
संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
चित्रकूट ट्रेजरी घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस चर्चित
43 करोड़ रुपये के ट्रेजरी घोटाले से जुड़े पेंशनर्स को बड़ी राहत दी है। अदालत ने
कृष्ण किशोर त्रिपाठी समेत अन्य पेंशनर्स की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए
सरकार से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है।
यह आदेश न केवल चित्रकूट ट्रेजरी घोटाले में फंसे निर्दोष पेंशनर्स के लिए राहत है,
बल्कि न्यायपालिका के प्रति विश्वास को भी मजबूत करता है।
पेंशनर कृष्ण किशोर त्रिपाठी को मिली बड़ी राहत
इस मामले में सबसे अधिक चर्चा में रहे पेंशनर कृष्ण किशोर त्रिपाठी, जिनकी पैरवी
युवा अधिवक्ता क्रांति किरण पांडेय ने जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और
जस्टिस अचल सचदेव की डिवीजन बेंच के समक्ष की।
पांडेय ने अदालत में यह तर्क दिया कि एफआईआर घटना के सात से आठ वर्ष बाद दर्ज की गई,
जबकि ट्रेजरी विभाग की ऑडिट टीम हर वर्ष जांच करती रही है।
उन्होंने बताया कि याची के खाते में गलती से धनराशि भेजी गई थी,
जिसका विरोध उन्होंने स्वयं किया और पूरी रकम स्वेच्छा से वापस जमा कर दी।
अदालत ने सरकार से मांगी जांच रिपोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी वकील से मामले की जांच आख्या तलब की
और अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
यह आदेश स्पष्ट करता है कि अदालत ने भ्रष्टाचार की आड़ में फंसे निर्दोष पेंशनर्स की
स्थिति को गंभीरता से लिया है। अदालत ने यह माना कि
चित्रकूट ट्रेजरी घोटाले में शामिल सभी लोगों को एक समान नहीं माना जा सकता।
कई ऐसे लोग हैं जो केवल प्रशासनिक चूक या तकनीकी त्रुटियों के कारण फंसे हुए हैं।
क्या है ४३ करोड़ का चित्रकूट ट्रेजरी घोटाला?
चित्रकूट ट्रेजरी घोटाला वर्ष 2015-16 के दौरान सामने आया था।
इसमें ट्रेजरी विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर सरकारी धन के
दुरुपयोग और फर्जी भुगतान के आरोप लगे थे।
जांच में यह सामने आया कि लगभग ४३ करोड़ रुपये की धनराशि विभिन्न खातों में गलत तरीके से
ट्रांसफर की गई। कई मामलों में यह रकम गलती से कुछ पेंशनर्स के खातों में भी चली गई,
जिन्होंने बाद में उसे वापस कर दिया।
इसके बावजूद उन्हें भी भ्रष्टाचार के आरोपों में शामिल कर लिया गया।
अवधेश प्रताप सिंह, सरला देवी और अन्य पेंशनर्स के नाम भी शामिल
इस प्रकरण में अवधेश प्रताप सिंह, मोहनिया, सरला देवी,
अमित कुमार मिश्रा, अजय कुमार और
कृष्ण किशोर त्रिपाठी जैसे नाम प्रमुखता से उभरे हैं।
इन सभी ने अदालत से राहत की गुहार लगाई थी।
हाईकोर्ट ने सभी मामलों पर सुनवाई करते हुए न्यायिक संतुलन बनाए रखा
और निर्दोष लोगों को तत्काल राहत देने के संकेत दिए।
भ्रष्टाचार की आड़ में निर्दोष पेंशनर्स की दुश्वारियां
ट्रेजरी घोटाला में फंसने वाले कई पेंशनर्स ऐसे हैं जिन्होंने पूरी उम्र
ईमानदारी से सेवा की, लेकिन भ्रष्टाचार के जाल में उलझ गए।
पेंशनर्स का कहना है कि वे खुद इस घटना के शिकार हैं,
क्योंकि उन्होंने न तो कोई गलत लाभ उठाया और न ही किसी प्रकार का षड्यंत्र किया।
इस पूरे मामले में यह बात महत्वपूर्ण है कि अगर किसी ने रकम गलती से पाई
और उसे स्वेच्छा से वापस कर दिया, तो उसे अपराधी नहीं ठहराया जा सकता।
हाईकोर्ट का रुख न्यायप्रिय और संतुलित
इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर यह साबित किया कि
न्यायपालिका समाज के कमजोर और निर्दोष वर्ग के साथ है।
चित्रकूट ट्रेजरी घोटाले में मिली यह राहत
पेंशनर्स के लिए एक न्यायिक विजय है।
अदालत ने सरकार से कहा है कि वह पूरी पारदर्शिता के साथ जांच कराए
और जो लोग निर्दोष हैं, उन्हें जल्द से जल्द राहत दे।
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जांच में पाया गया कि कुछ रकम पेंशनर्स के खातों में भी गलती से चली गई।



