
चुनावी साल में यूपी बजट की प्राथमिकताएं इस बार केवल आंकड़ों और योजनाओं तक सीमित नहीं रहने वाली हैं, बल्कि इसके जरिए प्रदेश सरकार 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक स्पष्ट राजनीतिक-प्रशासनिक संदेश भी देने की तैयारी में है। बुधवार को पेश होने वाले इस बजट का आकार करीब 9 से 9.5 लाख करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है, जिसमें निवेश, रोजगार, बुनियादी ढांचा और जनकल्याणकारी योजनाओं पर विशेष जोर दिखाई देगा। माना जा रहा है कि यह बजट प्रदेश के विकास एजेंडे के साथ-साथ चुनावी संतुलन साधने की कोशिश भी करेगा।
चुनाव से पहले आखिरी पूर्ण बजट में सरकार का फोकस सिर्फ योजनाओं पर नहीं, बल्कि उन वर्गों पर होगा जिनकी सीधी भागीदारी वोटिंग ट्रेंड को प्रभावित करती है।
आखिरी पूर्ण बजट, इसलिए खास
वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पेश होने वाला यह आखिरी पूर्ण बजट कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है। सरकार के सामने एक ओर विकास की निरंतरता बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी ओर उन क्षेत्रों और वर्गों को साधने की जिम्मेदारी भी है, जो अब तक खुद को हाशिये पर महसूस करते रहे हैं। यही कारण है कि इस बजट में क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने की रणनीति साफ तौर पर झलक सकती है।
पूर्वांचल और बुंदेलखंड पर विशेष फोकस
चुनावी साल में यूपी बजट की प्राथमिकताओं का केंद्र इस बार पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे अपेक्षाकृत पिछड़े क्षेत्र हो सकते हैं। अनुमान है कि पूर्वांचल और बुंदेलखंड विकास निधि के लिए करीब 1900 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जा सकता है, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में लगभग 700 करोड़ रुपये अधिक होगा। इस राशि से इन दोनों क्षेत्रों के 37 पिछड़े जिलों में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण को मिल सकता है बड़ा पैकेज
बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीड़ा) के लिए बजट में मोटे पैकेज की संभावना जताई जा रही है। बीड़ा क्षेत्र में कुल 56 हजार एकड़ भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है, जिसमें से अभी 23 हजार एकड़ से अधिक भूमि का अधिग्रहण शेष है। इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए बजट में अलग से प्रावधान किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि औद्योगिक निवेश बढ़ने से न केवल क्षेत्रीय असंतुलन कम होगा, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
एक्सप्रेसवे और कनेक्टिविटी पर जोर
इंफ्रास्ट्रक्चर बजट का करीब एक-चौथाई हिस्सा रहने की संभावना है। नए एक्सप्रेसवे के लिए 1000 करोड़ रुपये से अधिक की व्यवस्था की जा सकती है। लखनऊ-आगरा और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़ने के लिए धनराशि आवंटित हो सकती है। इसके अलावा जेवर एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए लिंक एक्सप्रेसवे, साथ ही चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के लिए भी बजट में प्रावधान होने की उम्मीद है।
पेंशन बढ़ने की प्रबल संभावना
जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत निराश्रित महिलाओं और वृद्धजनों के लिए पेंशन राशि में 500 रुपये की वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। चुनावी साल में यूपी बजट की प्राथमिकताओं में यह फैसला सामाजिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है। इसके अलावा स्वयं सहायता समूहों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और केंद्र सरकार की ‘शी-मार्ट’ योजना को भी बजट में जगह मिल सकती है।
शिक्षा मित्र और छात्राओं के लिए राहत
सरकार इस बजट में मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने के अपने संकल्प को पूरा कर सकती है। वहीं प्रदेश के 1.43 लाख शिक्षा मित्रों के मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी का रास्ता भी साफ हो सकता है। मौजूदा 10 हजार रुपये के मानदेय को बढ़ाकर 17 से 20 हजार रुपये करने की योजना पर विचार किया जा रहा है, जिसके लिए 250 से 275 करोड़ रुपये का प्रावधान संभव है।
सड़क, मेट्रो और गृह विभाग को तवज्जो
सड़कों के सुधार और विस्तार के लिए 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट तय किया जा सकता है। साइबर अपराध पर अंकुश लगाने सहित गृह विभाग के लिए करीब 48 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान संभावित है। परिवहन सेवाओं को सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए 4700 करोड़ रुपये, जबकि हवाई अड्डों और जलमार्ग विकास के लिए लगभग 2500 करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं।
शिक्षा, शहरी विकास और खेलों पर निवेश
बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के लिए 1.10 लाख करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन संभावित है। शहरी अवस्थापना और मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के लिए 12 हजार करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं। मेट्रो परियोजनाओं के लिए 700 करोड़ रुपये और खेलों के प्रोत्साहन के लिए 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जा सकता है। आगरा, मीरजापुर, देवीपाटन, झांसी, मुरादाबाद, अयोध्या, बरेली और अलीगढ़ में स्पोर्ट्स कॉलेज खोलने के लिए सरकार 25 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दे सकती है।






