अजय विद्यार्थी की रिपोर्ट
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की तैयारियां अंतिम चरण में है। कोलकाता के विभिन्न पूजा पंडाल थीम आधारित पंडाल बना रहे हैं। कल महालया है और महालया के बाद से दस दिवसीय दुर्गा पूजा उत्सव की शुरुआत औपचारिक रूप से हो जाएगी। दक्षिण कोलकाता का प्रसिद्ध पूजा पंडाल पूजा चेतला अग्रणी थीम आधारित पूजा के लिए प्रसिद्ध है। चेतला अग्रणी ने इस साल केले के पत्तों और उसकी छाल से पूरा पूजा पंडाल का निर्माण किया है और पूरे पंडाल के निर्माण में इको-फ्रेंडली वस्तुओं का इस्तेमाल किया गया है। सीएम ममता बनर्जी रविवार महालया के दिन इस पूजा पंडाल में मां दुर्गा का चक्षु दान करेंगी। इस अवसर पर मंत्री बाबुल सुप्रियो और फिरहाद हकीम भी उपस्थित रहेंगे।
बता दें कि यूनेस्को ने कोलकाता की दुर्गा पूजा को सांस्कृतिक विरासत घोषित किया है। इस कारण इस साल दुर्गा पूजा भव्य तरीके से मनाया जा रहा है। यूनेस्को के प्रतिनिधि विभिन्न पूजा पंडालों का परिदर्शन कर रहे हैं। बता दें कि यह पूजा कमेटी मंत्री फिरहाद हकीम के संरक्षण में है।
केले के पत्तों और छाल से सजाया गया है पूजा पंडाल
चेलना अग्रणी की पूजा का इस साल 30 साल है। सोलह कला पूर्ण पंडाल का निर्माण किया जा रहा है। कलाकार सुब्रत बनर्जी द्वारा पंडाल बनाया जा रहा है। वह केले के पेड़ की छाल से रेशे निकालकर मंडप बना रहे हैं। उन्होंने दो सालों तक इस पर शोध किया है। पूरा मंडप केले के पेड़ के पत्तो और छाल से बनाया गया है।
पूजा कमेटी के सदस्य का कहना है कि केले का पेड़ बंगालियों के जीवन से जुड़ा है। किसी भी शुभ कार्य के लिए केले के पेड़ की आवश्यकता होती है। उपनयन संस्कार से लेकर किसी भी पूजा पाठ में केले के पत्तों का इस्तेमाल होता है। केला जीवन से बहुत ही जुड़ा हुआ है। मंडप में एक नदी दिखाई गई है। वह नदी मंडप के बाहर से शुरू होकर माता के चरणों में मिल जाती है। उस नदी के माध्यम से आशा और कामना को दर्शायी गई है।
पूजा कमेटी के पदाधिकारी का कहना है कि इस मंडप में बंगाल के शिल्प कला भी झलक दिखेगी। कुछ पशु-पक्षियों को रखा गया है। मयूर, बंदर, हनुमान आदि जीव-जंतु भी पंडाल को सुसज्जित किया गया है। सीएम ममता बनर्जी प्रत्येक साल इस पूजा पंडाल में मां दुर्गा का चक्षु दान करती हैं। सीएम ममता बनर्जी आज पूजा पंडाल में मां का चक्षु दान करेंगी। इसके साथ इस पूजा मंडप को यूनेस्को के 550 पूजा कमेटियों में शामिल किया गया है। यूनेस्को के प्रतिनिधियों ने पूजा पंडाल का परिदर्शन किया है और इसकी काफी सराहना की है। मंडप में दो साल के बाद दर्शकों का प्रवेश हो पाएगा। कोरोना के कारण दो सालों से मंडप में दर्शकों के प्रवेश पर रोक थी, लेकिन इस बार दर्शकों के लिए विशेष रैप बनाए गये हैं।

Author: samachar
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