समापन दिवस पर शिक्षा की नई सोच
भाटपार रानी क्षेत्र के बीआरसी परिसर में आयोजित तीन दिवसीय “आउट ऑफ स्कूल” बच्चों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन दिवस केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति एक नई सोच और जिम्मेदारी का प्रतीक बनकर सामने आया। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों, शिक्षकों और अकादमिक संसाधन व्यक्तियों ने मिलकर यह स्पष्ट संदेश दिया कि हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना केवल नीति नहीं, बल्कि नैतिक दायित्व भी है।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए बीईओ भाटपार रानी संजीव कुमार सिंह ने कहा कि जो बच्चे किसी कारणवश विद्यालय से दूर रह जाते हैं, उन्हें मुख्यधारा में लाना प्रत्येक शिक्षक का कर्तव्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को सभ्य और सशक्त बनाने का आधार है।
शिक्षक की भूमिका: जिम्मेदारी से आगे एक मिशन
प्राथमिक शिक्षक संघ भाटपार रानी के मंत्री अजय सिंह ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आउट ऑफ स्कूल बच्चों को पुनः शिक्षा से जोड़ना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। उन्होंने बताया कि उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) के माध्यम से इन बच्चों को धीरे-धीरे अन्य बच्चों के समकक्ष लाया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक केवल पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि समाज का मार्गदर्शक होता है। यदि शिक्षक संकल्प ले लें, तो कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा।
अशिक्षा बनाम सभ्य समाज
एआरपी रशीद अहमद ने प्रशिक्षण के दौरान शिक्षा के सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अशिक्षा किसी भी समाज को पिछड़ेपन की ओर ले जाती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक शिक्षित समाज ही प्रगतिशील और सभ्य समाज की पहचान होता है।
उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित न रहें, बल्कि हर बच्चे के भीतर सीखने की इच्छा को जागृत करें।
विषयवार शिक्षण की रोचक विधियां
प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न विषयों को रोचक और प्रभावी बनाने के तरीकों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। एआरपी धर्मेन्द्र कुमार ने विज्ञान विषय को सरल और आकर्षक बनाने के लिए विभिन्न गतिविधि आधारित शिक्षण विधियों का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि यदि विज्ञान को प्रयोग और उदाहरणों के माध्यम से पढ़ाया जाए, तो बच्चों में जिज्ञासा और समझ दोनों बढ़ती है।
वहीं, एआरपी मुकेश मिश्र ने हिन्दी विषय के व्याकरण पक्ष को सहज और स्पष्ट तरीके से समझाने के उपाय साझा किए। उन्होंने कहा कि भाषा की मजबूत नींव बच्चों के सम्पूर्ण व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक है।
एआरपी सत्येन्द्र शर्मा ने भारतीय संविधान और भूगोल के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि इन विषयों के माध्यम से बच्चों में देश, समाज और पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित होती है।
प्रशिक्षण में व्यापक सहभागिता
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाटपार रानी क्षेत्र के सभी प्रधानाध्यापक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। शिक्षकों ने न केवल प्रशिक्षण को गंभीरता से सुना, बल्कि अपने अनुभवों को भी साझा किया।
मुख्य रूप से संतोष कुमार, गौरव पाण्डेय, ब्रजेश पांडेय, आशुतोष गुप्ता, रामनक्षत्र यादव, यशवन्त, रमेश यादव, विनोद जायसवाल, राम निवास यादव सहित अनेक शिक्षकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सार्थक बनाया।
एक संकल्प, जो बदलाव लाएगा
तीन दिनों तक चले इस प्रशिक्षण का सार यही रहा कि शिक्षा केवल अधिकार नहीं, बल्कि समाज के भविष्य की नींव है। हर वह बच्चा जो स्कूल से दूर है, वह एक अधूरी कहानी है, जिसे पूरा करना शिक्षकों और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
समापन दिवस पर यह स्पष्ट रूप से महसूस किया गया कि यदि शिक्षक अपने दायित्व को मिशन के रूप में अपनाएं, तो कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा।
यह प्रशिक्षण केवल जानकारी देने का माध्यम नहीं था, बल्कि एक ऐसा मंच था जहां से शिक्षा के प्रति संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता का नया अध्याय शुरू हुआ।
❓ आउट ऑफ स्कूल बच्चों का क्या अर्थ है?
वे बच्चे जो किसी कारणवश विद्यालय में नामांकित नहीं हैं या नियमित रूप से विद्यालय नहीं जाते, उन्हें आउट ऑफ स्कूल बच्चे कहा जाता है।
❓ इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य आउट ऑफ स्कूल बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के लिए शिक्षकों को प्रभावी रणनीतियों से प्रशिक्षित करना था।
❓ शिक्षक इस अभियान में कैसे योगदान दे सकते हैं?
शिक्षक बच्चों की पहचान कर, उनके लिए विशेष शिक्षण विधियां अपनाकर और अभिभावकों से संवाद स्थापित कर उन्हें विद्यालय से जोड़ सकते हैं।




I appreciate how the post emphasizes hands-on learning for kids outside the classroom. It’s a great reminder that education doesn’t have to be traditional to be effective.