अपराध

तहस नहस हालत था घर का और महज आधी शीशी तेल ने खोल दिया हत्या का राज… 

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दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट

ईस्ट दिल्ली के मंडावली इलाके में रहने वाले सुमित ऑफिस का काम निपटाकर देर रात जब घर पहुंचे, तो अंदर का हाल देखकर उनकी सांसें अटक गईं। 

फर्श पर उनकी 62 साल की मां की अधजली लाश पड़ी थी। सुमित ने तुरंत अपनी पत्नी को आवाज दी, लेकिन उसने बताया कि वो ऊपर के कमरे में थी और उसे किसी तरह की कोई आवाज सुनाई नहीं दी। सुमित को लगा कि शायद किसी हादसे की वजह से या चोरी करने आए चोर ने उसकी मां की जान ली है। 

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सुमित ने तुरंत पीसीआर को कॉल किया और मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस पहुंची तो शुरुआत में उसे भी मौत के पीछे सुमित जैसा कारण ही नजर आया, लेकिन तभी कुछ ऐसा दिखा, जिसने हर किसी को हैरान करके रख दिया।

फॉरेंसिंक विभाग की टीम भी मौके पर पहुंच गई और सबूत की तलाश में घर के कोने-कोने को तलाशा जा रहा था। 

पुलिस को यकीन था कि अगर ये हत्या है, तो कातिल ने कोई ना कोई सुराग जरूर छोड़ा होगा। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बीच घर के लोगों से भी पूछताछ शुरू हुई और तभी एक पुलिसकर्मी को महिला की लाश से सरसों के तेल की तेज गंध आई। पुलिस तुरंत घर की रसोई में पहुंची तो देखा कि वहां ढक्कन खुली तेल की आधी खाली बोतल रखी है। 

रसोई में इसके अलावा सारा सामान ठीक से रखा था और कुछ भी इधर-उधर गलत नजर नहीं आया। अब पुलिस को शक हुआ कि मर्डर की इस वारदात को घर के अंदर के ही किसी शख्स ने अंजाम दिया है।

सास-बहू में अक्सर होता था झगड़ा

पुलिस के शक के सुई अब सुमित की पत्नी कंचन की तरफ घूमी और जब सख्ती से उससे पूछताछ की गई, तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। कंचन ने ये भी बताया कि आखिर अपनी सास की जान उसने क्यों ली? 

पुलिस के मुताबिक, 62 वर्षीय स्वर्णा कपूर मंडावली इलाके में अपने बेटे सुमित, बहू कंचन और तीन पोते-पोतियों के साथ रहती थी। कंचन के रिश्ते अपनी सास के साथ सही नहीं थे और अक्सर दोनों के बीच झगड़ा होता रहता था। वो 26 सितंबर 2017 का दिन था, जब कंचन अपने रोते हुए पांच साल के बच्चे को चुप करा रही थी और जब वो चुप नहीं हुआ तो उसने उसे थप्पड़ मार दिया। बच्चे के रोने की आवाज सुनकर स्वर्णा आईं और थप्पड़ मारने को लेकर कंचन पर गुस्सा करने लगीं।

पहले सिर पर छड़ी मारी और फिर आग लगा दी

इसके बाद स्वर्णा और कंचन के बीच बहस तेज हो गई और दोनों एक-दूसरे को गालियां देने लगीं। बात इतनी बढ़ गई कि कंचन ने स्वर्णा की छड़ी छीनी और उनके सिर पर दे मारी। स्वर्णा के सिर से खून बहने लगा और वो बेहोश होकर नीचे गिर गईं। अब कंचन को लगा कि सुमित जब घर आएगा, तो उसकी सास उसे सबकुछ बता देगी, इसलिए उसने स्वर्णा की बॉडी को जलाने का फैसला लिया। 

कंचन घर में केरोसीन या पेट्रोल तलाशने लगी, लेकिन उसे इनमें से कुछ नहीं मिला। इसके बाद वो रसोई में गई और वहां उसकी नजर सरसों के तेल की बोतल पर गई। कंचन ने बोतल उठाई और स्वर्णा के ऊपर तेल डालकर आग लगा दी। इसके बाद वो अपनी सास को उसी हाल में छोड़कर ऊपर अपने कमरे में चली गई। हालांकि, स्वर्णा की बॉडी पूरी तरह से नहीं जल पाई।

सवालों के घेरे में था कंचन का बयान

पुलिस ने जब कंचन से पूछताछ की, तो शुरू में उसने कहा कि उसे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उसने बताया कि वो ऊपर बच्चों के साथ थी और उसे नीचे से किसी तरह का कोई शोर भी सुनाई नहीं दिया। हालांकि, पुलिस अधिकारियों को कंचन के बयान पर शुरू से ही शक था। 

किचन के हालात और तेल की आधी खाली बोतल मिलने के बाद जब पुलिस ने उससे पूछताछ की तो कंचन का झूठ ज्यादा देर तक नहीं छिप पाया और अब वो जेल की सलाखों के पीछे है। उस समय के डीसीपी (ईस्ट) ओमवीर सिंह बिश्नोई ने बताया कि पुलिस ने आठ घंटे के भीतर इस केस का खुलासा कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

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"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."

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