युद्ध के दौरान बचाओ कार्य का रिहर्सल : 23 जनवरी की शाम 6 बजे बजेगा सायरन, होगा ब्लैक आउट मॉक ड्रिल

युद्ध के दौरान बचाओ कार्य का रिहर्सल, हरदोई में 23 जनवरी को ब्लैक आउट मॉक ड्रिल के दौरान सायरन, राहत और बचाव अभ्यास करते नागरिक सुरक्षा व प्रशासन
अनुराग गुप्ता की रिपोर्ट
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युद्ध के दौरान बचाओ कार्य का रिहर्सल—आपदा और आपातकालीन स्थितियों से निपटने की तैयारी को मजबूत करने के उद्देश्य से 23 जनवरी को शाम 6 बजे ब्लैक आउट मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इस दौरान हवाई हमले की चेतावनी के लिए सायरन बजेगा, प्रभावित क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बंद कर ब्लैक आउट किया जाएगा और नागरिकों को शरण लेने की प्रक्रिया का अभ्यास कराया जाएगा। यह अभ्यास हरदोई में नागरिक सुरक्षा, प्रशासन और आपात सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

बैठक में तय हुई रणनीति, स्थल चयन के निर्देश

हरदोई। स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में अपर जिलाधिकारी (एडीएम) प्रफुल्ल त्रिपाठी ने मॉक ड्रिल की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए निर्देश दिए कि आयोजन स्थल का चयन समय रहते कर लिया जाए। उन्होंने नगर पालिका अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिया कि मॉक ड्रिल से पहले शहरवासियों को ब्लैक आउट और सायरन के संबंध में पूर्व सूचना दी जाए, ताकि किसी प्रकार की अफवाह या घबराहट की स्थिति न बने। प्रशासन का लक्ष्य यह है कि अभ्यास पूरी तरह यथार्थपरक हो, लेकिन नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा सर्वोपरि रहे।

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23 जनवरी को शाम 6 बजे बजेगा सायरन

प्रशासन के अनुसार, 23 जनवरी की शाम 6 बजे हवाई हमले की चेतावनी के रूप में सायरन बजाया जाएगा। सायरन बजते ही चिन्हित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाएगी और ब्लैक आउट लागू होगा। इसके बाद नागरिकों को निकटतम सुरक्षित शरण में जाने, घरों में रोशनी बंद रखने और आवश्यक सावधानियों का पालन करने का अभ्यास कराया जाएगा। यह प्रक्रिया वास्तविक आपातकाल में त्वरित प्रतिक्रिया विकसित करने में सहायक होगी।

ऑल क्लियर सायरन और राहत अभ्यास

हवाई हमले की समाप्ति के संकेत के रूप में ऑल क्लियर सायरन बजाया जाएगा। इसके साथ ही राहत और बचाव से जुड़ी सभी इकाइयाँ सक्रिय होंगी। नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक आग बुझाने, घायलों को प्राथमिक चिकित्सा देने, गंभीर रूप से घायलों को एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुँचाने तथा ध्वस्त भवनों से लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया का प्रदर्शन करेंगे। यह अभ्यास टीमवर्क और समय-प्रबंधन की वास्तविक परीक्षा होगा।

स्वास्थ्य, अग्निशमन और पुलिस की संयुक्त भूमिका

मॉक ड्रिल के दौरान स्वास्थ्य विभाग चिकित्सा सेवाओं की तत्परता प्रदर्शित करेगा—जिसमें ट्रायेज, आपात उपचार और अस्पताल समन्वय शामिल रहेगा। अग्निशमन विभाग आग पर नियंत्रण, सुरक्षित निकासी और उपकरणों के उपयोग का लाइव प्रदर्शन करेगा। वहीं पुलिस विभाग यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा घेराबंदी सुनिश्चित करेगा। इन सभी विभागों के बीच रियल-टाइम समन्वय इस अभ्यास की सबसे बड़ी कसौटी होगी।

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नगर पालिका को सफाई और पुनर्स्थापन के निर्देश

एडीएम ने नगर पालिका को स्पष्ट निर्देश दिए कि मॉक ड्रिल के समापन के बाद तत्काल सफाई और पुनर्स्थापन की व्यवस्था की जाए। अभ्यास के दौरान उपयोग में आए मार्गों, उपकरणों और सार्वजनिक स्थलों को शीघ्र सामान्य स्थिति में लाया जाएगा, ताकि आम जनजीवन पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। यह पहल प्रशासन की जवाबदेही और जन-संवेदनशीलता को दर्शाती है।

क्यों जरूरी है युद्ध के दौरान बचाओ कार्य का रिहर्सल

आपात स्थितियाँ बिना चेतावनी के आती हैं। ऐसे में युद्ध के दौरान बचाओ कार्य का रिहर्सल नागरिकों, स्वयंसेवकों और प्रशासन—तीनों के लिए जीवनरक्षक प्रशिक्षण साबित होता है। ब्लैक आउट, सायरन, शरण-प्रक्रिया, प्राथमिक चिकित्सा और निकासी जैसे अभ्यास घबराहट कम करते हैं और निर्णय क्षमता बढ़ाते हैं। यही कारण है कि यह मॉक ड्रिल केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करने का प्रयास है।

नेताजी की जयंती पर संदेश: अनुशासन और तैयारी

यह मॉक ड्रिल नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर आयोजित की जा रही है। नेताजी का जीवन अनुशासन, साहस और तैयारी का प्रतीक रहा है। प्रशासन का मानना है कि इस दिन किया गया अभ्यास नागरिकों में कर्तव्यबोध और सामूहिक जिम्मेदारी का भाव जगाएगा।

नागरिकों के लिए आवश्यक सावधानियाँ

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि सायरन बजते ही घबराएँ नहीं, अफवाहों से बचें, घरों और दुकानों की रोशनी बंद रखें, सुरक्षित स्थानों पर शरण लें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। मोबाइल टॉर्च का सीमित उपयोग करें, अनावश्यक बाहर न निकलें और आपात सेवाओं के मार्ग को अवरुद्ध न करें। यह सहयोग ही मॉक ड्रिल को सफल बनाएगा।

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समन्वय ही सफलता की कुंजी

बैठक में सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ मॉक ड्रिल को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के निर्देश दिए गए। नागरिक सुरक्षा, पावर कॉर्पोरेशन, अग्निशमन, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन की सक्रिय सहभागिता से यह अभ्यास जिले की आपदा-तैयारी क्षमता को नई मजबूती देगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

ब्लैक आउट मॉक ड्रिल क्या होती है?

ब्लैक आउट मॉक ड्रिल एक अभ्यास है जिसमें आपात स्थिति की नकल करते हुए बिजली बंद, सायरन, शरण-प्रक्रिया और राहत-बचाव का परीक्षण किया जाता है, ताकि वास्तविक संकट में नुकसान कम किया जा सके।

सायरन बजने पर नागरिक क्या करें?

घबराएँ नहीं, रोशनी बंद रखें, सुरक्षित स्थान पर शरण लें, प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और अनावश्यक बाहर न निकलें।

क्या यह ड्रिल वास्तविक खतरे का संकेत है?

नहीं, यह केवल अभ्यास है। इसका उद्देश्य तैयारी और समन्वय को परखना है, न कि किसी वास्तविक खतरे की सूचना देना।

ड्रिल के बाद सामान्य स्थिति कब होगी?

ऑल क्लियर सायरन के बाद राहत-बचाव प्रदर्शन पूरा होते ही बिजली आपूर्ति बहाल की जाएगी और नगर पालिका सफाई व पुनर्स्थापन करेगी।

बाराबंकी आदर्श कोतवाली नगर का मुख्य द्वार, जहां साइबर ठगी मामले में शिकायत दर्ज की गई।
बाराबंकी की आदर्श कोतवाली नगर, जहां शेयर बाजार में निवेश के नाम पर नायब तहसीलदार से हुई 16 लाख रुपये की साइबर ठगी की शिकायत दर्ज की गई।

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