चिता पर आग लगाने ही वाले थे कि अचानक चलने लगी सांसें — भारत जैसे विशाल और विविधताओं से भरे देश में कभी-कभी ऐसी घटनाएं सामने आ जाती हैं, जो न सिर्फ तर्क को चुनौती देती हैं बल्कि इंसान को सोचने पर मजबूर कर देती हैं। कुछ घटनाएं इतनी अप्रत्याशित होती हैं कि वे देखने-सुनने वालों को अचंभे में डाल देती हैं। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के बनारस से सामने आया, जहां अंतिम संस्कार की तैयारी के बीच एक युवक के शरीर में हरकत दिखी और सांसें लौटती नजर आईं।
श्मशान घाट पर चिता सज चुकी थी, परिजन टूट चुके थे और अंतिम विदाई की घड़ी आ चुकी थी—लेकिन तभी शरीर में हुई हलचल ने पूरे घाट को सन्न कर दिया।
श्मशान घाट में मचा हड़कंप, भगदड़ जैसी स्थिति
यह घटना बनारस के प्रसिद्ध गंगा घाटों में से एक पर बुधवार की शाम की है। बताया गया कि 21 वर्षीय युवक विकास को सड़क दुर्घटना में गंभीर चोटें आई थीं। इलाज के दौरान BHU अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। इसके बाद परिजन गहरे शोक में डूबे हुए, चार कंधों पर शव को लेकर श्मशान घाट पहुंचे।
श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार की पूरी तैयारी हो चुकी थी। चिता सजाई जा चुकी थी, लकड़ियां रखी जा चुकी थीं और परिजन रो-बिलख रहे थे। तभी परंपरा के अनुसार जब शव को गंगा में स्नान कराने के लिए ले जाया गया, उसी दौरान कुछ ऐसा हुआ जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को स्तब्ध कर दिया।
गंगा जल में स्नान के दौरान दिखी हलचल
जैसे ही शव को गंगा जल में उतारा गया, परिजनों ने देखा कि युवक के हाथ-पैरों में हल्की हरकत हो रही है। कुछ ही पलों में ऐसा लगा मानो उसकी सांसें लौट रही हों। इस अप्रत्याशित दृश्य को देखकर घाट पर मौजूद लोग सहम गए और कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। कई लोगों को विश्वास ही नहीं हुआ कि जिसे मृत घोषित किया जा चुका है, उसमें जीवन के लक्षण फिर से दिखाई दे सकते हैं।
परिजनों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। उन्होंने बिना देरी किए युवक को दोबारा अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया। आनन-फानन में एंबुलेंस बुलाई गई और विकास को फिर से BHU ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया।
अस्पताल पहुंचते ही फिर बदली स्थिति
अस्पताल में डॉक्टरों की टीम तुरंत हरकत में आई। प्राथमिक जांच के बाद इलाज शुरू किया गया। परिजनों की उम्मीदें एक बार फिर जाग उठीं। उन्हें लग रहा था कि शायद उनका बेटा मौत को मात देकर लौट आया है। लेकिन यह उम्मीद ज्यादा देर तक कायम नहीं रह सकी।
लगभग 15 मिनट के इलाज के बाद डॉक्टरों ने गहन जांच के उपरांत युवक को दोबारा मृत घोषित कर दिया। इस बार डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि सभी आवश्यक मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन करने के बाद ही मृत्यु की पुष्टि की गई है।
परिजनों के लिए 15 मिनट की उम्मीद
विकास के परिजनों का कहना है कि यह 15 मिनट उनके जीवन के सबसे भावनात्मक और भ्रमित करने वाले पल थे। उनका मानना है कि कुछ समय के लिए ही सही, लेकिन उनके बेटे की जान वापस आई थी। इस घटना ने उन्हें जितना दुखी किया, उतना ही हैरान भी।
कौन था विकास?
21 वर्षीय विकास बनारस में शादियों और आयोजनों में पानी सप्लाई का काम करता था। मेहनती और जिम्मेदार युवक अपने परिवार की मदद करता था। दुर्घटना के दिन वह काम के सिलसिले में ही जा रहा था, तभी सड़क हादसे का शिकार हो गया।
दुर्घटना के बाद उसे मड़ुआडीह स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से बाद में उसे BHU रेफर किया गया। लगभग दो दिनों तक चले इलाज के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इलाज पर उठे सवाल, माता-पिता नाराज
इस पूरी घटना के बाद विकास के माता-पिता गहरे सदमे में हैं। उनका आरोप है कि यदि समय पर और बेहतर इलाज मिला होता तो शायद उनका बेटा आज जीवित होता। परिजन अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं और कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं।
उनका कहना है कि जिस तरह श्मशान घाट पर शरीर में हरकत दिखी, उससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं इलाज में लापरवाही तो नहीं बरती गई। हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
समाचार सार: बनारस में 21 वर्षीय युवक को मृत घोषित किए जाने के बाद श्मशान घाट ले जाया गया, जहां गंगा स्नान के दौरान शरीर में हलचल दिखी। युवक को दोबारा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन 15 मिनट बाद उसे फिर मृत घोषित कर दिया गया। घटना ने इलाज और मेडिकल प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।






