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4 April 2025 2:58 pm

‘मठ- मस्जिद नहीं, प्यार चाहिए, ना हिंदू चाहिए ना मुसलमान चाहिए’ ; ऐसा हत्याकांड, जिससे यूपी की राजनीति में आ गया था भूचाल

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सर्वेश द्विवेदी की खास रिपोर्ट 

जीवन का लक्ष्य निर्धारित होना अच्छी बात है,क्योंकि बिना लक्ष्य के जीवन बेकार हो जाता है। इसलिए महत्वाकांक्षी होना अच्छी बात है, लेकिन बहुत अधिक महत्वाकांक्षी हो जाना अच्छी बात नहीं है। ‘लव किल्स- मधुमती शुक्ला हत्याकांड’ की डॉक्यूमेंट्री को समझने के लिए इतना काफी ही है। यह  9 फरवरी 2023 से डिस्कवरी प्लस पर स्ट्रीम हो रही है। इस डॉक्यूमेंट्री की शुरुआत जांच अधिकारियों के निजी अनुभवों और अमरमणि त्रिपाठी के परिवार और मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला से बातचीत के आधार पर आगे बढ़ती है।

साल 2003 के आसपास उत्तर प्रदेश में ऐसा माहौल था कि बड़े बड़े उद्योगपतियों का फिरौती के लिए अपहरण होने लगा था। लोगों के अंदर असुरक्षा की भावना हो गई और जनता सड़क पर उतर आई। इसी दौरान लखनऊ में मुहर्रम का त्योहार शुरू हो गया, जो पुलिस महकमे के लिए किसी सिर दर्द से कम नहीं था। वर्षों से सिया और सुन्नी समुदाय के लोग इस त्योहार पर एक दूसरे से भिड़ते नजर आ रहे थे। इस बार ऐसी कोई घटना ना हो, इसलिए पुलिस टीम पूरी तरह से सतर्क थी, तभी निषाद गंज थाने से कंट्रोल रूम में फोन आता है कि पेपर मिल कालोनी में किसी महिला की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पहले पुलिस को लगा कि लूट का मामला होगा,लेकिन जैसे ही तहकीकात आगे बढ़ी, एक से बढ़कर एक खुलासे होने लगे और उत्तर प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया।

हत्या जिस महिला की हुई थी वह कोई साधारण महिला नहीं,बल्कि एक मशहूर कवयित्री मधुमिता शुक्ला थी। राजनीतिक महकमे में मधुमिता शुक्ला की अच्छी पैठ थी। इस हत्या में शामिल जिस व्यक्ति का नाम आया वह और भी चौकाने वाला था। वह नाम था अमरमणि त्रिपाठी का। अमरमणि त्रिपाठी का उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐसा दबदबा रहा है कि सरकार किसी भी पार्टी की हो, कैबिनेट में उनकी जगह पक्की थी। मधुमिता शुक्ला की हत्या के आरोप में अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी गोरखपुर की जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। लेकिन पूरी डॉक्यूमेंट्री इस बात पर केंद्रित है कि कहीं ना कहीं जांच में कोई एक कड़ी बाकी रह गई है। मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला का मानना है कि अभी भी उनकी बहन को सही तरीके से न्याय नहीं मिला है, क्योंकि अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी गोरखपुर जेल के बजाय बीमारी का बहाना बनाकर गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज से राजनीति कर रहे हैं। वहीं अमरमणि त्रिपाठी की बेटी तनुश्री और अलंकृता त्रिपाठी का मानना है कि राजनीतिक द्वेष के चलते उनके पिता को फंसाया गया है।

अब सवाल यह उठता है कि मधुमिता शुक्ला के पेट में जो बच्चा था वह आखिर किसका था? डीएनए जांच में पता चला था कि बच्चा अमरमणि त्रिपाठी का है। इतना ही नहीं, इससे पहले भी मधुमिता शुक्ला दो बार अबॉर्शन करा चुकी थीं और वह अमरमणि त्रिपाठी पर शादी का दबाव डाल रही थीं। यह बात अमरमणि की पत्नी मधुमणि त्रिपाठी को नागवार गुजरी और उन्होंने हत्या की साजिश रची। अमरमणि त्रिपाठी के साथ मधुमिता शुक्ला के रिश्तों के बारे में उनके परिवार वालों को भी पता था। ऐसे में उन्होंने कई बार मधुमिता को समझाने की कोशिश की,लेकिन अपनी महत्वाकांक्षा के चलते उन्होंने किसी की नहीं सुनी।

जब राम जन्मभूमि का मुद्दा चल रहा था, तब मधुमिता शुक्ला ने पहली बार अपने गृह नगर लखीमपुर खीरी में मंच पर वीर रस की कविता का पाठ ‘मठ- मस्जिद नहीं, प्यार चाहिए, ना हिंदू चाहिए ना मुसलमान चाहिए’, किया था, तब वह मात्र 12 साल की थीं। उन दिनों वह सम सामयिक विषयों पर कविता पाठ करती थीं और देखते ही देखते देश के कोने कोने तक मशहूर हो गईं। इसी बीच उनकी मुलाकात अमरमणि त्रिपाठी से हुई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और बात जब शादी तक पहुंची तो यह अमरमणि त्रिपाठी की पत्नी को नागवार गुजरी। इस वजह से उन्होंने मधुमिता शुक्ला की हत्या की साजिश रची। 

‘लव किल्स -मधुमिता शुक्ला हत्याकांड’ की डॉक्यूमेंट्री में जांच कर रहे अधिकारियों से इस बात का भी खुलासा हुआ है कि उन्हें टास्क मिला है कि किसी भी तरह से अमरमणि त्रिपाठी को बर्बाद करना है। वहीं, मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला का दावा है कि अमरमणि त्रिपाठी ही, इस हत्या में शामिल हैं। उनकी वजह से पूरा परिवार बिखर गया और कोर्ट कचहरी के चक्कर में उनका सामान्य जीवन बर्बाद हो गया है। आज भी उन्होंने अपनी दीदी के कुर्ते और जैकेट को संभाल कर रखा है और उनकी महक को महसूस करती हैं।

आम तौर पर डॉक्यूमेंट्री फिल्में रोचक नहीं होती हैं और इसको देखने वालो का एक अलग ही दर्शक वर्ग होता है। लेकिन पांच एपिसोड की बनी ‘लव किल्स- मधुमिता शुक्ला हत्याकांड’ पहले एपिसोड से लेकर पांचवें एपिसोड तक दर्शको को बांधे रखती है। जैसे-जैसे जांच अधिकारियों के फर्स्ट पर्सन नैरेटिव से कहानी आगे बढ़ती है,रोमांच बना रहता है। इस सीरीज में पूर्व पुलिस अधीक्षक (क्राइम) राजेश पांडे,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनिल अग्रवाल,पूर्व जांच अधिकारी अजय चतुर्वेदी,सरकारी वकील राज मोहन राम, वरिष्ठ पत्रकार अमिता वर्मा व अन्य लोगों ने मधुमिता शुक्ला हत्याकांड से जुड़े अपने-अपने अनुभव शेयर किए हैं। इस सीरीज की शूटिंग ज्यादातर वास्तविक लोकेशन पर हुई है। जांच अधिकारियों की बात को ओरिजनल फुटेज के जरिए समझाने की कोशिश की गई है। ऐसी डॉक्यूमेंट्री फिल्मों में बहुत बड़ी जिम्मेदारी लेखक और रिसर्च टीम की होती है। जो इस सीरीज में नजर आती है।

samachar
Author: samachar

"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."