Explore

Search
Close this search box.

Search

5 April 2025 10:32 am

नगीना सीट का राजनीतिक सफर: प्रमुख दलों की हार और चंद्रशेखर आजाद की ऐतिहासिक जीत, बड़े बडों का माथा घूम गया

99 पाठकों ने अब तक पढा

संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश की नगीना सीट पर चंद्रशेखर आजाद की जीत एक ऐतिहासिक घटना है, क्योंकि यह पहली बार है जब किसी प्रमुख दल के उम्मीदवार को जीत हासिल नहीं हुई है। आइए इस परिणाम का विश्लेषण करें:

1.चंद्रशेखर आजाद (आजाद समाज पार्टी):

   प्राप्त वोट: 5,12,552

   जीत का अंतर: 1,51,473 वोट

2.ओम कुमार (भाजपा):

    प्राप्त वोट: 3,61,079

  1. मनोज कुमार (सपा):

    प्राप्त वोट: 1,02,374

  1. सुरेंद्र पाल सिंह (बसपा):

    प्राप्त वोट: 13,272

चंद्रशेखर आजाद की प्रभावशाली जीत

चंद्रशेखर आजाद की जीत दर्शाती है कि जनता में उनके प्रति विश्वास और समर्थन काफी मजबूत है। उन्होंने 5,12,552 वोट हासिल किए, जो उनके लिए एक महत्वपूर्ण समर्थन का संकेत है। उनका जीत का अंतर भी काफी बड़ा है, जिससे पता चलता है कि उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से अच्छी-खासी बढ़त बना ली थी।

भाजपा का प्रदर्शन

भाजपा के ओम कुमार ने 3,61,079 वोट प्राप्त किए और दूसरे स्थान पर रहे। यह भी एक मजबूत प्रदर्शन है, लेकिन चंद्रशेखर आजाद के मुकाबले यह पर्याप्त नहीं था।

सपा और बसपा का प्रदर्शन

सपा के मनोज कुमार को 1,02,374 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे। यह दर्शाता है कि सपा को इस सीट पर अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका।

बसपा के सुरेंद्र पाल सिंह को मात्र 13,272 वोट मिले, जिससे वे चौथे स्थान पर रहे। यह बसपा के लिए एक निराशाजनक प्रदर्शन है, खासकर जब इस सीट पर उनकी पकड़ कमजोर होती दिख रही है।

चंद्रशेखर आजाद की जीत कई महत्वपूर्ण संकेत देती है:

इस परिणाम से स्पष्ट होता है कि मतदाता पारंपरिक दलों से हटकर नए और उभरते हुए नेताओं को भी समर्थन दे रहे हैं।

आर्थिक और सामाजिक मुद्दों का प्रभाव चंद्रशेखर आजाद के जीतने का एक कारण यह भी हो सकता है कि उन्होंने स्थानीय मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठाया हो और जनता का विश्वास जीतने में सफल रहे हों।

राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव

यह जीत दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई ताकतों का उदय हो रहा है, जो भविष्य में राज्य के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

इस प्रकार, नगीना सीट का यह परिणाम आगामी चुनावों के लिए महत्वपूर्ण संकेतक हो सकता है और अन्य राजनीतिक दलों को अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित कर सकता है।

2019 के आम चुनाव में नगीना सीट पर बसपा की जीत और 2024 के परिणाम के बीच तुलना करना दिलचस्प होगा, ताकि समझा जा सके कि किस तरह से राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव आया है। आइए दोनों चुनावों के परिणामों का विश्लेषण करें:

2019 के चुनाव परिणाम:

बसपा (गिरीश चंद्र): 5,68,378 वोट (56.31%)

भाजपा (यशवंत सिंह): 4,01,546 वोट (39.78%)

कांग्रेस (ओमवती देवी): 20,046 वोट (1.99%)

नोटा: 6,528 वोट (0.65%)

2024 के चुनाव परिणाम:

आजाद समाज पार्टी (चंद्रशेखर आजाद): 5,12,552 वोट

भाजपा (ओम कुमार): 3,61,079 वोट

सपा (मनोज कुमार): 1,02,374 वोट

बसपा (सुरेंद्र पाल सिंह): 13,272 वोट

बसपा की स्थिति

2019 में, बसपा के गिरीश चंद्र ने 56.31% वोट शेयर के साथ सीट जीती थी। 2024 में, बसपा का वोट शेयर काफी गिर गया, और उनके उम्मीदवार सुरेंद्र पाल सिंह को केवल 13,272 वोट मिले। यह एक बड़ी गिरावट है और दर्शाता है कि बसपा ने अपना बड़ा समर्थन खो दिया है।

भाजपा की स्थिति

2019 में, भाजपा ने 39.78% वोट शेयर के साथ दूसरे स्थान पर रही थी। 2024 में, भाजपा के ओम कुमार को 3,61,079 वोट मिले, जो कि 2019 के मुकाबले कम है, और वे भी दूसरे स्थान पर ही रहे। भाजपा ने अपनी कुछ वोट हिस्सेदारी खो दी है, लेकिन उन्होंने एक मजबूत प्रदर्शन बनाए रखा।

कांग्रेस और सपा की स्थिति

2019 में, कांग्रेस को मात्र 1.99% वोट मिले थे। 2024 में, कांग्रेस का प्रदर्शन का उल्लेख नहीं है, जबकि सपा को 1,02,374 वोट मिले, जो तीसरे स्थान पर रही।

सपा ने 2024 में कांग्रेस की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है, जो दर्शाता है कि सपा ने कांग्रेस के समर्थन को आंशिक रूप से अपने पक्ष में कर लिया है।

नोटा का प्रभाव

2019 में, नोटा को 0.65% वोट मिले थे। 2024 के परिणामों में नोटा का उल्लेख नहीं है, जिससे पता चलता है कि नोटा का प्रभाव इस बार कम हो सकता है या इसकी रिपोर्टिंग में कोई बदलाव आया हो सकता है।

आजाद समाज पार्टी का उदय

2024 में, आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर आजाद ने 5,12,552 वोट हासिल किए और बड़ी बढ़त के साथ जीत हासिल की। यह परिणाम दिखाता है कि एक नए दल ने पारंपरिक दलों को चुनौती दी और सफल रहा।

परिवर्तन

नगीना सीट पर 2019 और 2024 के बीच राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा परिवर्तन हुआ है। जहां 2019 में बसपा ने बड़ी जीत दर्ज की थी, 2024 में उन्होंने अपना अधिकांश समर्थन खो दिया।

नई ताकत का उदय

आजाद समाज पार्टी का उदय दर्शाता है कि स्थानीय मुद्दों और नए नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

भाजपा का निरंतर प्रदर्शन

भाजपा ने अपना वोट शेयर तो खोया है, लेकिन वे अभी भी एक मजबूत प्रतिस्पर्धी बने हुए हैं।

सपा का प्रदर्शन

सपा ने कांग्रेस के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया, जो उनके लिए एक सकारात्मक संकेत हो सकता है।

इस प्रकार, नगीना सीट का परिणाम उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों और चुनौतियों की ओर इशारा करता है।

2014 के चुनाव में नगीना सीट के परिणामों का विश्लेषण करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हमें पिछले चुनावों में हुए बदलाव और प्रवृत्तियों को समझने में मदद करता है। आइए 2014, 2019, और 2024 के चुनाव परिणामों की तुलना करें:

2014 के चुनाव परिणाम

भाजपा (यशवंत सिंह): 3,67,825 वोट (39.02%)

सपा (यशवीर सिंह): 2,75,435 वोट (29.22%)

बसपा (गिरीश चंद्र): 2,45,685 वोट (26.06%)

2019 के चुनाव परिणाम

बसपा (गिरीश चंद्र): 5,68,378 वोट (56.31%)

भाजपा (यशवंत सिंह): 4,01,546 वोट (39.78%)

कांग्रेस (ओमवती देवी): 20,046 वोट (1.99%)

नोटा: 6,528 वोट (0.65%)

2024 के चुनाव परिणाम

आजाद समाज पार्टी (चंद्रशेखर आजाद): 5,12,552 वोट

भाजपा (ओम कुमार): 3,61,079 वोट

सपा (मनोज कुमार): 1,02,374 वोट

बसपा (सुरेंद्र पाल सिंह): 13,272 वोट

इस प्रकार, नगीना सीट के परिणाम उत्तर प्रदेश की बदलती राजनीतिक स्थिति और विभिन्न दलों के समर्थन में आए उतार-चढ़ाव को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

samachar
Author: samachar

"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."