चौकी परिसर में ही दबिश, पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
यह कार्रवाई बुधवार को उस समय हुई, जब पीड़ित तय की गई रिश्वत की रकम लेकर पेपरमिल चौकी पहुंचा। पहले से शिकायत के आधार पर जाल बिछाकर बैठी एंटी करप्शन टीम ने मौके पर ही दबिश दी और चौकी इंचार्ज एसआई धनंजय सिंह को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। चौकी के भीतर हुई इस गिरफ्तारी से न केवल स्थानीय पुलिस, बल्कि पूरे महकमे में हलचल मच गई।
नाम हटाने के एवज में मांगी गई थी रिश्वत
पीड़ित प्रतीक गुप्ता के अनुसार, चौकी इंचार्ज द्वारा एक गंभीर आपराधिक मामले से नाम हटाने के बदले उनसे रिश्वत की मांग की गई थी। यह सौदेबाज़ी अचानक नहीं, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ती मांगों का हिस्सा थी। पीड़ित का कहना है कि उनसे पहले बड़ी रकम की मांग की गई और बाद में ‘सेटिंग’ के नाम पर सौदा तय किया गया।
50 लाख की डिमांड, 2 लाख में तय हुई रकम
पीड़ित ने आरोप लगाया कि शुरुआत में उनसे 50 लाख रुपये की मांग की गई थी। बाद में केस से राहत दिलाने के नाम पर 10 लाख रुपये देने की बात कही गई। अंततः चौकी इंचार्ज ने 2 लाख रुपये में नाम हटाने की बात तय की, जिसे देने के दौरान ही एंटी करप्शन टीम ने कार्रवाई कर दी।
फर्जी गैंगरेप केस में फंसाने का आरोप
प्रतीक गुप्ता का दावा है कि करीब दो महीने पहले उन्हें एक फर्जी गैंगरेप मामले में फंसा दिया गया। यह मामला तब सामने आया, जब एक पूर्व महिला कर्मचारी ने नौकरी छोड़ने के चार महीने बाद डेढ़ साल पुराने दुष्कर्म का आरोप लगाया। पीड़ित का आरोप है कि उन्हें जबरन एक अनजान व्यक्ति रियाज अहमद के साथ जोड़कर गैंगरेप का आरोपी बना दिया गया, जबकि उनका उससे कोई पूर्व संबंध नहीं था।
‘पैसे पूरे होते ही बयान बदलवा देंगे’ — गंभीर आरोप
पीड़ित के अनुसार, दारोगा धनंजय सिंह ने कथित रूप से कहा था कि “जब 50 लाख पूरे हो जाएंगे, तब लड़की का बयान बदलवा दिया जाएगा।” यह कथन, यदि जांच में पुष्ट होता है, तो न केवल भ्रष्टाचार बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग की ओर भी इशारा करता है।
लगातार दबाव और मानसिक प्रताड़ना का दावा
पीड़ित ने बताया कि लंबे समय तक उन पर मानसिक दबाव बनाया गया। खाकी वर्दी का रौब दिखाकर उन्हें डराया गया और बार-बार रकम की मांग की जाती रही। इस दबाव और कथित प्रताड़ना से तंग आकर उन्होंने अंततः एंटी करप्शन टीम से संपर्क किया।
शिकायत के बाद बनी रणनीति, फिर हुई गिरफ्तारी
शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने पूरी रणनीति के तहत कार्रवाई की। पीड़ित को तय रकम के साथ चौकी भेजा गया और जैसे ही रिश्वत का लेन-देन हुआ, टीम ने मौके पर पहुंचकर आरोपी दारोगा को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस व्यवस्था और भरोसे पर उठते सवाल
यह मामला केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि क्या इस तरह की कथित सौदेबाज़ी महज़ अपवाद है या फिर व्यवस्था के भीतर गहराई तक फैली समस्या का संकेत। राजधानी जैसे शहर में चौकी के भीतर रिश्वत लेते पकड़ा जाना, आम नागरिक के भरोसे को झकझोरने वाला है।
आगे की जांच और जवाबदेही की कसौटी
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच का दायरा कितना व्यापक होता है और क्या यह कार्रवाई केवल निचले स्तर तक सिमट कर रह जाती है या फिर पूरे तंत्र की जवाबदेही तय होती है। यह मामला पुलिस व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक अवसर बनता है या नहीं, इसका जवाब आने वाला समय देगा।
