पति-पत्नी विवाद सुलझाने पहुँचे दरोगा पर महिला से अनुचित व्यवहार का आरोप लगाते हुए उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि पारिवारिक विवाद की शिकायत की जांच के लिए घर पहुँचे रामनगर थाने में तैनात एक उपनिरीक्षक ने अपनी भूमिका और मर्यादा की सीमाएं लांघ दीं। पीड़ित पति का दावा है कि दरोगा ने उसकी पत्नी से नजदीकियां बढ़ाईं और जब मामला उजागर हुआ तो पूरे परिवार को फर्जी आपराधिक मुकदमे में फंसाने की धमकी तक दे डाली।
🔎 समाचार सार: बाराबंकी के रामनगर थाना क्षेत्र में पति-पत्नी विवाद की जांच करने पहुँचे दरोगा पर महिला से अनुचित संबंध बनाने, कॉल डिटेल और ऑडियो वायरल होने के बाद धमकी देने तथा फर्जी मुकदमे में फंसाने का गंभीर आरोप लगा है। मामले में एसपी ने सीओ स्तर की जांच के आदेश दिए हैं।
मामला बाराबंकी जिले के रामनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत कुम्हारवा गांव का है। यहां निवासी अरुण कुमार ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि लगभग एक वर्ष पूर्व उसका अपनी पत्नी से घरेलू विवाद हो गया था। विवाद बढ़ने पर उसने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद जांच की जिम्मेदारी रामनगर थाने में तैनात उपनिरीक्षक अखिलेश यादव को सौंपी गई।
घरेलू विवाद की जांच से शुरू हुई कहानी
पीड़ित के अनुसार, उपनिरीक्षक अखिलेश यादव जब उसके घर जांच के लिए पहुंचे तो शुरुआत में उन्होंने भरोसे में लेने वाला व्यवहार किया। अरुण का दावा है कि दरोगा ने उससे नजदीकी बढ़ाई, अपनी गाड़ी चलवाने लगा और उसकी पत्नी को नौकरी दिलाने का आश्वासन भी दिया। इसी दौरान उसकी गैरमौजूदगी में दरोगा और उसकी पत्नी के बीच फोन पर बातचीत शुरू हुई, जो धीरे-धीरे नियमित होती चली गई।
फोन कॉल से बढ़ीं नजदीकियां
अरुण कुमार का आरोप है कि दरोगा अखिलेश यादव ने उसकी पत्नी से चोरी-छिपे बातचीत शुरू की। शुरुआत में सामान्य बातचीत बताकर बात को टाला गया, लेकिन समय के साथ कॉल की संख्या बढ़ती चली गई। बाद में जब कॉल डिटेल सामने आई और कुछ ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे, तब पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया।
कार में बैठाकर ले जाने का आरोप
पीड़ित पति ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि करीब पांच महीने पहले उसकी पत्नी अपनी ननद के साथ रामनगर गई थी। उसी दौरान दरोगा अखिलेश यादव अपनी कार से वहां पहुंचा और ननद के विरोध के बावजूद उसकी पत्नी को जबरन गाड़ी में बैठाकर ले गया। आरोप है कि करीब आधे घंटे बाद महिला को तहसील के पास छोड़ दिया गया।
इतना ही नहीं, अरुण का दावा है कि एक महीने पहले जब उसकी पत्नी घर में अकेली थी, तब भी दरोगा उनके घर पहुंच गया। आरोप है कि घर में मौजूद ननद को किसी बहाने से बाहर भेज दिया गया और जब वह वापस लौटी तो उसने दरोगा और महिला को आपत्तिजनक स्थिति में देखा।
विरोध करने पर धमकी देने का दावा
पीड़ित के मुताबिक, जब परिवार ने दरोगा के घर आने-जाने पर आपत्ति जताई और उसे रोकने की कोशिश की तो वह नाराज हो गया। अरुण का आरोप है कि 28 जनवरी 2026 को दरोगा दो बार उनके घर पहुंचा और पत्नी से मिलने की जिद करने लगा। विरोध करने पर उसने मां और बहनों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और पूरे परिवार को डकैती के झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी तक दे डाली।
इन धमकियों से पूरा परिवार दहशत में है। पीड़ित का कहना है कि पुलिस अधिकारी होने के कारण दरोगा अपने पद का दुरुपयोग कर रहा है और इसी भय के चलते परिवार लंबे समय तक चुप रहा।
एसपी और मुख्यमंत्री पोर्टल तक पहुंचा मामला
आखिरकार पीड़ित ने हिम्मत जुटाकर पुलिस अधीक्षक बाराबंकी को प्रार्थना पत्र दिया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में कॉल डिटेल, ऑडियो रिकॉर्डिंग और पूरे घटनाक्रम का उल्लेख किया गया है।
दरोगा ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर, उपनिरीक्षक अखिलेश यादव ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार और मनगढ़ंत बताया है। उनका कहना है कि 27 जनवरी 2026 को महिला ने स्वयं थाने में एक प्रार्थना पत्र दिया था। उसी शिकायत की जांच के सिलसिले में उसके पति को थाने बुलाया गया था और मामले को अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है।
सीओ स्तर पर जांच शुरू
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी सीओ रामनगर गरिमा पंत को सौंपी गई है। सीओ ने बताया कि महिला, उसके पति और संबंधित दरोगा समेत सभी पक्षों को बयान दर्ज कराने के लिए कार्यालय बुलाया गया है। बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दरोगा और पीड़ित पति के बीच बातचीत के कई ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल बताए जा रहे हैं, जिनकी सत्यता की भी जांच की जा रही है। पुलिस महकमे में इस प्रकरण को लेकर हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
⚖️ Hook Point: पति-पत्नी विवाद सुलझाने पहुँचे दरोगा पर महिला से अनुचित व्यवहार का आरोप न सिर्फ पुलिस महकमे की साख पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि जांच पूरी होने से पहले सच्चाई तक पहुंचना कितना जरूरी है।





