
सुरेन्द्र मिन्हास की रिपोर्ट
बिलासपुर। कल्याण कला मंच बिलासपुर द्वारा आयोजित नियमित मासिक कविता संगोष्ठी इस बार ऋषिकेश के शांत वातावरण और गोविंद सागर की लहरों के किनारे संपन्न हुई। कार्यक्रम ने न केवल बिलासपुरी लोक संस्कृति का रंग बिखेरा, बल्कि इसने प्रदेश की साहित्यिक परंपरा को एक नई ऊर्जा प्रदान की। इस अवसर पर कल्याण कला मंच के प्रधान सुरेन्द्र मिन्हास कहलूरी की अध्यक्षता में कवियों और साहित्यकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गोविंद सागर की लहरों में झलकी साहित्यिक भावना
संगोष्ठी की शुरुआत महासचिव तृप्ता कौर मुसाफिर और बीना वर्धन के मनमोहक संचालन से हुई। उद्घाटन सत्र में कर्मवीर कंडेरा ने परिवार की महत्ता पर आधारित अपनी संवेदनशील कविता प्रस्तुत की। इसके बाद लश्करी राम ने ‘ब्लासपुरा रे लोक बड़े दयावान’ सुनाकर वहां उपस्थित दर्शकों के दिल जीत लिए। हास्य कवियत्री बीना वर्धन की प्रस्तुति ‘पचने पर ही आई गी ए दुनियां’ पर दर्शकों ने ठहाकों से स्वागत किया।
सुरेन्द्र मिन्हास की अध्यक्षता में चमकी बिलासपुरी संस्कृति
मुख्य मंच पर डॉ. लेख राम शर्मा, अमर नाथ धीमान, अछरी देवी, कुलदीप सिंह चंदेल और सुख राम आजाद सहित कई वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार उपस्थित रहे। कल्याण कला मंच बिलासपुर की यह मासिक संगोष्ठी अपनी साहित्यिक गरिमा और लोक संस्कृति की झलक के लिए जानी जाती है। इस बार भी मंच पर बिलासपुरी लोक गीतों और हिमाचली बोली की गूंज सुनाई दी।
युवा कवियों और गीतकारों ने बिखेरी रचनात्मक चमक
युवा गायक श्याम सुंदर सहगल ने ‘शिव कैलाशो रे वासी धौला धारों रे राजा’ गीत गाकर माहौल को भक्ति भाव से सराबोर किया। कविश्रेष्ठ चंद्रशेखर पंत ने मंच की खुली सोच को सलाम करते हुए कहा— “खुले द्वार हैं कला मंच के, सबका अभिनंदन करते हैं।”
इस अवसर पर हुसैन अली ने ग़ज़ल प्रस्तुत की — “मुहब्बत के नशे में आकर उसे खुदा बना डाला”, जिसने श्रोताओं को रोमांचित कर दिया। शिवनाथ सहगल ने पूछा— “दुनियां बनाने वाले, क्या तेरे मन में समाई?” जबकि तृप्ता कौर मुसाफिर ने गुरु तेग बहादुर की शिक्षाओं को नमन करते हुए काव्य पाठ किया।
स्थानीय प्रतिभाओं की शानदार प्रस्तुतियाँ
कुलदीप सिंह चंदेल ने ‘लक्ष्मी नारायण आन विराजे’ के माध्यम से धार्मिक आस्था को स्वर दिया। सुख राम आजाद ने शेरो-शायरी की बहार लगाई और छात्रा आशा कुमारी ने अपनी बाल्यावस्था से जुड़ी कविता से सभी को भावुक कर दिया।
बाबू राम धीमान ने पहाड़ी बोली में कहा— “सयाने यां रा गलाना बुरा नीं मनाना”, जो दर्शकों को खूब पसंद आई। वहीं अमर नाथ धीमान ने आज के बदलते समाज पर चिंतन करते हुए कहा— “अज्ज लोक्को बदली गया इंसान।” अछरी देवी ने कल्याण कला मंच के प्रयासों की सराहना की और इसे बिलासपुर की सांस्कृतिक धरोहर बताया।
साहित्य की नाव को आगे बढ़ाने का संकल्प
अंत में प्रधान सुरेन्द्र मिन्हास कहलूरी ने कहा— “पकड़ कर चप्पू, कश्ती को दौड़ा दें, मुकाबले में हम सब जोर लगाएं।” उन्होंने बताया कि कल्याण कला मंच बिलासपुर आने वाले समय में युवा कवियों को और भी अधिक अवसर देगा ताकि हिमाचली कला और संस्कृति की यह धारा लगातार बहती रहे।
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. लेख राम शर्मा ने पहाड़ी कविता ‘दादे रा किरडू बाबे जो त्यार’ सुनाकर दर्शकों की वाहवाही लूटी। सभी प्रतिभागियों ने बिलासपुरी धाम का आनंद लिया और अंत में बाबू राम धीमान ने सभी का आभार व्यक्त किया।
इस प्रकार कल्याण कला मंच बिलासपुर की यह संगोष्ठी न केवल एक साहित्यिक पर्व सिद्ध हुई बल्कि इसने प्रदेश के लोक गीतों, कविताओं और संस्कृति को नई दिशा दी।
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