बाराबंकी बुजुर्ग महिला हत्या : बंद कमरे में मिली 85 वर्षीय शकुंतला देवी की लाश, लूट की आशंका

बाराबंकी के बंकी कस्बे में 85 वर्षीय शकुंतला देवी की संदिग्ध मौत के बाद घर के बाहर जांच करती पुलिस और मृतका की तस्वीर

✍️अनुराग गुप्ता की रिपोर्ट
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बाराबंकी बुजुर्ग महिला हत्या का मामला उत्तर प्रदेश में एक बार फिर कानून-व्यवस्था और बुजुर्गों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। नगर कोतवाली क्षेत्र के बंकी कस्बे में रहने वाली 85 वर्षीय शकुंतला देवी का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। प्रारंभिक जांच में लूट के इरादे से हत्या की आशंका जताई जा रही है, हालांकि पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।

समाचार सार:
बंकी कस्बे के दक्षिण टोला इलाके में 85 वर्षीय शकुंतला देवी की संदिग्ध मौत, घर के दरवाजे अंदर से अटके मिले, शरीर से आभूषण गायब, फॉरेंसिक जांच जारी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज।

सुबह की खामोशी ने खोली वारदात की परतें

दक्षिण टोला इलाके में सोमवार की सुबह उस वक्त हलचल मच गई, जब काफी देर तक शकुंतला देवी अपने कमरे से बाहर नहीं निकलीं। परिजनों के अनुसार वह रोज़ सुबह जल्दी उठ जाती थीं और घर के अन्य सदस्यों से बातचीत करती थीं। लेकिन उस दिन जब समय बीतने के बावजूद कोई आहट नहीं हुई, तो बहू शिव कुमारी को अनहोनी की आशंका हुई।

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जब बहू नीचे पहुंचीं तो मुख्य दरवाजा अंदर से बंद मिला। दरवाजे को कपड़े की मदद से इस तरह अटकाया गया था कि बाहर से खोलना संभव न हो। हालात संदिग्ध लगने पर पीछे के रास्ते से कमरे में प्रवेश किया गया, जहां बिस्तर पर शकुंतला देवी का शव पड़ा हुआ मिला। यह दृश्य इतना भयावह था कि पूरे परिवार में कोहराम मच गया।

कमरे की हालत और गायब गहनों ने बढ़ाया शक

कमरे की स्थिति सामान्य नहीं थी। सामान बिखरा हुआ नहीं था, लेकिन जिस तरह से दरवाजा अंदर से अटकाया गया था, उसने किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश की आशंका को मजबूत कर दिया। सबसे अहम बात यह रही कि मृतका के शरीर पर पहने जाने वाले चांदी के कड़े और सोने के झुमके गायब थे।

इसके अलावा नाक की कील जमीन पर गिरी हुई मिली। यह संकेत साफ तौर पर किसी जबरन छीना-झपटी की ओर इशारा करता है। परिजनों का कहना है कि शकुंतला देवी साधारण जीवन जीती थीं, लेकिन वह रोज़मर्रा के आभूषण पहनती थीं, जिन्हें उतारने की आदत नहीं थी।

अकेले सोना बना कमजोरी का कारण?

परिवार के अनुसार शकुंतला देवी घर के निचले हिस्से में अकेली सोती थीं, जबकि उनका बेटा और बहू पहली मंज़िल पर रहते हैं। उम्र अधिक होने के बावजूद वह आत्मनिर्भर थीं और किसी पर बोझ नहीं बनना चाहती थीं। हालांकि यही आदत शायद उनकी सुरक्षा में एक बड़ी चूक साबित हुई।

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इलाके के लोगों का कहना है कि बुजुर्गों को अक्सर आसान निशाना समझा जाता है, खासकर जब वे घर में अकेले रहते हों। यह घटना इस बात की चेतावनी है कि परिवार और समाज को बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क होना होगा।

पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने संभाली जांच

घटना की सूचना मिलते ही नगर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को घेर लिया गया। फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया, जिसने कमरे से अहम साक्ष्य जुटाए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रथम दृष्टया मामला बाराबंकी बुजुर्ग महिला हत्या का प्रतीत होता है, जिसमें लूट की मंशा प्रमुख नजर आ रही है।

हालांकि पुलिस यह भी मानकर चल रही है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

परिवार की पृष्ठभूमि और आर्थिक स्थिति

मृतका के पति जिला कारागार में शिक्षक पद पर कार्यरत थे और उनके निधन के बाद पेंशन शकुंतला देवी को मिलती थी। उनका बेटा भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में कार्यरत बताया जा रहा है। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य और सम्मानजनक थी, जिससे यह आशंका और मजबूत हो जाती है कि अपराधियों को पेंशन या आभूषण की जानकारी पहले से हो सकती थी।

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पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं किसी जानकार व्यक्ति ने ही अपराधियों को सूचना तो नहीं दी।

इलाके में दहशत, सुरक्षा पर सवाल

घटना के बाद से पूरे बंकी कस्बे में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोग भयभीत हैं और सवाल उठा रहे हैं कि अगर घर के अंदर भी बुजुर्ग सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक कैसे सुरक्षित महसूस करें। यह मामला न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि सामाजिक चेतावनी भी है।

पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। साथ ही संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ का सिलसिला भी जारी है।

न्याय की उम्मीद और जवाबदेही की मांग

परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं और चाहते हैं कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। यह घटना एक बार फिर बताती है कि अपराध केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं होते, बल्कि हर अपराध के पीछे एक टूटता हुआ परिवार और डर से घिरा समाज होता है।

अब सबकी निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सके कि यह हत्या किस तरह और किन हालात में की गई।

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