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5 April 2025 3:01 am

नाटकीय अपहरण का ये अजीब वाकया आपको चौंका देगा

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दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट 

कानपुर : कानपुर की बर्रा पुलिस ने एक ऐसे फर्जी अपहरण का खुलासा किया है, जिसे जानकर आप सभी दंग रह जाएंगे, क्योंकि ये कहानी जरा फिल्मी है, इस नाटकीय अपहरण का मुख्य किरदार निभाने वाला कोई और नहीं बल्कि जिसका अपहरण हुआ वहीं छात्रा ही इस पूरी कहानी की सूत्रधार निकली, जिसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने ही फर्जी अपहरण की साजिश रच डाली और अपने पिता से इस अपहरण के लिए 10 लाख रुपए की फिरौती भी मांगी।

आपको बता दें कि दो दिन पहले कानपुर के बर्रा इलाके में रहने वाले नरेंद्र कुमार कि 21 वर्षीय बेटी हंसिका वर्मा कोचिंग के लिए घर से निकली थी, लेकिन जब वह काफी देर तक वापस नहीं लौटी तो उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने भी गुमशुदगी का मुकदमा दर्ज कर लिया, इस बीच पीड़ित पिता के मोबाइल पर एक वीडियो मैसेज आया जिसमें उनकी बेटी के अपहरण की बात कही गई और उनसे कहा गया कि जल्द से जल्द 10 लाख रुपए फिरौती के दें नहीं तो उनकी बेटी को जान से मार दिया जाएगा, वीडियो मैसेज के आने के बाद पुलिस और ज्यादा सक्रिय हो गई और छात्रा की खोज कानपुर और उसके आसपास के जिलों में भी जाने लगी। इस बीच छात्रा के मोबाइल लोकेशन के जरिए जानकारी हुई कि छात्रा की आखिरी लोकेशन बस्ती जिले में देखी गई है। इसके बाद पुलिस टीम ने बस्ती रेलवे स्टेशन से साजिशकर्ता छात्रा हंसिका वर्मा और उसके प्रेमी राज को गिरफ्तार कर कानपुर ले आयी।

पुलिसिया पूछताछ में छात्रा ने बताया कि सोशल मीडिया के जरिए साल 2019 में उसकी फ्रेंडशिप राज नाम के युवक के साथ हो गई थी। देखते ही देखते यह दोस्ती प्यार में बदल गयी, 4 साल तक चले इस अफेयर में पिछले महीने दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली, अपना फ्यूचर सिक्योर करने के उद्देश्य से आरोपी छात्र में अपने प्रेमी के साथ मिलकर खुद के अपहरण की साजिश रच डाली। इस बीच छात्रा ने यह भी बताया कि अभी तक उसने अपने प्रेमी पर डेढ़ से दो लाख रुपये भी खर्च कर चुकी है। फिलहाल इस मामले में पीड़ित पिता ने इस घटना की सूचना पुलिस को दी थी। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इस अपहरण का खुलासा करने के लिए पुलिस की 10 टीमें लगा दी और 2 दिन बाद पुलिस ने प्रेमी प्रेमिका को बस्ती रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया।

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Author: samachar

"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."