देवरिया

जान बचाकर दी जान ; कैप्टन अंशुमान सिंह को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित

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इरफान अली लारी की रिपोर्ट

पिछले शुक्रवार को राष्ट्रपति द्वारा सियाचिन ग्लेशियर में अपनी वीरता का प्रदर्शन कर भारतीय सेना के कई टेंटों में लगी आग पर काबू पाकर अपने साथियों को बचाने वाले बलिदानी कैप्टन अंशुमान सिंह को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित करने की घोषणा की गई थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में यह सम्मान शहीद की पत्नी सृष्टि सिंह और उनकी मां मंजू सिंह को सौंपा।

सियाचिन में हादसा

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19 जुलाई 2023 की सुबह सियाचिन ग्लेशियर में भारतीय सेना के कई टेंटों में अचानक आग लग गई। उस समय वहां रेजिमेंटल मेडिकल ऑफिसर के रूप में तैनात कैप्टन अंशुमान सिंह ने अपनी जान की परवाह किए बिना अपने साथियों को बचाने की कोशिश की और इसी प्रयास में वह शहीद हो गए। कैप्टन अंशुमान सिंह की शहादत के बाद 20 जुलाई की सुबह सेना की मेडिकल कोर और कमांड अस्पताल के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी उनके लखनऊ स्थित घर पहुंचे और उनके पिता रवि प्रताप सिंह को यह दुखद खबर दी। शहादत की खबर मिलते ही उनके परिवार और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई।

कैप्टन अंशुमान सिंह की पृष्ठभूमि

कैप्टन अंशुमान सिंह का जन्म देवरिया जिले के बरडीहा दलपत गांव में हुआ था। उन्होंने आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज, पुणे से MBBS किया और सेना की मेडिकल कोर में शामिल हो गए। अंशुमान की पत्नी सृष्टि सिंह पेशे से इंजीनियर हैं और नोएडा में एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करती हैं। अंशुमान सिंह के परिवार में उनके पिता रवि प्रताप सिंह, मां मंजू सिंह, बहन तान्या सिंह और भाई घनश्याम सिंह शामिल हैं। उनके पिता सेना में जूनियर कमीशंड ऑफिसर (JCO) थे। अंशुमान की बहन और भाई दोनों ही नोएडा में डॉक्टर हैं।

सियाचिन ग्लेशियर की भयानक रात

19 जुलाई 2023 की रात सियाचिन ग्लेशियर में भारतीय सेना के टेंटों में अचानक आग लग गई। उस समय वहां ड्यूटी पर मौजूद कैप्टन अंशुमान सिंह ने आग फैलते देख सो रहे अपने साथियों को बचाने के लिए जान की बाजी लगा दी। इस हादसे में वह शहीद हो गए। 

अंशुमान सिंह की शादी 10 फरवरी 2023 को हुई थी और वह शादी के पांच महीने बाद ही 15 दिन पहले सियाचिन गए थे। उनका बलिदान देश के लिए अत्यंत प्रेरणादायक है और उनकी वीरता को कीर्ति चक्र के माध्यम से सम्मानित किया गया है।

अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि

कैप्टन अंशुमान सिंह के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। उनके बलिदान को सलाम करने के लिए सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे। उनके परिवार और पूरे देश ने उनके इस वीरतापूर्ण कार्य के लिए उन्हें याद किया और उनकी शहादत को सलाम किया।

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"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."

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