
संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
वार्ड नंबर 14 से चंद्र मोहन द्विवेदी की दावेदारी ने राजनीतिक हलचल मचा दी
चित्रकूट जिले के वार्ड नंबर 14 रैपुरा से जिला पंचायत सदस्य पद के लिए श्री चंद्र मोहन द्विवेदी ने अपनी दावेदारी पेश कर स्थानीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। वन विभाग में 37 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके श्री द्विवेदी न केवल एक ईमानदार अधिकारी रहे, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद वे सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रूप से जुड़ गए हैं। क्षेत्र के आम जनमानस में उनकी सादगी, व्यवहारिकता और जनसेवा की छवि ने उन्हें सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति व अति पिछड़े वर्ग में बेहद लोकप्रिय बना दिया है।
वन विभाग से समाज सेवा तक की प्रेरक यात्रा
चंद्र मोहन द्विवेदी ने अपने कार्यकाल में कोल आदिवासी समुदाय और गरीब मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने वन विभाग में रहते हुए लोगों को यह जानकारी दी कि उन्हें अपने हक हकूक के अंतर्गत जंगल से सूखी लकड़ी, गिरी पड़ी शाखाएँ आदि लेने का अधिकार है, जिससे वे अपने घरों की जरूरतें पूरी कर सकें। उनके प्रयासों से न केवल वन संरक्षण को बढ़ावा मिला बल्कि अवैध कटान पर भी रोक लगी।
द्विवेदी जी के सामाजिक प्रयासों ने ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने लोगों को समझाया कि वनों का दोहन नहीं, संरक्षण ही जीवन का आधार है। उनके मार्गदर्शन में कई गांवों में पर्यावरण संरक्षण समितियाँ बनीं, जिन्होंने वनों को बचाने का संकल्प लिया।
विवेकाधीन राहत कोष से दिलाई गरीबों को राहत
सेवानिवृत्ति के बाद चंद्र मोहन द्विवेदी ने समाज सेवा को ही अपना धर्म बना लिया। उन्होंने अपने क्षेत्र के गंभीर बीमार लोगों के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन राहत कोष से सहायता राशि स्वीकृत कराई। विशेष रूप से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को उन्होंने ₹5 लाख तक की मदद दिलाई, जिससे कई लोगों का जीवन बचा। उनके इस मानवीय कार्य की चर्चा आज भी चित्रकूट और आसपास के क्षेत्रों में होती है।
गरीब और पिछड़ों की आवाज बने चंद्र मोहन द्विवेदी
श्री द्विवेदी की पहचान एक ऐसे जनसेवक के रूप में हुई है जो बिना प्रचार के लोगों की मदद करते हैं। वे कहते हैं — “मुझे मीडिया में फोटो खिंचवाने का शौक नहीं, मेरा मकसद समाज की गहराइयों में जाकर सेवा करना है।” यही सादगी और समर्पण उन्हें लोगों के बीच विशेष बनाता है।
जब वे किसी गांव में जाते हैं, तो सैकड़ों लोग अपने-अपने समस्याओं को लेकर उनके पास आते हैं। चंद्र मोहन द्विवेदी हर व्यक्ति को ध्यान से सुनते हैं और समाधान के लिए प्रयास करते हैं। उनकी इसी जनसंपर्क शैली ने उन्हें वार्ड नंबर 14 के मतदाताओं के दिलों में जगह दिलाई है।
वार्ड नंबर 14 से चुनावी दावेदारी ने मचाई हलचल
अब जब उन्होंने पहली बार जिला पंचायत सदस्य के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा की है, तो पूरा क्षेत्र चर्चा में है। लोग उन्हें “ईमानदारी की पहचान” और “सच्चे जनसेवक” के रूप में देख रहे हैं। गांव-गांव में बैठकों के दौरान ग्रामीण कहते हैं — “आप हमारे असली प्रतिनिधि हैं, हम आपके साथ हैं।”
चंद्र मोहन द्विवेदी का चुनावी एजेंडा स्पष्ट है — “समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाना, भ्रष्टाचार और भेदभाव से मुक्त पंचायत बनाना।” उनका मानना है कि सच्चे जनप्रतिनिधि वही हैं जो बिना भेदभाव के हर वर्ग का उत्थान चाहते हैं।
पर्यावरण और जनहित के लिए समर्पित सोच
द्विवेदी जी हमेशा से पर्यावरण संरक्षण के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने जंगल बचाओ अभियान के जरिए लोगों को जागरूक किया और समझाया कि हर पेड़ एक जीवन है। उनके कार्यों के कारण क्षेत्र में आज भी वनों का विनाश रुका हुआ है और आदिवासी समुदायों में जागरूकता बढ़ी है।
जनता का मिल रहा भरपूर समर्थन
रैपुरा क्षेत्र के लोग आज भी उन्हें अपने सच्चे साथी के रूप में देखते हैं। चंद्र मोहन द्विवेदी के पक्ष में माहौल इतना मजबूत है कि उनकी सभाओं में सैकड़ों लोग स्वतः पहुंचते हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि वे जिला पंचायत सदस्य बनते हैं, तो निश्चित ही क्षेत्र में विकास की नई कहानी लिखी जाएगी।
समाज सेवा के साथ सरलता की मिसाल
श्री द्विवेदी का कहना है — “सेवा का मतलब केवल मंच पर भाषण देना नहीं, बल्कि हर पीड़ित के साथ खड़ा रहना है।” उन्होंने अपनी सेवाओं को कभी राजनीति से नहीं जोड़ा, लेकिन जनता की अपेक्षाओं ने उन्हें इस बार चुनाव मैदान में उतरने के लिए प्रेरित किया है।
2025 पंचायत चुनाव में नई उम्मीदें
आगामी पंचायत चुनाव 2025 में वार्ड नंबर 14 रैपुरा से चंद्र मोहन द्विवेदी का उतरना जनता के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है। उनकी लोकप्रियता, जनसेवा के प्रति निष्ठा और ईमानदारी उन्हें अन्य उम्मीदवारों से अलग करती है। क्षेत्र के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को लेकर उनका स्पष्ट विजन है।
उनका कहना है कि “हमारा लक्ष्य गांव को आत्मनिर्भर बनाना और युवाओं को रोजगार के अवसर देना है।” उनकी योजना में महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को सशक्त बनाना और गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाना प्रमुख बिंदु हैं।
समाज सेवा से राजनीति तक का सफर
चंद्र मोहन द्विवेदी की कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस सोच की है जो समाज को जोड़ने की बात करती है। उन्होंने जिस तरह से गरीबों, पिछड़ों और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा की, वह उन्हें सच्चा जननायक बनाता है। उनकी यह यात्रा बताती है कि जब नीयत साफ हो, तो सेवा ही सबसे बड़ी राजनीति बन जाती है।
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