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18 वीं लोकसभा चुनाव, 1.2 लाख करोड़ का खर्च, भारत का सबसे मंहगा चुनाव 2024

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आत्माराम त्रिपाठी की रिपोर्ट

देश इस समय पूरी तरह 18वीं लोकसभा के लिए चुनावी बुखार की चपेट में आया हुआ है, जिस पर 1.2 लाख करोड़ रुपए से अधिक राशि खर्च होगी, जो 2019 के चुनावों में हुए खर्च से लगभग दुगुनी है। 

ऐसा अनुमान ‘सैंटर फॉर मीडिया स्टडीज़’ का है, परंतु चुनाव पर इससे भी अधिक खर्च नशे का दरिया बहाने तथा मतदाताओं को उपहार आदि देने पर हो जाता है। इसलिए भारत में होने वाले आम चुनाव को दुनिया का सबसे महंगा चुनाव कहा जा रहा है। इन चुनावों में हो रही दिलचस्पियां निम्न में दर्ज हैं :

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तमिलनाडु के ‘इरोड’ निर्वाचन क्षेत्र से एम.डी.एम.के. का टिकट लेने के इच्छुक और वर्तमान सांसद ए. गणेशमूर्ति ने टिकट न मिलने से नाराज होकर 24 मार्च को जहर निगल लिया, जिससे उनकी मौत हो गई। 

छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) से भाजपा प्रत्याशी नकुल नाथ की सम्पत्ति तो 716.93 करोड़ रुपए है परंतु उनके नाम पर अपनी कार तक नहीं है। 4.76 करोड़ रुपए की सम्पत्ति के मालिक तथा असम के डिब्रूगढ़ से भाजपा प्रत्याशी सर्वानंद सोनोवाल के पास भी अपनी कार नहीं है। नागौर से भाजपा प्रत्याशी ज्योति मिर्धा की घोषित सम्पत्ति तो 126 करोड़ है, परंतु कार उनके पास भी नहीं। 

तमिलनाडु की रामनाथपुरम सीट से भाजपा गठबंधन की ओर से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम के मुकाबले में उन्हीं के नाम वाले 4 अन्य निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे हैं। इन पांच पन्नीरसेल्वमों में से जनता किसे चुनेगी यह तो समय ही बताएगा। 

परिवार से बगावत करके ‘झारखंड मुक्ति मोर्चा’ के सुप्रीमो शिबू सोरेन की बड़ी बहू सीता सोरेन भाजपा में शामिल हो गई हैं। उन्होंने अपने पति दुर्गा सोरेन की मौत को लेकर सवाल उठा दिए हैं और कहा है कि ‘‘दुर्गा सोरेन की मौत स्वाभाविक नहीं थी। मैंने इसकी जांच की मांग हेमंत सोरेन की सरकार से की थी जिसे स्वीकार नहीं किया गया।’’

पटियाला में 32 वर्ष के बाद भाजपा ने अपना उम्मीदवार उतारा है। 1992 में भाजपा के दीवान चंद सिंगला 28,877 वोटें लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे।   लुधियाना में भी 28 वर्ष के बाद भाजपा ‘कमल’ के निशान पर चुनाव लडऩे जा रही है। यहां 1996 में भाजपा ने अपने चिन्ह पर चुनाव लड़ा था और तीसरे स्थान पर ही रही थी। 

पहले भाजपा चाय पर चर्चा करती थी लेकिन अब पहली बार महाराष्ट्र में भाजपा ने विशेष रूप से युवा मतदाताओं के साथ चाय की बजाय कॉफी पर चर्चा करने और युवाओं को प्रधानमंत्री मोदी के चित्र लगे मगों में बगीचों और कैफे में कॉफी पिलाने का फैसला किया है। 

मुम्बई में बड़ी रैलियां और सभाओं के लिए शिवाजी पार्क को सबसे सही जगह माना जाता है। इसलिए इन चुनावों के दौरान भी रैलियों के लिए शिवाजी पार्क बुक करने की विभिन्न राजनीतिक दलों में आवेदन करने की होड़ सी लगी हुई है। 

चुनावों के शोर के बीच दल बदली का भी जोर है लेकिन दल बदलुओं के लिए एक बुरी खबर है। एक रिपोर्ट के अनुसार दल बदलुओं की जीत का औसत लगातार कम होता जा रहा है जो 1967 में  49 प्रतिशत के मुकाबले 2019 में घट कर 15 प्रतिशत रह गया था। 

चुनाव में प्रचार के लिए चार्टर्ड विमानों की तुलना में हैलीकाप्टरों की अधिक मांग है और 2019 की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत अधिक बुकिंग हो रही है। चार्टर्ड विमानों का किराया 4.5 लाख रुपए से 5.25 लाख रुपए और हैलीकाप्टर के लिए कम से कम 1.5 लाख रुपए प्रति घंटा बताया जा रहा है। 2019-20 के ऑडिट के अनुसार भाजपा ने इन पर 250 करोड़ रुपए से अधिक रकम खर्च की थी। 

पिछले 20 वर्षों में संसद में पहुंचने वाले दागी सांसदों की संख्या में लगभग 163 प्रतिशत वृद्धि हुई है। 2004 में आपराधिक मामलों वाले विजयी सांसदों की संख्या 60 थी जो 2019 में 158 हो गई। 

इन चुनावों में हालांकि निर्वाचन आयोग ने एक प्रत्याशी के लिए अधिकतम 95 लाख रुपए खर्च की सीमा तय की है परंतु एक प्रत्याशी के चुनाव प्रचार पर किए जाने वाले खर्च का अनुमान कम से कम औसतन 6 करोड़ रुपए लगाया गया है जिसमें कार भाड़ा, कार्यालय पर होने वाला खर्च, पर्ची बांटने, खिलाने-पिलाने, बूथ प्रबंधन आदि के खर्च शामिल हैं। कुल मिलाकर चुनावों में इस समय जिस तरह का माहौल बना है, उसमें आने वाले दिनों में और तेजी आने की संभावना है।

samachar

"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."

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