चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
गोंडा। गर्मी की बेहिसाबी उमस के बीच बिजली से राहत की उम्मीद बेमानी साबित हो रही है। अघोषित बिजली कटौती से मुश्किल बढ़ी है। इसमें भी ओवरलोड ट्रांसफार्मर मुसीबत का सबब हैं। बीते 25 दिनों में 10 से 630 केवीए के 353 ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं। यानि हर दिन 14 ट्रांसफार्मर जल रहे हैं। इन्हें बदलवाने के लिए उपभोक्ताओं को मशक्कत करनी पड़ रही है। कई जगह चंदा लगाकर लोग उसे ठीक कराने के लिए कार्यशाला भेजते हैं। क्षमतावृद्धि को लेकर जिम्मेदार शिथिलता बरत रहे हैं।
ओवरलोड ट्रांसफार्मर की क्षमतावृद्धि को ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। गांव में वैसे ही आठ से दस घंटे बत्ती दी जा रही है। उसमें भी ट्रांसफार्मर जल जाने से दिक्कत होती है। विद्युत कार्यशाला खंड के अवर अभियंता विवेक कुमार ने कहा कि ट्रांसफार्मर जलने की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की जाती है।
बीते अप्रैल माह की 23 तारीख से 17 मई तक के बीच 10केवीए के 87, 16केवीए के 24, 25 केवीए के 165 ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं। इसी तरह से 63 केवीए के 20, 100केवीए के 21, 250केवीए के 16, 400केवीए के 18 व 630केवीए के दो ट्रांसफार्मर जले हैं। इनकी मरम्मत की मुख्यालय स्थित विद्युत कार्यशाला खंड में की जा रही है।
पावर कारपोरेशन ने नगर में 24 व ग्रामीण क्षेत्र में 48 घंटे में ट्रांसफार्मर बदलने का नियम है। शहर में स्थिति ठीक है। यहां पांच ट्रालियां हैं। इससे आपूर्ति बहाल हो जाती है लेकिन, गांव में आपूर्ति बहाल में चार से पांच दिन लगता है। यही नहीं, ग्रामीण चंदा लगाकर लाइन सही कराते हैं। पांच दिन बाद मिला ट्रांसफार्मर।
दुल्लापुर, धुसवा, झलिया कन्नूपुर गांव में ट्रांसफार्मर खराब है। यहां के लोगों ने शिकायत की लेकिन, उसे बदलने की जहमत नहीं उठाई गई। यहां के ग्रामीणों ने कहा कि चंदा लगाकर ट्रांसफार्मर ले जाएंगे। तभी उसकी मरम्मत हो पाएगी। आती जाती रही बिजली। (- प्रदर्शित चित्र सांकेतिक है)

Author: samachar
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