद जिन्दगी की एक नई पारी शुरू होती है। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के साथ ही उत्तराखंड पुलिस को भी 23 वर्ष पूर्ण हुए हैं, जिसमें कुमार ने पुलिस सेवा में अपना विशेष योगदान दिया है। उत्तराखंड पुलिस के इंफ्रास्ट्रक्चर में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

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निवर्तमान डीजीपी कुमार ने इस मौके पर, उत्कृष्ट कार्यों के लिए मुख्य आरक्षी 44 नापु मनोज कुमार और महिला सिपाही 378 ना.पु. विद्या मेहता को ‘सराहनीय सेवा सम्मान चिह्न’ प्रदान किया।

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"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."

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