ब्रजकिशोर सिंह की रिपोर्ट
हरियाणा से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में देखा जा सकता है कि एक बेटी अपनी ही माँ के साथ बेरहमी से पेश आ रही है। माँ दर्द से चीख रही है, लेकिन बेटी का दिल जरा भी नहीं पसीज रहा। इस वीडियो के सामने आने के बाद लोगों में भारी आक्रोश है और वे कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।
वीडियो में क्या दिखा?
इस वीडियो में, जो हरियाणवी भाषा में है, एक युवती अपनी माँ के साथ बुरी तरह दुर्व्यवहार करती नजर आ रही है। माँ दर्द से रो रही है, लेकिन बेटी का व्यवहार बेहद हिंसक और अमानवीय है। यह घटना न केवल पारिवारिक मूल्यों पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि समाज में नैतिकता और संस्कारों की गिरावट हो रही है।
सोशल मीडिया पर जनता की प्रतिक्रिया
जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएँ आने लगीं। हजारों यूजर्स ने इस क्रूरता की निंदा करते हुए बेटी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की।
उदाहरण के लिए, गणेश जोशी नामक एक यूजर ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:
“इस बेटी को जानवर बनाने वाली भी यही माँ रही होगी! अगर बचपन में अनुशासन में रखा होता और गलती करने पर सही सिखाया होता, तो आज ऐसी नौबत नहीं आती!”
वहीं, डेली अपडेट नामक अकाउंट ने लिखा:
“हरियाणा में माँ के साथ ऐसा व्यवहार बेहद शर्मनाक है। समाज को इसकी निंदा करनी चाहिए और दोषी को सजा मिलनी चाहिए। संस्कार ही हमारी असली पहचान हैं!”
समाज में बढ़ती हिंसा और नैतिकता का पतन
इस घटना ने समाज में पारिवारिक हिंसा और नैतिक मूल्यों के गिरते स्तर को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता तनाव, आपसी संवाद की कमी और बदलती जीवनशैली ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। जब परिवारों में आपसी समझ और सम्मान खत्म होने लगता है, तब रिश्ते कड़वाहट और हिंसा की ओर बढ़ जाते हैं।
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कानूनी पहलू – क्या कहता है भारतीय कानून?
भारतीय कानून के अनुसार, माता-पिता या वरिष्ठ नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार करना एक गंभीर अपराध है। ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007’ के तहत, बच्चों का यह कर्तव्य है कि वे अपने माता-पिता की देखभाल करें। इस कानून के अनुसार, यदि कोई संतान अपने माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार करती है, तो उसे जुर्माने और सजा दोनों का सामना करना पड़ सकता है।
समाज की भूमिका – बदलाव की जरूरत
ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समाज को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। सबसे पहले, हमें परिवारों में संवाद को बढ़ावा देना होगा ताकि आपसी समझ बनी रहे। साथ ही, नैतिक शिक्षा और संस्कारों का बच्चों में बचपन से ही संचार किया जाना चाहिए। इसके अलावा, समाज को ऐसी घटनाओं की कड़ी निंदा करनी चाहिए और पीड़ितों को न्याय दिलाने में सहायता करनी चाहिए।
निष्कर्ष – आत्मनिरीक्षण का समय
हरियाणा की यह घटना केवल एक वीडियो भर नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है। हमें अपने पारिवारिक मूल्यों और नैतिकता को फिर से स्थापित करने की जरूरत है। बच्चों में संस्कारों का संचार, परिवारों में संवाद और समाज की सक्रिय भागीदारी ही ऐसी घटनाओं को रोकने का एकमात्र उपाय है। अब समय आ गया है कि हम आत्मनिरीक्षण करें और सुनिश्चित करें कि हमारे घरों और समाज में सम्मान, प्रेम और समझ का वातावरण बना रहे।
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Author: जगदंबा उपाध्याय, मुख्य व्यवसाय प्रभारी
जिद है दुनिया जीतने की