Explore

Search
Close this search box.

Search

4 April 2025 2:19 pm

वाह, जिलाधिकारी की दरियादिली ; भरी जनसभा में लडकी की इस बात पर हो गए फिदा और फिर.. …

477 पाठकों ने अब तक पढा

अब्दुल मोबीन सिद्दीकी की रिपोर्ट

कानपुर के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने एक बार फिर अपनी दरियादिली से लोगों का दिल जीत लिया है। जनसुनवाई के दौरान एक बुजुर्ग पिता और उनकी बेटी की मदद कर उन्होंने न केवल इंसानियत की मिसाल पेश की, बल्कि यह भी साबित किया कि प्रशासनिक अधिकारी यदि चाहें, तो जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

बेटी की शिक्षा के लिए आगे आए डीएम

जनसुनवाई के दौरान रामकुमार कुशवाहा अपनी बेटी दिव्यांशी के साथ डीएम के पास पहुंचे। बातचीत के दौरान दिव्यांशी ने डीएम से कहा,

“अंकल, मैं पढ़ना चाहती हूं, लेकिन UPSC की कोचिंग के लिए पैसे नहीं हैं।”

बेटी की शिक्षा के प्रति उसकी ललक देख डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने तुरंत एक प्रतिष्ठित UPSC कोचिंग संस्थान को फोन लगाया और दिव्यांशी के एडमिशन की व्यवस्था कराई। इतना ही नहीं, कोचिंग की पूरी फीस भी खुद चुकाई। डीएम के इस कदम की वहां मौजूद सभी लोगों ने जमकर सराहना की।

किरायेदार ने बढ़ाई मुश्किलें, डीएम ने किया समाधान

रामकुमार कुशवाहा के लिए आर्थिक तंगी एक बड़ी समस्या बनी हुई थी। उन्होंने पहले अपने घर का एक कमरा किराए पर दिया था और बदले में 1,30,000 रुपये पगड़ी के रूप में लिए थे। अब जब उन्हें खुद उस कमरे की जरूरत पड़ी, तो किरायेदार ने कमरा खाली करने के बदले 1,65,000 रुपये की मांग कर दी।

रेणु की जुल्फों का सफर: इश्क, रश्क और बयालीस की बंदिशें ; इमलियों के झूले से जेल की सलाखों तक

समस्या से जूझ रहे रामकुमार ने जिलाधिकारी की जनसुनवाई में अपनी फरियाद रखी। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने तुरंत कार्रवाई की और दोनों पक्षों के बीच समझौता करवा दिया। इसके बाद बुजुर्ग का घर खाली करा दिया गया और किरायेदार को भी उचित राशि दिलाई गई।

डीएम ने दी प्रेरणादायक सीख

इस नेक पहल पर बोलते हुए जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा,

“हर जरूरतमंद की मदद करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। हमारे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सबको शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। अगर हमारे छोटे-छोटे कदम किसी के जीवन को संवार सकते हैं, तो इससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती है?”

समाज के लिए एक मिसाल

कानपुर डीएम का यह कदम समाज के लिए एक प्रेरणा है। एक ओर उन्होंने बेटी की शिक्षा का सपना पूरा करने में मदद की, तो दूसरी ओर एक बुजुर्ग को उनके अधिकार दिलाए। प्रशासन की ऐसी संवेदनशीलता अगर हर जगह देखने को मिले, तो समाज में न्याय और समानता की भावना और मजबूत होगी।

लेखपाल बना गुंडा, झांसा देकर कौड़ियों के दाम में खरीदी करोड़ों की जमीन, दे रहा धमकी, यही होगा सुशासन सरकार में ?

▶️प्रदेश की अन्य खबरों के लिए हमारे साथ बने रहें समाचार दर्पण24.कॉम

samachardarpan24
Author: samachardarpan24

जिद है दुनिया जीतने की

Leave a comment