घाघरा नदी पर संजय सेतु की जर्जर स्थिति: लापरवाही या इंतजार का नतीजा?

घाघरा नदी पर बने संजय सेतु की मरम्मत की मांग को लेकर स्थानीय लोगों का प्रदर्शन
✍️चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
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घाघरा नदी पर संजय सेतु की जर्जर स्थिति अब केवल तकनीकी चिंता नहीं रह गई है, बल्कि यह लाखों लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही और जीवन से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी है। बहराइच, गोण्डा, बलरामपुर, श्रावस्ती और नेपालगंज को लखनऊ से जोड़ने वाला यह अहम सेतु कई स्थानों से कमजोर हो चुका है। पुल की ऊपरी सतह पर बने गहरे गड्ढे और अंदरूनी संरचना में आई खराबी किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

जब पुल जीवन रेखा हो और वही जर्जर हो जाए, तब सवाल सिर्फ मरम्मत का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी का भी बन जाता है।

तकनीकी रूप से कमजोर हो चुका है संजय सेतु

स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों के अनुसार संजय सेतु के पिलरों और ऊपरी छत के बीच लगी वे पट्टियां, जो शॉकर का काम करती हैं और पुल के डेक पर पड़ने वाले भार को संतुलित रखती हैं, कई जगह जाम हो चुकी हैं। इसका सीधा असर पुल की मजबूती पर पड़ रहा है। ऊपर से पुल की सतह पर बने बड़े-बड़े गड्ढे वाहन चालकों के लिए खतरे की घंटी बन चुके हैं, खासकर रात के समय और बारिश के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है।

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जनप्रतिनिधियों ने उठाई मरम्मत और पुनर्निर्माण की मांग

पुल की दयनीय हालत को देखते हुए प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री बृजेश सिंह ने दिसंबर 2025 में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर संजय सेतु की मरम्मत, पुनर्निर्माण और सेतु विस्तार की मांग की थी। इसके अलावा अपना दल के राष्ट्रीय सचिव संजीव सिंह राठौर ने भी बहराइच से लेकर विधानसभा तक इस मुद्दे को लगातार उठाया है।

रोजाना 40–50 हजार लोग करते हैं सफर

लोक निर्माण मंत्री बृजेश सिंह के अनुसार प्रतिदिन लगभग 40 से 50 हजार लोग इस पुल से गुजरते हैं। अधिक यातायात के कारण अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है, जिसे खुलवाने में पुलिस को घंटों मशक्कत करनी पड़ती है। इस दौरान एंबुलेंस और मरीजों को ले जा रहे वाहन भी फंस जाते हैं, जिससे समय पर इलाज नहीं मिल पाता। मंत्री ने यहां तक कहा कि यदि पुल पर जाम के कारण किसी मरीज की मौत होती है, तो इसे भी हत्या की श्रेणी में गिना जाना चाहिए।

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सांसद ने भी रखा नया पुल बनाने का प्रस्ताव

बहराइच के सांसद आनंद गौड़ ने भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष संजय सेतु की मरम्मत के साथ-साथ नए पुल के निर्माण की मांग रखी है। इन लगातार उठती आवाजों के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है और मरम्मत की संभावनाएं मजबूत होती दिख रही हैं।

पहले बनेगा पोंटून ब्रिज

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल प्रसाद वर्मा के अनुसार, प्रमुख सचिव के निर्देश पर पहले पोंटून ब्रिज (पीपे वाला पुल) बनाए जाने का निर्णय लिया गया है, ताकि संजय सेतु की मरम्मत के दौरान आवागमन बाधित न हो। इस संबंध में लोक निर्माण विभाग बहराइच को निर्देश दिए गए हैं और प्रारंभिक कार्य भी शुरू हो चुका है।

मार्च तक तैयार होने की उम्मीद

प्रशासन को उम्मीद है कि 15 से 20 मार्च के बीच पोंटून ब्रिज पूरी तरह तैयार हो जाएगा। इसके बाद संजय सेतु पर यातायात बंद कर उसकी मरम्मत का काम शुरू किया जाएगा। वहीं नए पुल का स्टीमेट केंद्र सरकार के पास भेजा जा चुका है और मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू होने की बात कही जा रही है।

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फोर लेन परियोजना से जुड़ा है नया संजय सेतु

अधिकारियों के अनुसार बाराबंकी से बहराइच तक प्रस्तावित फोर लेन सड़क परियोजना का ही हिस्सा नया संजय सेतु होगा। यानी सड़क और पुल का निर्माण एक साथ किया जाएगा, जिससे भविष्य में यातायात का दबाव भी कम होगा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी।

समाचार दर्पण 24 के संपादक कार्य करते हुए, संयमित शब्द और गहरे असर वाली पत्रकारिता का प्रतीकात्मक दृश्य
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