स्कूल में जूते की हील से छात्र की आंख पर हमला, चली गई रोशनी

स्कूल में जूते की हील से छात्र की आंख पर हमले के बाद अस्पताल में भर्ती पीड़ित बच्चा

✍️ ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट
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स्कूल में जूते की हील से छात्र की आंख पर हमला — यह पंक्ति जितनी छोटी है, घटना उतनी ही भयावह और झकझोर देने वाली है। राजधानी लखनऊ के कैंट क्षेत्र से सामने आए इस मामले ने न केवल स्कूल परिसरों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या स्कूल अब बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित स्थान रह गए हैं। आरोप है कि लंच ब्रेक के दौरान कक्षा-तीन और कक्षा-पांच के दो छात्रों ने कक्षा-पांच के एक छात्र को बुरी तरह पीटा और जूते की हील से उसकी आंख रगड़ दी, जिससे उसकी आंखों की रोशनी चली गई।

समाचार सार :
कैंट स्थित एक स्कूल में लंच ब्रेक के दौरान हुई मारपीट में कक्षा-5 के छात्र की आंखों की रोशनी जाने का आरोप है। पीड़ित परिवार का कहना है कि स्कूल प्रशासन ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया, जिसके बाद थाने में FIR दर्ज कराई गई।

लंच ब्रेक के दौरान मैदान में हुई बर्बरता

घटना 21 जनवरी की बताई जा रही है। स्कूल में लंच ब्रेक चल रहा था और बच्चे रोज़ की तरह मैदान में खेल रहे थे। इसी दौरान कक्षा-पांच और कक्षा-तीन में पढ़ने वाले दो छात्रों ने कथित तौर पर पीड़ित छात्र को अलग कर लिया। आरोप है कि दोनों ने उसे पकड़कर मारपीट शुरू कर दी और जब वह बचने की कोशिश करने लगा तो उसे जमीन पर गिरा दिया गया। इसके बाद जूते की हील से उसके चेहरे और आंख पर रगड़ा गया। यह हमला कुछ ही पलों में इतना गंभीर हो गया कि बच्चा दर्द से चीखने लगा।

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घर पहुंचने पर सामने आई गंभीर स्थिति

छुट्टी के बाद जब पीड़ित छात्र घर पहुंचा तो उसकी आंखों में तेज सूजन थी और लगातार पानी निकल रहा था। परिजनों ने पहले इसे सामान्य चोट समझा, लेकिन कुछ ही समय में उसकी हालत बिगड़ने लगी। बच्चे की आंखें खुल नहीं पा रही थीं और दर्द बढ़ता जा रहा था। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए परिजन उसे तत्काल कमांड अस्पताल लेकर पहुंचे।

अस्पताल में टूटी उम्मीद, रोशनी जाने की पुष्टि

कमांड अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों ने जो बताया, उसने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। चिकित्सकों के अनुसार, बच्चे की आंखों की रोशनी जा चुकी थी। इलाज के दौरान जब परिजनों ने उससे विस्तार से पूछा, तब उसने स्कूल में हुई पूरी घटना बताई। इसके बाद परिवार को यह स्पष्ट हो गया कि यह कोई मामूली चोट नहीं, बल्कि गंभीर हिंसा का परिणाम है।

स्कूल प्रशासन पर चुप्पी का आरोप

बच्चे की आपबीती सामने आने के बाद उसकी मां ने स्कूल प्रशासन से संपर्क किया और पूरे मामले की शिकायत की। आरोप है कि स्कूल की ओर से न तो कोई ठोस आश्वासन दिया गया और न ही आरोपित छात्रों के खिलाफ कोई स्पष्ट कार्रवाई की गई। परिवार का कहना है कि स्कूल ने मामले को दबाने की कोशिश की और गंभीरता से नहीं लिया।

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पुलिस के पास पहुंचा मामला, दर्ज हुई FIR

स्कूल प्रशासन से निराश होने के बाद पीड़ित छात्र की मां ने कैंट थाने में FIR दर्ज कराई। कैंट थाना प्रभारी गुरप्रीत कौर के अनुसार, पीड़ित परिवार मूल रूप से सुल्तानपुर जिले के लंभुआ का निवासी है और वर्तमान में कैंट क्षेत्र के तोपखाना बाजार के पास निर्भय विहार में रहता है। पीड़ित छात्र आर्मी पब्लिक स्कूल नंबर-3 में कक्षा-5A में पढ़ता है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और सभी तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।

स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल

यह घटना स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। लंच ब्रेक जैसे समय में जब बच्चे खुले मैदान में होते हैं, वहां निगरानी की जिम्मेदारी किसकी होती है? क्या उस समय कोई शिक्षक या स्टाफ मौजूद था? अगर था, तो इतनी गंभीर घटना कैसे हो गई? ये सवाल अब केवल पीड़ित परिवार ही नहीं, बल्कि समाज भी पूछ रहा है।

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बाल हिंसा की बढ़ती प्रवृत्ति और चेतावनी

स्कूल में जूते की हील से छात्र की आंख पर हमला केवल एक घटना नहीं, बल्कि यह बच्चों के बीच बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति का संकेत भी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों के व्यवहार पर समय रहते ध्यान न दिया गया तो ऐसे मामले और बढ़ सकते हैं। स्कूलों की जिम्मेदारी केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि सुरक्षित और संवेदनशील वातावरण देने की भी है।

कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी की मांग

कानूनी जानकारों का कहना है कि इस तरह के मामलों में केवल छात्रों ही नहीं, बल्कि स्कूल प्रशासन की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। यदि लापरवाही साबित होती है तो जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। पीड़ित परिवार की मांग है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और स्कूलों में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

हूक प्वाइंट :
क्या स्कूल अब बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित जगह नहीं रहे? यह मामला सिस्टम की चुप्पी और लापरवाही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
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