प्रसाद के बहाने 8वीं की छात्रा को खिलाया गया नशीला लड्डू
सामूहिक दुष्कर्म का आरोप ; पेट दर्द के बाद खुला राज

स्कूल परिसर में छात्रों के बीच प्रसाद खाते हुए बच्चे का सांकेतिक दृश्य, नाबालिग छात्रा से जुड़े गंभीर मामले की प्रतीकात्मक तस्वीर

✍️इरफान अली लारी की रिपोर्ट
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हूक पॉइंट :
एक नाबालिग की खामोशी, स्कूल में शिक्षक की गैरमौजूदगी, धमकी का डर और दो महीने बाद सामने आई ऐसी सच्चाई जिसने पूरे परिवार को हिला कर रख दिया।

प्रसाद के बहाने 8वीं की छात्रा को खिलाया गया नशीला लड्डू—देवरिया जिले से सामने आया यह मामला न सिर्फ बेहद गंभीर है, बल्कि समाज और शिक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर भी कई बड़े सवाल खड़े करता है। आरोप है कि आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा को स्कूल में ही प्रसाद के नाम पर नशीला पदार्थ खिलाया गया और फिर उसके साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म जैसी जघन्य घटना को अंजाम दिया गया। घटना के बाद धमकी दिए जाने के कारण छात्रा लंबे समय तक चुप रही और जब सच्चाई सामने आई तो परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

गांव का स्कूल और भरोसे का वातावरण

जानकारी के अनुसार पीड़ित छात्रा अपने ही गांव के एक स्कूल में आठवीं कक्षा की छात्रा है। परिजन जिस स्कूल को अपनी बेटी के लिए सुरक्षित मानते थे, वहीं से इस भयावह घटना की शुरुआत बताई जा रही है। आरोप है कि घटना वाले दिन स्कूल में शिक्षक मौजूद नहीं थे और इसी स्थिति का फायदा उठाकर कुछ छात्रों ने इस पूरी वारदात को अंजाम दिया।

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बताया जा रहा है कि एक छात्र ने प्रसाद बताकर छात्रा को लड्डू दिया। धार्मिक आस्था और भरोसे के चलते छात्रा ने वह लड्डू खा लिया। कुछ ही देर में उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। उसे चक्कर आने लगे और वह असहज महसूस करने लगी। इसी कमजोर स्थिति का फायदा उठाकर कुछ छात्र उसे घर छोड़ने के बहाने अपने साथ ले गए।

नशीले लड्डू के बाद कथित दरिंदगी

आरोप है कि छात्रा को बेहोशी जैसी हालत में ले जाकर उसके साथ गलत काम किया गया। इस मामले में केवल नाबालिग छात्रों ही नहीं, बल्कि एक वयस्क के शामिल होने की भी आशंका जताई जा रही है। पुलिस इस बिंदु पर गंभीरता से जांच कर रही है कि क्या घटना में किसी बाहरी व्यक्ति की भूमिका रही।

घटना के बाद छात्रा पूरी तरह मानसिक रूप से टूट चुकी थी। उसे यह समझ ही नहीं आ रहा था कि उसके साथ क्या हुआ और आगे क्या करना चाहिए। इसी दौरान उसे कथित तौर पर धमकी दी गई कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो उसका वीडियो वायरल कर दिया जाएगा।

धमकी, डर और दो महीने की खामोशी

एक नाबालिग बच्ची के लिए इस तरह की धमकी किसी मानसिक यातना से कम नहीं होती। समाज में बदनामी का डर, परिवार की चिंता और आरोपियों की धमकी ने छात्रा को खामोश कर दिया। वह न स्कूल में किसी से कुछ कह पाई और न ही घर पर।

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करीब दो महीने तक छात्रा अपने भीतर इस दर्द और डर को दबाए रही। इस दौरान उसकी दिनचर्या बदल गई, वह गुमसुम रहने लगी, लेकिन परिजन इसे सामान्य समझते रहे। किसी को अंदाजा नहीं था कि उनके घर में इतनी बड़ी त्रासदी छुपी हुई है।

जब पेट दर्द ने खोली सच्चाई

करीब दो महीने बाद छात्रा के पेट में तेज दर्द शुरू हुआ। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे अस्पताल लेकर गए। जांच के दौरान डॉक्टरों ने जो बताया, उसने पूरे परिवार को स्तब्ध कर दिया। मेडिकल जांच में सामने आया कि छात्रा गर्भवती है।

इस जानकारी के बाद परिजनों ने छात्रा से गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ बात की। तब जाकर छात्रा ने हिम्मत जुटाई और पूरी घटना परिजनों को बता दी। यह सुनकर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

पुलिस जांच और अब तक की कार्रवाई

मामला सामने आने के बाद पुलिस ने तत्काल संज्ञान लिया और कार्रवाई शुरू की। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस मामले में अब तक दो आरोपियों को हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है। अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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पुलिस का कहना है कि यह मामला अत्यंत संवेदनशील है और इसकी जांच पूरी गंभीरता से की जा रही है। पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने का भरोसा भी पुलिस ने दिलाया है।

शिक्षा व्यवस्था और समाज पर सवाल

यह मामला केवल एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर व्यवस्थाएं कितनी मजबूत हैं। शिक्षक की अनुपस्थिति में छात्रों की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी होती है, यह भी एक अहम सवाल बनकर सामने आया है।

साथ ही यह घटना उस सामाजिक डर को भी उजागर करती है, जिसकी वजह से पीड़ित अक्सर लंबे समय तक चुप रहते हैं। धमकी, बदनामी और सामाजिक दबाव आज भी न्याय के रास्ते में बड़ी बाधा बने हुए हैं।

परिजनों की मांग और आगे की राह

पीड़िता के परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा न जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसे अपराधों का हौसला और बढ़ेगा।

फिलहाल पुलिस जांच जारी है और पूरे मामले पर जिलेभर की नजरें टिकी हुई हैं। यह देखना अहम होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और पीड़िता को कब और कैसे न्याय मिलता है।

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