डर लगता है, लेकिन पेट की खातिर जाना पड़ता है — बिहार के एक ही गाँव के 6 मज़दूरों की छत्तीसगढ़ में मौत

छत्तीसगढ़ हादसे में मारे गए मज़दूरों के बाद बिहार के गोटीबांध गांव में शोक में डूबे परिजन और ग्रामीण

हरीश चन्द्र गुप्ता की रिपोर्ट
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डर लगता है, लेकिन पेट की खातिर जाना पड़ता है—यह पंक्ति आज बिहार के गया ज़िले के गोटीबांध गाँव की सामूहिक पीड़ा बन चुकी है। बिहार-झारखंड की सीमा पर बसे इस गाँव में आज मातम पसरा है। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाज़ार-भाटपारा ज़िले में हुए औद्योगिक विस्फोट ने गोटीबांध के छह घरों के चूल्हे बुझा दिए और सैकड़ों सपनों को राख में बदल दिया।

गाँव में असामान्य भीड़, लेकिन हर चेहरा शोक में डूबा

गोटीबांध गाँव में शायद पहली बार इतनी सरकारी गाड़ियाँ, नेता और अधिकारी पहुँचे हैं। कुर्सियाँ लगी हैं, लोग जमा हैं, लेकिन यह भीड़ किसी उत्सव के लिए नहीं है। हर व्यक्ति छह शवों के आने का इंतज़ार कर रहा है। गाँव की गलियों में सन्नाटा और घर-घर से उठती रोने की आवाज़ें माहौल को भारी बना रही हैं।

ख़ुशबू की बेहोशी और दो शवों का इंतज़ार

भीड़ के बीच ख़ुशबू बेसुध पड़ी हैं। गाँव की महिलाएँ उन्हें सहारा देकर बैठाए हुए हैं। ख़ुशबू अपने पिता सुंदर भुइया और भाई राजदेव भुइया के शवों का इंतज़ार कर रही हैं। गुरुवार को छत्तीसगढ़ के एक स्पंज आयरन प्लांट में हुए विस्फोट में दोनों की मौत हो गई।

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रोते हुए ख़ुशबू कहती हैं, “ये पहली बार बाहर कमाने गए थे। पहले यहीं मज़दूरी करके घर चला लेते थे। भाई की अभी शादी हुई थी, उसका दो महीने का बच्चा है… सरकार कुछ मदद करे।”

एक ही गाँव, छह मौतें और कई घायल

छत्तीसगढ़ के आयरन प्लांट हादसे में कुल छह मज़दूरों की मौत हुई है और सभी गोटीबांध गाँव के निवासी थे। इसके अलावा बिहार और झारखंड के पाँच मज़दूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह हादसा एक पूरे गाँव को शोक में डुबो गया।

बदरी भुइया का सूना घर

मृतकों में बदरी भुइया भी शामिल हैं। उनके घर के बाहर बैठी बूढ़ी माँ का रो-रोकर बुरा हाल है। बदरी और उनके भाई रामस्वरूप दोनों छत्तीसगढ़ काम करने गए थे। रामस्वरूप बच गए, लेकिन घर का सबसे बड़ा बेटा अब कभी नहीं लौटेगा।

मांझी समुदाय और रोज़गार की जद्दोजहद

गोटीबांध गाँव मांझी बहुल इलाका है। बदरी भुइया आठवीं तक पढ़े-लिखे थे और अपने समुदाय में सबसे शिक्षित माने जाते थे। इसके बावजूद खेत मज़दूरी से घर का खर्च नहीं चल पा रहा था, इसलिए बाहर जाने का फैसला लिया।

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14 हज़ार रुपये का सपना, सुरक्षा का अभाव

जनवरी में गोटीबांध से 14 लोग छत्तीसगढ़ कमाने गए थे। परिजनों का कहना है कि एक ठेकेदार ने 14,000 रुपये महीने की नौकरी और खाने-पीने की व्यवस्था का वादा किया था। लेकिन प्लांट में सुरक्षा इंतज़ाम बेहद कमजोर थे।

ठेकेदार की भूमिका पर सवाल

गाँव कचरा पंचायत के अंतर्गत आता है। सरपंच पति रामचंद्र यादव बताते हैं कि यहाँ पिछड़ा, अति पिछड़ा और महादलित समुदाय रहता है। किस ठेकेदार ने इन लोगों को ले गया, इसकी पुख्ता जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

चश्मदीद का बयान: काली गैस और भगदड़

हादसे के चश्मदीद जोगिंदर भुइया बताते हैं कि सुबह काम शुरू होने के कुछ ही देर बाद काली गैस फैल गई। कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। ऊपर भागने वाले बच गए, नीचे जाने वालों की मौत हो गई।

कर्ज़ और ज़िम्मेदारियों का बोझ

जोगिंदर ने 51 हजार रुपये का कर्ज़ लिया था। सुंदर और राजदेव ने बहन की शादी के लिए उधार लिया था। बदरी भुइया बच्चों की पढ़ाई का खर्च नहीं उठा पा रहे थे। यही कर्ज़ और मजबूरी उन्हें बाहर ले गई।

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डर हर घर में, लेकिन जाना मजबूरी

सुमंती देवी कहती हैं, “डर लगता है, लेकिन पेट की खातिर जाना पड़ता है।” उनके पति आंध्र प्रदेश में मज़दूरी करते हैं। यह वाक्य आज पूरे गाँव की सच्चाई बन चुका है।

जो नहीं गया, वही आज ज़िंदा है

जयराम भुइया भी छत्तीसगढ़ जाने वाले थे, लेकिन बेटे ने रोक लिया। हादसे की खबर सुनकर बेटा रो पड़ा और बोला—“पापा, बाहर जाने पर कौन-कौन से काम कराते हैं।”

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

छत्तीसगढ़ हादसे में कितने मज़दूरों की मौत हुई?

इस औद्योगिक हादसे में कुल छह मज़दूरों की मौत हुई, सभी बिहार के एक ही गाँव के थे।

मज़दूर छत्तीसगढ़ क्यों गए थे?

गरीबी, कर्ज़ और रोज़गार की कमी के कारण वे बाहर कमाने गए थे।

क्या परिजनों को मुआवज़ा मिलेगा?

परिजन मुआवज़े की मांग कर रहे हैं, सरकार से आधिकारिक घोषणा का इंतज़ार है।

ठेकेदार पर कार्रवाई होगी?

ठेकेदार की भूमिका की जांच की मांग उठ रही है, प्रशासन जांच कर रहा है।

गिरौदपुरी धाम में आयोजित भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा की बैठक में मंच पर सम्मान और मंदिर परिसर में मौजूद पदाधिकारी व कार्यकर्ता।
बाबा गुरु घासीदास की जन्मभूमि गिरौदपुरी धाम में आयोजित भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा की बैठक में प्रदेश व जिला स्तर के पदाधिकारी एकजुट दिखाई दिए।

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