बाराबंकी शिक्षिका संदिग्ध मौत : प्रिंसिपल के कमरे में फांसी पर लटका मिला शव, उत्पीड़न के आरोपों से शिक्षा विभाग में हड़कंप

बाराबंकी में कंपोजिट विद्यालय उधवापुर के प्रिंसिपल कक्ष में शिक्षिका की संदिग्ध मौत के बाद स्कूल परिसर में जुटी भीड़।


अनुराग गुप्ता की रिपोर्ट
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बाराबंकी शिक्षिका संदिग्ध मौत का मामला उत्तर प्रदेश के शिक्षा जगत में गहरी चिंता और सवालों की लकीर खींच गया है। सरकारी कंपोजिट विद्यालय के भीतर प्रिंसिपल के कमरे में एक शिक्षिका का शव फांसी के फंदे से लटका मिला। घटना के बाद जहां पुलिस और फॉरेंसिक टीम जांच में जुटी है, वहीं मृतका के पति और परिजनों ने स्कूल स्टाफ पर गंभीर मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में सामने आई यह घटना केवल एक संदिग्ध मौत भर नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों के भीतर कामकाजी माहौल, आंतरिक राजनीति और शिक्षकों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को भी उजागर करती है। सतरिख थाना क्षेत्र के हरख ब्लॉक स्थित उधवापुर कंपोजिट विद्यालय में तैनात शिक्षिका उमा वर्मा उर्फ माला का शव शनिवार को स्कूल के प्रिंसिपल कक्ष में फांसी के फंदे से लटका पाया गया। स्कूल परिसर में इस दृश्य ने सभी को स्तब्ध कर दिया।

प्रिंसिपल के कमरे में लटका मिला शव, स्कूल में मची अफरातफरी

शनिवार सुबह जब विद्यालय की नियमित गतिविधियां चल रही थीं, उसी दौरान शिक्षिका उमा वर्मा प्रिंसिपल के कमरे में गईं। काफी समय तक बाहर न आने पर स्कूल स्टाफ को आशंका हुई। जब दरवाजा खोलकर भीतर झांका गया तो पंखे से रस्सी के सहारे उनका शव लटका हुआ मिला। यह दृश्य देखते ही विद्यालय में हड़कंप मच गया और सूचना तुरंत पुलिस को दी गई।

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सूचना मिलते ही सतरिख थाना पुलिस मौके पर पहुंची। फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया, जिसने कमरे की बारीकी से जांच की। पुलिस ने शव को फंदे से उतरवाकर कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक तौर पर मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन परिजनों के आरोपों ने जांच को कई कोणों में मोड़ दिया है।

पति और परिजनों के आरोप: मानसिक प्रताड़ना ने तोड़ा हौसला

मृतका के पति ऋषि वर्मा, जो स्वयं शिक्षा विभाग में सिद्धौर ब्लॉक में एआरपी के पद पर तैनात हैं, ने स्कूल स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि शनिवार सुबह करीब 10 बजे वह पत्नी को स्कूल छोड़कर अपने कार्यस्थल चले गए थे। उन्हें क्या पता था कि यह उनकी आखिरी मुलाकात होगी।

परिजनों का आरोप है कि उमा वर्मा एक मेहनती और समर्पित शिक्षिका थीं, जो बच्चों को मन लगाकर पढ़ाती थीं। इसी बात से कुछ सहकर्मी उनसे ईर्ष्या रखते थे। उन पर लगातार तंज कसे जाते थे—यह कहकर चिढ़ाया जाता था कि “इन्हें तो अवॉर्ड चाहिए।” ऐसी टिप्पणियां धीरे-धीरे उनके आत्मसम्मान और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रही थीं।

स्कूल स्टाफ पर सीधे आरोप, नाम भी आए सामने

मृतका के भाई शिवाकांत वर्मा ने आरोप लगाया कि विद्यालय में तैनात कुछ सहायक अध्यापक और प्रभारी लगातार उनकी बहन को मानसिक रूप से परेशान कर रहे थे। आरोपों में सहायक अध्यापक सुशील वर्मा के साथ-साथ इंचार्ज सितावती, जया और अर्चना के नाम भी सामने आए हैं। परिजनों का कहना है कि बच्चों को पढ़ाने से रोकना, बेवजह शिकायतें करना और सार्वजनिक रूप से नीचा दिखाना आम बात हो गई थी।

पति ऋषि वर्मा ने यह भी सवाल उठाया कि घटना वाले कमरे का दरवाजा अंदर से बंद नहीं था। उनका दावा है कि पुलिस के पहुंचने से पहले कुछ सामान व्यवस्थित किया गया, जिसके बाद सूचना दी गई। हालांकि पुलिस इन सभी बिंदुओं की गंभीरता से जांच कर रही है।

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डिप्रेशन में थीं शिक्षिका? विभागीय जांच पर उठे सवाल

शिक्षा विभाग की ओर से मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए नवीन पाठक ने कहा कि खंड शिक्षा अधिकारी की प्रारंभिक रिपोर्ट में शिक्षिका के डिप्रेशन में होने की बात सामने आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की भी विभागीय स्तर पर जांच कराई जाएगी।

हालांकि सवाल यह है कि यदि कोई शिक्षिका लंबे समय से मानसिक दबाव में थी, तो उसे समय रहते क्यों नहीं पहचाना गया? क्या स्कूल प्रशासन और विभागीय तंत्र की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वह शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान दे?

सरकारी स्कूलों का कार्यस्थल दबाव: एक बड़ा सामाजिक प्रश्न

यह मामला केवल बाराबंकी शिक्षिका संदिग्ध मौत तक सीमित नहीं है। यह सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के सामने मौजूद उन चुनौतियों को भी सामने लाता है, जिन पर अक्सर चर्चा नहीं होती। सीमित संसाधन, प्रशासनिक दबाव, आपसी राजनीति और शिकायतों का डर—ये सभी मिलकर एक संवेदनशील शिक्षक को भीतर से तोड़ सकते हैं।

शिक्षा व्यवस्था का मूल उद्देश्य बच्चों का भविष्य संवारना है, लेकिन यदि शिक्षक स्वयं मानसिक असुरक्षा और उत्पीड़न का शिकार होंगे, तो यह लक्ष्य कैसे पूरा होगा? यह सवाल आज पूरे प्रदेश में गूंज रहा है।

पुलिस जांच जारी, हर पहलू खंगालने का दावा

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष और गहराई से की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य, कॉल डिटेल और स्कूल के आंतरिक रिकॉर्ड—सभी बिंदुओं को जोड़ा जा रहा है। यह भी जांच की जा रही है कि क्या यह आत्महत्या है या इसके पीछे कोई और कारण छिपा है।

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परिवार न्याय की मांग पर अड़ा है और चाहता है कि यदि किसी की लापरवाही या उत्पीड़न के कारण यह मौत हुई है, तो जिम्मेदारों को सजा मिले। वहीं शिक्षा विभाग पर भी अब दबाव बढ़ रहा है कि वह केवल औपचारिक जांच तक सीमित न रहे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

बाराबंकी शिक्षिका संदिग्ध मौत का मामला कहां का है?

यह मामला उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के हरख ब्लॉक स्थित उधवापुर कंपोजिट विद्यालय का है, जहां शिक्षिका का शव प्रिंसिपल के कमरे में मिला।

परिजनों ने किन आरोपों की बात कही है?

परिजनों ने स्कूल स्टाफ पर मानसिक प्रताड़ना, तंज कसने और बेवजह शिकायतें करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

क्या यह आत्महत्या का मामला है?

प्रारंभिक तौर पर मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है और अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम व जांच के बाद ही सामने आएगा।

शिक्षा विभाग ने क्या प्रतिक्रिया दी है?

बीएसए ने प्रारंभिक जांच में शिक्षिका के डिप्रेशन में होने की बात कही है और परिजनों के आरोपों पर जांच का आश्वासन दिया है।

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